‘2050 में जी रहा चीन’: चमकते शहरों के पीछे नागरिकों की कितनी आजादी?

तेज रफ्तार ट्रेनें और आधुनिक शहर चीन की उपलब्धियाँ हैं। लेकिन इंटरनेट पर पहरा, असहमति पर कार्रवाई और अल्पसंख्यकों पर नियंत्रण उसकी उस तस्वीर का हिस्सा हैं, जो सोशल मीडिया में दिखाई नहीं जाती।

The Narrative World    01-Nov-2026
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FEATURED IMAGE - China How much freedom do citizens have behind the shining cities
 
सोशल मीडिया पर चीन की तस्वीर अक्सर भविष्य के देश जैसी दिखाई जाती है। चमकते शहर, रोबोट और सुविधाजनक परिवहन देखकर कहा जाता है कि चीन तो 2050 में जी रहा है। लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी के शासन में नागरिकों की अभिव्यक्ति, धार्मिक पहचान और निजी जीवन पर नियंत्रण दूसरा पक्ष सामने रखती हैं। तकनीक और आर्थिक विकास के साथ निगरानी तथा सेंसरशिप कैसे बढ़ सकती हैं, चीन इसका गंभीर उदाहरण है।
 
प्रगति वास्तविक है, लेकिन तस्वीर अधूरी
 
चीन की आर्थिक उपलब्धियों को नकारना गलत होगा। विश्व बैंक की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले लगभग 40 वर्षों में तत्कालीन अंतरराष्ट्रीय अत्यधिक गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या करीब 80 करोड़ घटी। करोड़ों परिवारों के जीवन में आए इस बदलाव का महत्त्व समझना चाहिए।

World Bank report
 
समस्या तब होती है, जब इन उपलब्धियों को शासन की हर नीति के समर्थन में पेश किया जाता है। अच्छी सड़क नागरिक की स्वतंत्रता का प्रमाण नहीं है। तेज ट्रेन यह नहीं बताती कि उसमें बैठा यात्री सरकार की आलोचना कितनी स्वतंत्रता से कर सकता है। किसी देश को समझने के लिए उसकी इमारतों के साथ लोगों के अधिकार भी देखने होंगे।
 
इंटरनेट तेज, बोलने की जगह सीमित

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ह्यूमन राइट्स वॉच की विश्व रिपोर्ट 2026 के अनुसार, चीनी सरकार सूचना के प्रमुख माध्यमों को नियंत्रित करती है और व्यापक सेंसरशिप तथा निगरानी व्यवस्था चलाती है। फ्रीडम हाउस की 2026 की रिपोर्ट भी चीन के मीडिया वातावरण और ऑनलाइन नियंत्रण को बेहद प्रतिबंधात्मक बताती है।
 
इसका असर केवल पत्रकारों तक सीमित नहीं रहता। जब लोगों को यह चिंता हो कि उनकी टिप्पणी, संपर्क या सार्वजनिक असहमति परेशानी पैदा कर सकती है, तो वे बोलने से पहले खुद को रोकते हैं।

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ऐसे वातावरण में दिखाई देने वाली शांति को पूरी संतुष्टि मान लेना भूल होगी। शिकायत सुनाई नहीं देना और शिकायत का नहीं होना अलग बातें हैं। आधुनिक संचार व्यवस्था का मूल्य तभी पूरा है, जब नागरिक उसका उपयोग सत्ता से प्रश्न करने के लिए भी कर सके।
 
निगरानी किसकी सुरक्षा करती है?
 
कैमरे और डिजिटल पहचान अपराध रोकने में उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन इनके साथ स्वतंत्र निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच चीन में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मनमानी हिरासत और दखल देने वाली सामूहिक निगरानी की जानकारी देती है।

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तकनीक का प्रश्न इसलिए केवल सुविधा का नहीं है। प्रश्न यह भी है कि नागरिक की जानकारी किसके पास है और उसके गलत इस्तेमाल पर वह शिकायत कहाँ करेगा। जिस व्यवस्था में सत्ता की आलोचना सीमित हो, वहाँ निगरानी नागरिक को सुरक्षित करने के साथ उसे असुरक्षित भी बना सकती है।
 
शिनजियांग में विकास से बड़े प्रश्न
 
शिनजियांग के उइगर और अन्य मुख्यतः मुस्लिम समुदायों पर कार्रवाई इस बहस का गंभीर हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के 2022 के आकलन में गंभीर उल्लंघन दर्ज किए गए। रिपोर्ट ने कहा कि मनमानी और भेदभावपूर्ण हिरासत तथा बुनियादी अधिकारों से वंचित करने की व्यापकता मानवता के विरुद्ध अपराधों की श्रेणी में आ सकती है। यह संभावित कानूनी निष्कर्ष था, किसी अदालत का अंतिम फैसला नहीं।
 
तिब्बती बच्चों की पहचान का सवाल
 
2023 में संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने लगभग 10 लाख तिब्बती बच्चों पर आवासीय विद्यालय व्यवस्था के प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने परिवार, भाषा और संस्कृति से दूरी बढ़ने तथा जबरन सांस्कृतिक समायोजन की आशंका बताई।

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चीनी प्रतिनिधियों ने कहा कि कठिन पहाड़ी भूगोल में ये विद्यालय शिक्षा की पहुँच बढ़ाते हैं और सांस्कृतिक तथा द्विभाषी शिक्षा उपलब्ध कराते हैं। इस पक्ष को दर्ज करना जरूरी है। फिर भी सुविधाओं के दावे बच्चों की मातृभाषा और पारिवारिक संबंधों पर उठे प्रश्नों का पूरा उत्तर नहीं हैं।
 
शहर बनाने वालों की असमान पहुँच

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चीन की हुकौ यानी घरेलू पंजीकरण व्यवस्था ने प्रवासी श्रमिकों की शहरी शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी सेवाओं तक पहुँच में बाधाएँ पैदा की हैं। मई 2026 में सरकार ने वास्तविक निवास के आधार पर सेवाएँ बढ़ाने के दिशानिर्देश जारी किए। सुधार महत्त्वपूर्ण है, लेकिन घोषणा और जमीन पर बराबरी के बीच का अंतर देखना बाकी है।
 
भविष्य की सही कसौटी
 
चीन की चमक को देखकर प्रभावित होना स्वाभाविक है। लेकिन उसके आधार पर नागरिक अधिकारों के प्रश्न खारिज करना अनुचित है। चीनी जनता की मेहनत और उपलब्धियाँ सम्मान योग्य हैं। कम्युनिस्ट शासन की जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है।
 
 
भविष्य का अच्छा देश वह होगा, जहाँ तकनीक लोगों की सुविधा बढ़ाए और नागरिक बिना डर सत्ता से प्रश्न कर सकें और खुल कर जी सके। केवल चमकती इमारतें किसी देश को भविष्य में नहीं पहुँचा देतीं।
 
लेख
 
मोक्षी जैन
उप-संपादक