विश्व हिन्दी दिवस 2026: भाषा जो भारत को दुनिया से जोड़ती है

वैश्विक पहचान की ओर बढ़ती हिन्दी, जो संस्कृति, संवाद और तकनीक के माध्यम से भारत की आवाज़ को दुनिया तक पहुँचाती है।

The Narrative World    10-Jan-2026
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हर वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक भाषा का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, वैचारिक परंपरा और वैश्विक संवाद की शक्ति का प्रतीक भी है। वर्ष 2026 में जब हम विश्व हिन्दी दिवस मना रहे हैं, तब हिन्दी ने न केवल देश की सीमाओं के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है। आज हिन्दी संवाद, साहित्य, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभा रही है।
 
दरअसल, विश्व हिन्दी दिवस का इतिहास वर्ष 1975 से जुड़ा है, जब नागपुर में पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित हुआ। इसके बाद भारत सरकार ने 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। तभी से यह दिन हिन्दी के वैश्विक स्वरूप को रेखांकित करता आ रहा है। इस अवसर पर दुनिया भर में हिन्दी भाषी समुदाय हिन्दी के प्रचार, प्रसार और सशक्तिकरण के लिए कार्यक्रम आयोजित करता है।
 
हिन्दी की सबसे बड़ी ताकत उसकी सरलता और भावनात्मक जुड़ाव है। यह भाषा आम जनमानस की अभिव्यक्ति बनकर उभरी है। गांव से लेकर महानगर तक हिन्दी लोगों को जोड़ती है। इसके साथ ही हिन्दी साहित्य ने समाज को दिशा दी है। प्रेमचंद, निराला, महादेवी वर्मा और अज्ञेय जैसे रचनाकारों ने हिन्दी को संवेदनशीलता और वैचारिक गहराई प्रदान की। आज भी नई पीढ़ी के लेखक हिन्दी के माध्यम से समकालीन मुद्दों को सामने ला रहे हैं।
 
Illustration showing Hindi news, books, smartphone and AI icons representing digital journalism and social media. 
 
वर्तमान समय में हिन्दी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल युग में हिन्दी इंटरनेट और सोशल मीडिया की प्रमुख भाषा बन चुकी है। मोबाइल ऐप, समाचार पोर्टल, ब्लॉग और वीडियो मंचों पर हिन्दी की उपस्थिति लगातार मजबूत हो रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हिन्दी समय के साथ खुद को ढाल रही है और नई तकनीक को अपनाकर आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि आज वैश्विक कंपनियां भी हिन्दी कंटेंट पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
 
इसके अलावा, शिक्षा के क्षेत्र में हिन्दी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। नई शिक्षा नीति ने मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता देकर हिन्दी को नई ऊर्जा दी है। इससे छात्रों को अपनी भाषा में सोचने और समझने का अवसर मिल रहा है। परिणामस्वरूप सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बन रही है। यह बदलाव हिन्दी को ज्ञान की भाषा के रूप में स्थापित करने में सहायक साबित हो रहा है।
 
 
हिन्दी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है। कई वैश्विक संस्थानों में हिन्दी में संवाद और कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय ने हिन्दी को जीवंत बनाए रखा है। अमेरिका, यूरोप, एशिया और अफ्रीका के कई देशों में हिन्दी शिक्षण केंद्र सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इससे हिन्दी वैश्विक संवाद की भाषा के रूप में उभर रही है।
 
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हालांकि, हिन्दी के सामने चुनौतियां भी मौजूद हैं। अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव और भाषाई मिश्रण के कारण शुद्ध हिन्दी के प्रयोग में कमी देखी जा रही है। इसके बावजूद समाधान भी हमारे पास है। यदि हम दैनिक जीवन में हिन्दी का अधिक प्रयोग करें, बच्चों को हिन्दी साहित्य से जोड़ें और तकनीक में हिन्दी को प्राथमिकता दें, तो ये चुनौतियां अवसर में बदल सकती हैं।
 
विश्व हिन्दी दिवस 2026 हमें यह अवसर देता है कि हम हिन्दी के प्रति अपने दायित्व को समझें। यह दिन केवल भाषणों और आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम हिन्दी को सम्मान के साथ अपनाएं और अगली पीढ़ी तक उसकी विरासत पहुंचाएं। हिन्दी हमारी पहचान है और हमारी सांस्कृतिक शक्ति भी।
 
 
अंततः, विश्व हिन्दी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज को जोड़ने वाली शक्ति होती है। हिन्दी ने यह भूमिका बखूबी निभाई है और आगे भी निभाती रहेगी। वर्ष 2026 में विश्व हिन्दी दिवस पर यही कामना है कि हिन्दी वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त होकर उभरे और भारत की सांस्कृतिक आवाज को दुनिया तक पहुंचाए।
 
लेख
शोमेन चंद्र