छत्तीसगढ़ के परतापुर में पुलिस ने सरेंडर करने आए भूखे नक्सलियों को एरिनझोर जंगल में भोजन कराया और भरोसा देकर मुख्यधारा में शामिल होने का रास्ता दिखाया।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच इंसानियत की मिसाल सामने आई। शनिवार को परतापुर थाना क्षेत्र के एरिनझोर जंगल में पुलिस जवानों ने सरेंडर करने पहुंचे नक्सलियों के लिए पहले भोजन तैयार किया और फिर उन्हें भरोसा दिलाया।
दरअसल, 27 मार्च को पुलिस को सूचना मिली कि तीन नक्सली सरेंडर करने वाले हैं। एक मध्यस्थ ने बताया कि ये नक्सली बारकोट और एरिनझोर के जंगलों में पहुंचेंगे। यह इलाका परतापुर थाना से करीब 35 किलोमीटर दूर है।
ये तीनों नक्सली दारसू की टीम के साथ सक्रिय थे। इनमें संगीता, लखमू और रैनू पद्दा शामिल थे। तीनों ने मौका पाकर अपनी टीम को चकमा दिया और जंगल के रास्ते सरेंडर करने निकल पड़े।
जान बचाने के लिए ये नक्सली एक दिन तक जंगल में छिपते रहे। 27 मार्च की सुबह से रात तक लगातार पैदल चलते रहे और आखिरकार 28 मार्च की रात करीब 3 बजे एरिनझोर जंगल पहुंचे। उस समय परतापुर थाना प्रभारी एसआई रामेश्वर चतुर्वेदी अपने जवानों के साथ वहां तैनात थे और उनका इंतजार कर रहे थे।
जब पुलिस ने देखा कि तीनों नक्सली भूखे हैं और पिछले दो दिनों से कुछ नहीं खाया है, तो जवानों ने तुरंत वहीं खाना बनाना शुरू किया। सभी ने साथ बैठकर भोजन किया। इस दौरान पुलिस ने नक्सलियों का डर दूर किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरेंडर करने वालों के साथ पूरा सहयोग किया जाएगा।
एसआई रामेश्वर चतुर्वेदी ने साफ कहा कि वे पहले इंसान हैं और बाद में पुलिसकर्मी। उन्होंने कहा कि सामने वाला भी इंसान है, इसलिए उसकी मदद करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी नक्सली सरेंडर करेगा, पुलिस उसे पूरी सुरक्षा के साथ मुख्यधारा में वापस लाएगी।
यह घटना दिखाती है कि अब नक्सल प्रभावित इलाकों में बदलाव आ रहा है और लोग हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहते हैं। पुलिस और प्रशासन भी उन्हें हर संभव सहयोग दे रहा है।
इसी बीच राज्य सरकार ने भी नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता का
दावा किया है। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दो साल के लगातार प्रयासों के बाद राज्य अब सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। उन्होंने इसे नक्सलवाद का अंतिम अध्याय बताया और सुरक्षा बलों के बलिदान को सराहा।
वहीं पूर्व डीजीपी डीएम अवस्थी ने भी सरकार की रणनीति की तारीफ की। उन्होंने
कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति ने सुरक्षा बलों को स्पष्ट लक्ष्य दिया। इससे नक्सलवाद अब खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है और बस्तर समेत कई इलाके तेजी से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा तय समयसीमा ने इस अभियान को गति दी। अब छत्तीसगढ़ में शांति और विकास की नई तस्वीर उभर रही है।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र