नारायणपुर के दिवालूर में सुरक्षाबलों ने नया कैंप स्थापित किया, जबकि
कांकेर में IED बरामद कर माओवादियों की साजिश नाकाम की और उनके ठिकानों पर कार्रवाई तेज की।
बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने माओवादियों के खिलाफ अभियान को और तेज करते हुए उनके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में सीधी घुसपैठ शुरू कर दी है। सोमवार को नारायणपुर पुलिस ने अबूझमाड़ के दिवालूर इलाके में नया सुरक्षा और जन-सुविधा कैंप स्थापित किया। यह इलाका लंबे समय से माओवादियों के सेंट्रल कमेटी का सेफजोन माना जाता था, जहां आम लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचना लगभग असंभव रहा।
सुरक्षाबलों ने इस साल यह सातवां नया कैंप स्थापित किया है। इसी क्षेत्र में पहले
कुख्यात नक्सली बसवा राजू मारा गया था, जिसके बाद से सुरक्षाबलों ने लगातार दबाव बनाए रखा है। DRG, ITBP और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने इस अभियान को अंजाम दिया। इस कदम से अब दूरस्थ गांवों तक सड़क, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है।
और वहीं, कांकेर जिले में सुरक्षाबलों ने माओवादियों की बड़ी साजिश को विफल कर दिया। BSF और DRG की संयुक्त टीम ने छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन के दौरान चार IED बरामद किए। सुरक्षाबलों ने इन विस्फोटकों को मौके पर ही नष्ट कर दिया ताकि कोई नुकसान न हो सके।
यह अभियान 15 मार्च को हापाटोला और बिनागुंडा गांवों के बीच पहाड़ी जंगल क्षेत्र में चलाया गया। टीम ने यहां छिपाकर रखे गए तीन प्रेशर कुकर IED और एक पाइप IED के साथ नक्सली सामग्री भी बरामद की। सुरक्षाबलों ने बिजली के तार, नक्सली वर्दी, पटाखे और प्रचार सामग्री भी जब्त की।
सुरक्षाबलों ने कार्रवाई के दौरान कालपर और अमाटोला गांवों में बने चार नक्सली स्मारकों को भी ध्वस्त कर दिया। इन स्मारकों के जरिए माओवादी अपने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश करते थे, लेकिन सुरक्षाबलों ने उनकी इस रणनीति को भी नाकाम कर दिया।
इस ऑपरेशन में BSF की 94वीं बटालियन के कमांडेंट मनोज कसाना के नेतृत्व में टीम ने हिस्सा लिया। साथ ही सहायक कमांडेंट सतेन्द्र मोहन और DRG के अधिकारी भी इस अभियान में सक्रिय रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
बस्तर में सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से माओवादियों का नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाके में कैंप स्थापित होने से साफ संकेत मिल रहा है कि सरकार विकास और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर अंतिम लड़ाई लड़ रही है, जिससे माओवादी विचारधारा को निर्णायक झटका लग रहा है।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र