बालाघाट में बच्चों की मौत पर राजनीति करने पहुचे राहुल गाँधी

बच्चों की मौत पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए विपक्षी सरकार ने कांग्रेस शासन की सुरक्षा नाकामियों पर सवाल उठाए

The Narrative World    03-Oct-2026
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Rahul Gandhi arrives in Balaghat to politicize the deaths of children - FEATURED IMAGE
 
बालाघाट में बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुँचे राहुल गांधी पर भाजपा ने 1 अक्टूबर को पलटवार किया, कांग्रेस शासन में नक्सलवाद और सुरक्षा नाकामियों का रिकॉर्ड उठाकर उनकी आलोचना पर सवाल किए।
 
बालाघाट के जगला गाँव में राहुल गांधी की यात्रा के बाद मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस के पुराने शासन पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इलाके में नक्सलवाद किसके कार्यकाल में बढ़ा और कांग्रेस अपने मंत्री लिखीराम कावरे की हत्या रोकने में क्यों विफल रही और राहुल रंधी ने कावरे के परिवार की कितनी बार सुध ली?

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इस पलटवार का राजनीतिक महत्व साफ है। कांग्रेस आज जनजाति इलाकों की समस्याओं पर भाजपा से जवाब माँग रही है, लेकिन लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस पार्टी अपने शासन की जिम्मेदारी से पीछे कैसे हट सकती है? अगर राहुल गाँधी को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है, तो उतना ही अधिकार जनता को कांग्रेस के रिकॉर्ड का हिसाब माँगने का भी है।
 
जब कांग्रेस का मंत्री भी सुरक्षित नहीं था
 
दिसंबर 1999 में बालाघाट में माओवादियों ने लिखीराम कावरे की हत्या कर दी थी। वे दिग्विजय सिंह की कांग्रेस सरकार में परिवहन मंत्री थे। यह घटना कांग्रेस शासन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने का गंभीर आधार है।
 
जिस व्यवस्था में एक मंत्री की सुरक्षा टूट जाए, वहाँ दूरदराज के ग्रामीणों के भरोसे और सुरक्षा का सवाल कितना बड़ा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। कांग्रेस को बताना चाहिए कि उस दौर की कमजोरियों से उसने क्या सीखा। केवल विपक्षी सरकार की आलोचना करने से उसकी अपनी विफलताएँ गायब नहीं हो जातीं।

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केंद्र सरकार के पक्ष में क्या कहते हैं आँकड़े?
 
केंद्र सरकार के प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार, देश में नक्सली हिंसा की घटनाएँ 2014 की 870 से घटकर 2025 में 234 रह गईं। इसी अवधि में मौतों का आँकड़ा 310 से घटकर 100 हुआ।

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भारत अब नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है और कोई भी जिला नक्सल प्रभावित श्रेणी में नहीं है। इस स्थिति को बनाए रखने के लिए पूर्व प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा निगरानी और विकास कार्य जारी रखे जा रहे हैं। अब पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में बेहतर इलाज, शिक्षा और रोजगार की पहुँच तेज़ी से बढती नज़र आ रही है।
 
 
कांग्रेस यदि खुद को जनजातियो की आवाज बताती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि नक्सली हिंसा रोकने के लिए उसकी वैकल्पिक रणनीति क्या है?
 
सड़क और संपर्क भी जरूरी
 
अक्टूबर 2024 की गृह मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 14,400 किलोमीटर सड़कें बन चुकी थीं और करीब 6,000 मोबाइल टावर लगाए गए थे। मंत्रालय ने सुरक्षा अभियान के साथ विकास योजनाओं की पहुँच बढ़ाने पर जोर दिया था।

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यह दिखता है कि दूरदराज के क्षेत्रों में सुधार के लिए सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर साथ काम करना जरूरी है। सड़क और संपर्क इलाज, शिक्षा तथा प्रशासन तक पहुँच में मदद कर सकते हैं।
 
राहुल की राजनीति की असली परीक्षा
 
पीड़ित परिवारों से मिलना महत्वपूर्ण है। लेकिन यात्रा के बाद लगातार पैरवी, स्थानीय जरूरतों की पहचान और समाधान की निगरानी भी जरूरी है। राहुल की गंभीरता का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वे आगे क्या करते हैं।
 
कांग्रेस को केवल आरोप लगाने के बजाय अस्पतालों, पोषण सेवाओं और कर्मचारियों की उपलब्धता पर स्पष्ट सुझाव देना चाहिए। अपनी पुरानी नाकामियों पर जवाब देना और विपक्षी सरकार के सामने व्यवहारिक माँगें रखना उसकी विश्वसनीयता बढ़ाएगा। चुनिंदा राजनीतिक जवाबदेही से जनता का भरोसा नहीं बनता।

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हलाकि, राज्य सरकार ने मृत बच्चो के परिवारों के लिए चार-चार लाख रुपये की सहायता घोषित की है और हाई कोर्ट ने जवाब माँगा है। परिवारों को जाँच, इलाज और दोबारा ऐसी त्रासदी रोकने की व्यवस्था चाहिए।
 
 
भाजपा ने कांग्रेस के सुरक्षा रिकॉर्ड पर सवाल उठाकर राहुल की आलोचना को चुनौती दी है। नक्सली हिंसा में कमी उसके पक्ष का महत्वपूर्ण आधार है। कांग्रेस को अपने शासन की नाकामियों का जवाब देना चाहिए।
 
लेख
 
MOKSHI JAIN 
 
मोक्षी जैन
उप-संपादक