दिल्ली को उड़ाने की साजिश? डॉक्टरों, मौलवियों और पाकिस्तान के हैंडलरों का नेटवर्क बेनकाब

क्या डॉक्टरों और मौलवियों की आड़ में दिल्ली को दहलाने की पाक साजिश रची जा रही थी और वक्त रहते नाकाम हो गई?

The Narrative World    11-Nov-2025
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दिल्ली के दिल में तबाही की ऐसी साजिश रची जा रही थी, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए। जम्मू कश्मीर पुलिस की सतर्कता से एक ऐसा आतंक नेटवर्क ध्वस्त हुआ है जो पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ा था। इस नेटवर्क में डॉक्टर, मौलवी और पढ़े-लिखे प्रोफेशनल शामिल थे जो सफेद कोट की आड़ में देश के खिलाफ खतरनाक साजिश रच रहे थे।
 
करीब 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक सामग्री की बरामदगी ने पूरे देश को हिला दिया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह आतंकी मॉड्यूल दिल्ली को दहलाने की तैयारी में था। अगर यह साजिश वक्त रहते पकड़ में न आती, तो राजधानी में खून और आग का मंजर होता।
 
लाल किले के पास धमाका, साजिश की कड़ी?
 
दिल्ली में सोमवार शाम यानी 10 नवंबर को लाल किले के पास सुभाष मार्ग ट्रैफिक सिग्नल पर चलती कार में जोरदार धमाका हुआ। इस विस्फोट में 8 लोगों की मौत हुई और 24 लोग घायल हुए। गृह मंत्री अमित शाह तुरंत LNJP अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। एनआईए और एनएसजी की टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू हुई।
 
 
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दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने बताया कि धमाका शाम करीब 6:52 बजे हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री से बात कर स्थिति की जानकारी ली। पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। प्रारंभिक जांच में शक जताया गया है कि कार में पहले से विस्फोटक सामग्री मौजूद थी। संयोग यह कि कुछ घंटे पहले ही दिल्ली पुलिस ने 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट और 2,500 किलो अन्य विस्फोटक बरामद किए थे। अब जांच एजेंसियां इन दोनों घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
 
जम्मू कश्मीर पुलिस ने खोला आतंकी जाल
 
पूरी कहानी की शुरुआत श्रीनगर के नौगाम इलाके से हुई, जहां अक्टूबर में अचानक जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगे दिखाई दिए। SSP जी वी सुंदर चक्रवर्ती ने इस पर कार्रवाई की। CCTV फुटेज के आधार पर तीन ओवरग्राउंड वर्कर पकड़े गए जिनकी पूछताछ में बड़ा नाम सामने आया, शोपियां का मौलवी इरफान अहमद। जांच में सामने आया कि इरफान पाकिस्तान में बैठे आतंकी उमर बिन खत्ताब से संपर्क में था।
 
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इरफान ने कई डॉक्टरों को कट्टरपंथ की राह पर धकेला था। इनमें सबसे अहम नाम हैं डॉ. मुझम्मिल शाकिल और डॉ. आदिल अहमद राथर, जो फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम कर रहे थे। ये डॉक्टर हथियार और विस्फोटक इकट्ठा कर खुद कार से दिल्ली पहुंचा रहे थे।
 
फरीदाबाद में बारूद का पहाड़
 
फरीदाबाद के धौज और फतेहपुर टैगा गांव में छापेमारी में पुलिस के हाथ जो लगा, उसने एजेंसियों को हिला दिया। एक घर से 350 किलो विस्फोटक, 20 टाइमर, रायफलें और पिस्टलें मिलीं। दूसरे घर से 2,563 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ। यही सामग्री बड़े पैमाने पर धमाकों में इस्तेमाल होती है।
 
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एक महिला डॉक्टर, डॉ. शाहीन सईद, जो मुझम्मिल की करीबी बताई जा रही है, हथियारों को अपनी कार से ढोती थी। जब उसकी कार की तलाशी ली गई, तो उसमें AK-47 और गोलियां मिलीं। अब वह पुलिस हिरासत में है।
 
दिल्ली था निशाना, पर नाकाम हुई साजिश
 
जांच एजेंसियों के अनुसार, ये लोग दो साल से धीरे-धीरे बारूद इकट्ठा कर रहे थे। मकसद था दिल्ली को दहलाना और देश में सांप्रदायिक तनाव फैलाना। डॉक्टर और प्रोफेसर जैसे पेशों की आड़ में उन्होंने पूरे देश में नेटवर्क फैला लिया था।
 
पाकिस्तान का इस्लामिक नेक्सस उजागर
 
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इस पूरी साजिश के सूत्र पाकिस्तान से जुड़े मिले हैं। फंडिंग धार्मिक चंदों और शैक्षणिक ग्रांट के नाम पर होती थी। यह पूरा नेटवर्क इस्लामिक कट्टरपंथ से प्रेरित था, जिसमें जिहाद के नाम पर पढ़े-लिखे युवाओं को गुमराह किया जा रहा था।
 
जम्मू कश्मीर पुलिस का बड़ा योगदान
 
अगर जम्मू कश्मीर पुलिस की चौकसी और हिम्मत न होती, तो यह नेटवर्क दिल्ली को तबाह कर सकता था। पुलिस ने ऑपरेशन के हर चरण में सूझबूझ और तकनीकी दक्षता दिखाई।
 
यह सिर्फ एक आतंकी साजिश नहीं, बल्कि भारत की स्थिरता के खिलाफ संगठित जंग थी। ऐसे “व्हाइट कॉलर टेररिस्ट” जो किताबों और कुरान की आड़ में बम छिपाते हैं, उन्हें पहचानना अब वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है ताकि कोई फिर कभी देश के दिल पर वार करने की हिम्मत न कर सके।
 
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र