महाराष्ट्र के गड़चिरोली में
गुरुवार को 11 इनामी माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिससे कंपनी 10 लगभग खत्म हुई और अब जंगलों में सिर्फ 6 नक्सली सक्रिय बचे।
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने के लक्ष्य से पहले पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल 68 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें कई शीर्ष कमांडर और समिति सदस्य शामिल रहे, जिनकी गतिविधियों से लंबे समय तक क्षेत्र में डर का माहौल बना रहा।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कंपनी 10 माओवादी संगठन की एक खतरनाक सैन्य इकाई रही, जिसने कई बार सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमले किए, वसूली की और आम लोगों को भी नुकसान पहुंचाया। अब इस इकाई के टूटने से माओवादियों की ताकत को बड़ा झटका लगा है।
आत्मसमर्पण करने वालों में सोनी उर्फ बाली वट्टे मटामी, बुदरी उर्फ रामबट्टी मटामी, सुखलाल बोलगा कोकसा और शांति उर्फ सोमरी गंगा तेलामी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देते रहे।
पुलिस और C-60 कमांडो की लगातार कार्रवाई, ड्रोन निगरानी, सैटेलाइट से जानकारी और सर्च ऑपरेशन ने माओवादियों पर दबाव बढ़ाया। इसके साथ ही राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति ने भी असर दिखाया। नक्सलियों को 4 से 8.5 लाख रुपये तक की सहायता, प्रशिक्षण और सुरक्षा का भरोसा दिया जा रहा है।
माओवादी विचारधारा से मोहभंग और निर्दोष लोगों पर होने वाली हिंसा से निराश होकर कई नक्सली अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं। अक्टूबर 2025 में भी बड़े नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति समेत 61 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। तब से अब तक 123 से अधिक नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं।
एक समय गड़चिरोली के सभी 10 उपखंडों में फैला माओवादी नेटवर्क अब सिमटकर भामरागढ़ के सीमावर्ती इलाकों तक रह गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि विकास और सख्त कार्रवाई की रणनीति से यह सफलता मिली।
स्पेशल IG संदीप पाटिल, DIG अंकित गोयल और SP नीलोत्पल ने जंगल में बचे 6 नक्सलियों, खासकर महिला सदस्यों से आत्मसमर्पण की अपील की। उन्होंने भरोसा दिया कि सरकार उन्हें पूरी सुरक्षा और बेहतर जीवन का अवसर देगी। वहीं, सुरक्षा बलों ने शेष नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया है।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र