छत्तीसगढ़ में 31 मार्च की डेडलाइन पर दंतेवाड़ा, सुकमा और कांकेर में 9 नक्सलियों ने सरेंडर किया, पुलिस ने दंतेवाड़ा को नक्सलमुक्त घोषित किया और हथियार बरामद किए।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई ने 31 मार्च को बड़ा मोड़ लिया। सरकार की तय डेडलाइन के आखिरी दिन दंतेवाड़ा, सुकमा और कांकेर जिलों में कुल 9 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इनमें 6 महिला नक्सली शामिल हैं। पुलिस ने इस घटनाक्रम को नक्सलवाद के कमजोर पड़ते ढांचे का स्पष्ट संकेत बताया है।
दंतेवाड़ा जिले में 5 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। पुलिस ने दावा किया कि जिले में सक्रिय अंतिम नक्सलियों ने भी अब मुख्यधारा का रास्ता चुन लिया है। इन पर कुल 9 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इस सरेंडर के बाद पुलिस ने दंतेवाड़ा को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया। SP गौरव राय ने कहा कि अब जिले में हिंसा की जगह शांति का माहौल बन चुका है।
सुकमा जिले में भी 2 महिला नक्सलियों ने हथियार छोड़े। दोनों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम था और वे माओवादी संगठन में कंपनी स्तर की सदस्य थीं। जनिला उर्फ मड़कम हिंडमे और सोनी उर्फ माड़वी कोसी ने न केवल सरेंडर किया बल्कि अपने साथ 10 लाख रुपए नकद भी पुलिस को सौंपे। पुलिस ने इनके इनपुट के आधार पर हथियारों और कैश का बड़ा जखीरा भी बरामद किया।
कांकेर जिले में भी 2 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। हालांकि यहां अभी भी करीब 14 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें DVCM स्तर के चंदर और रूपी जैसे नाम शामिल हैं। पिछले 6 दिनों में ही 11 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। पुलिस अब सरेंडर कर चुके नक्सलियों से मिली जानकारी के आधार पर बाकी छिपे नक्सलियों तक पहुंच बना रही है और उन्हें भी हथियार छोड़ने के लिए समझा रही है।
दंतेवाड़ा पुलिस लाइन कारली में "पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन" अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इस अभियान ने साफ कर दिया कि सरकार की सख्ती और विकास की नीति ने नक्सलवाद की जड़ों को हिला दिया है। पुलिस ने अलग-अलग ऑपरेशन में इंसास, SLR, कार्बाइन और लॉन्चर जैसे घातक हथियार भी बरामद किए हैं।
नक्सलवाद के खिलाफ यह सफलता केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई का परिणाम नहीं है, बल्कि विकास और विश्वास की रणनीति का भी असर है। लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि सरकार ने गांव-गांव में स्कूल खोले, राशन की दुकानें शुरू कीं और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाईं। लोगों को आधार और राशन कार्ड देकर उन्हें योजनाओं से जोड़ा गया।
शाह ने यह भी कहा कि सरकार ने 31 मार्च 2026 की जो डेडलाइन तय की थी, उसे हासिल कर लिया गया है। उन्होंने भरोसे के साथ कहा कि देश से नक्सलवाद अब खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है। नक्सली हिंसा में लगातार गिरावट आई है और ज्यादातर क्षेत्रों में इसका प्रभाव समाप्त हो गया है।
यह पूरा घटनाक्रम साफ करता है कि नक्सलवाद केवल हिंसा और डर का रास्ता देता है, जबकि विकास और मुख्यधारा से जुड़ने पर ही स्थायी समाधान मिलता है। छत्तीसगढ़ में आज जो तस्वीर दिख रही है, वह इसी बदलाव का प्रमाण है।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र