तमिलनाडु के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने चेन्नई में आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान द्रविड़ विचारधारा और इस्लाम को समान बताया, जिससे राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर विवाद और बहस तेज हो गई है।
तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। 16 मार्च, सोमवार को डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। चेन्नई में आयोजित इफ्तार कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि द्रविड़ विचारधारा और इस्लाम के सिद्धांत "मौलिक रूप से एक जैसे" हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने इस्लाम को समानता, प्रेम और उदारता का प्रतीक बताया। साथ ही कहा कि उनकी पार्टी डीएमके और मुस्लिम समुदाय के बीच मजबूत संबंध हैं, जिन्हें कोई तोड़ नहीं सकता।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके पिछले बयानों को लेकर विवाद अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। वर्ष 2023 में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना "मलेरिया और डेंगू" जैसी बीमारियों से की थी और कहा था कि इसका सिर्फ विरोध नहीं बल्कि इसे समाप्त कर देना चाहिए। इस टिप्पणी को लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने भी टिप्पणी करते हुए इसे "हेट स्पीच" तक बताया था। वहीं, बीजेपी समेत कई विपक्षी दलों ने उनके बयानों को "विभाजनकारी" और "धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला" करार दिया था।
विवाद के केंद्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इनमें धर्मों की आपस में तुलना करना, सनातन धर्म को बीमारियों से जोड़ना और राजनीतिक मंच से धार्मिक संदेश देना शामिल है।
जहां एक ओर उनके समर्थक इसे सामाजिक न्याय और समानता की विचारधारा के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं विरोधियों का कहना है कि यह सीधा धार्मिक अपमान है और इससे समाज में विभाजन पैदा हो सकता है।
उदयनिधि स्टालिन के इस बयान ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में धर्म, विचारधारा और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सामाजिक न्याय की बात है या फिर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली राजनीति। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।
रिपोर्ट
मोक्षी जैन
उपसंपादक, द नैरेटिव