आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीताराम राजू जिले के रामपचोदवरम और मारेडपल्ली के बीच पहाड़ी इलाकों में बुधवार तड़के ग्रे हाउंड पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ ने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की लड़ाई को नई ताकत दी है। इस मुठभेड़ में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी के प्रमुख सदस्य गजराला रवि उर्फ उदय उर्फ गणेश सहित तीन वरिष्ठ नक्सलियों के मारे जाने की खबर आई है।
मारे गए नक्सलियों में जोनल कमेटी की सदस्य अरुणा और एक नक्सली अंजू शामिल हैं। मुठभेड़ स्थल से तीन एके-47 राइफलें बरामद की गई हैं, जो नक्सलियों की हिंसक मंशा को दर्शाती हैं। अल्लुरी सीताराम जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित बरदार ने इस मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए इसे नक्सलियों के खिलाफ एक "ऐतिहासिक जीत" करार दिया।
मुठभेड़ का घटनाक्रम: खुफिया सूचना और त्वरित कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ग्रे हाउंड कमांडो, जो नक्सल विरोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित इकाई है, को खुफिया जानकारी मिली थी कि मारेडपल्ली के घने जंगलों में नक्सलियों का एक बड़ा समूह किसी हमले की योजना बना रहा है। इस सूचना के आधार पर, ग्रे हाउंड ने रामपचोदवरम और मारेडपल्ली के बीच पहाड़ी क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
बुधवार तड़के, जब जवान जंगल में आगे बढ़ रहे थे, नक्सलियों ने उन पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की, और दोनों पक्षों के बीच 25 मिनट तक गोलीबारी चली। इस मुठभेड़ में गजराला रवि उर्फ़ उदय, अरुणा, और एक अंजू मारे गए, जबकि कुछ अन्य नक्सलियों के भागने की आशंका है।
पुलिस ने बताया, “यह ऑपरेशन नक्सलियों के खिलाफ हमारी रणनीति का हिस्सा था। गजराला रवि जैसे सेंट्रल कमेटी सदस्य का मारा जाना नक्सली संगठन के लिए एक बड़ा झटका है। हमने मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं, और अन्य नक्सलियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।”
गजराला रवि: नक्सल आंदोलन का प्रमुख चेहरा
गजराला रवि, जो तेलंगाना के भूपालपल्ली जिले (पूर्व में वारंगल जिला) के वेलिशाला गाँव का रहने वाला था, 1990 से नक्सली आंदोलन से जुड़ा था। वह आंध्र-उड़ीसा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी (एओबीएसजेडसी) का सचिव था और माओवादी संगठन की सेंट्रल कमेटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
रवि पर कई आतंकी हमलों, सुरक्षाबलों पर घात, और वैचारिक प्रचार में शामिल होने के आरोप थे। उस पर 40 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रवि की पत्नी, जो भी एक नक्सली थी, पहले एक मुठभेड़ में मारी जा चुकी है।
सुरक्षा एक्स्पर्ट का कहना है कि गजराला रवि का मारा जाना माओवादी संगठन की रीढ़ तोड़ने वाला है। वह न केवल आंध्र-उड़ीसा सीमा क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का मास्टरमाइंड था, बल्कि मध्य भारत में उनकी वैचारिक रणनीति का भी एक प्रमुख चेहरा था।
अरुणा, जो जोनल कमेटी की सदस्य थी, भी नक्सली संगठन में एक सक्रिय भूमिका निभा रही थी। वह गरियाबंद में मारे गए नक्सली चलपती की पत्नी थी और संगठन की रणनीति और भर्ती प्रक्रिया में शामिल थी।
मुठभेड़ से बरामद हथियार और नक्सलियों की मंशा
मुठभेड़ स्थल से तीन एके-47 राइफलों की बरामदगी ने सुरक्षाबलों की आशंकाओं को और पुख्ता किया है कि नक्सली किसी बड़े हमले की तैयारी में थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मारेडपल्ली का जंगल नक्सलियों का एक प्रमुख ठिकाना रहा है, जहाँ वे अपनी बैठकों और हथियारों के भंडारण के लिए इकट्ठा होते हैं। यह क्षेत्र, जो पूर्वी घाटों की ऊँची पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है, नक्सलियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह रहा है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “एके-47 जैसे घातक हथियारों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि नक्सली किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे। यह मुठभेड़ उस योजना को विफल करने में कामयाब रही।”
नक्सलवाद के खिलाफ बढ़ता अभियान
यह मुठभेड़ नक्सलियों के खिलाफ हाल के महीनों में सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाइयों का हिस्सा है। आंध्र-उड़ीसा सीमा क्षेत्र, जो छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से सटा हुआ है, लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ रहा है।
हाल ही में, 29 मार्च 2025 को सुकमा-दंतेवाड़ा सीमा पर उपमपल्ली केरलापाल इलाके में हुई मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे, जिसमें डीवीसीएम रैंक का नक्सली जगदीश भी शामिल था। इसी तरह, 11 जून 2025 को सुकमा के कुकानार थाना क्षेत्र में पुसगुन्ना जंगल में 5 लाख के इनामी नक्सली बमन सहित दो नक्सली ढेर हुए थे।
केंद्र सरकार ने 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक बयान में कहा, “नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। हमारी सरकार और सुरक्षाबल इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
स्थानीय समुदाय पर प्रभाव
मारेडपल्ली और आसपास के आदिवासी गाँवों में इस मुठभेड़ ने डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय लोग, जो पहले से ही नक्सलियों के आतंक के बीच फँसे हुए हैं, इस मुठभेड़ के बाद और सतर्क हो गए हैं। एक स्थानीय निवासी, जिसने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम न तो नक्सलियों का समर्थन करते हैं और न ही पुलिस के खिलाफ हैं। सच यही है कि नक्सलियों के कारण हमारा जीवन और मुश्किल हो जाता है। जंगल में जाना अब खतरनाक हो गया है।”
कुछ ग्रामीणों का मानना है कि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई से क्षेत्र में शांति बहाल हो सकती है। एक ग्रामीण, लक्ष्मण (बदला हुआ नाम), ने कहा, “नक्सली हमें जबरन अपने साथ ले जाते हैं और उगाही करते हैं। अगर वे खत्म हो जाएँ, तो शायद हमें कुछ राहत मिले।”
मारेडपल्ली की इस मुठभेड़ ने नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की लड़ाई में एक नया अध्याय जोड़ा है। गजराला रवि और अरुणा जैसे प्रमुख नक्सलियों का मारा जाना निश्चित रूप से माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका है। लेकिन, इस क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सरकार को न केवल सैन्य कार्रवाइयों पर ध्यान देना होगा, बल्कि जनजातीय समुदायों के कल्याण और विकास पर भी निवेश करना होगा। फिलहाल, मारेडपल्ली के जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी है, और पुलिस को उम्मीद है कि इस क्षेत्र में छिपे अन्य नक्सलियों को जल्द ही पकड़ा जाएगा।