हैदराबाद में शनिवार को 130 माओवादियों ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के सामने
आत्मसमर्पण किया। इस दौरान उन्होंने 266 घातक हथियार भी पुलिस को सौंपे।
सुरक्षा बलों के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता है। वर्षों तक हिंसा और आतंक फैलाने वाले इन माओवादियों ने आखिरकार हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का निर्णय लिया।
तेलंगाना के डीजीपी बी. शिवधार रेड्डी ने
बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 130 माओवादियों में से 125
छत्तीसगढ़ से जुड़े हैं। चार माओवादी तेलंगाना से हैं, जबकि एक व्यक्ति आंध्र प्रदेश से संबंध रखता है।
इन माओवादियों ने पुलिस को कुल 266 हथियार सौंपे। बरामद हथियारों में INSAS राइफल, AK-47 असॉल्ट राइफल, SLR, बोल्ट-एक्शन राइफल, .303 राइफल और कार्बाइन शामिल हैं। इसके अलावा 9mm पिस्टल, 7.62mm राइफल, 8mm बोल्ट-एक्शन राइफल, सिंगल-शॉट राइफल, BGL यानी ब्रीच लोडिंग गन, ग्रेनेड लॉन्चर और स्टन गन भी सुरक्षा बलों को सौंपी गईं। इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों का एक साथ जमा होना इस बात का संकेत देता है कि माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है।
अधिकारियों ने बताया कि इस आत्मसमर्पण में देवजी की पूरी PLGA समिति भी शामिल रही। इस समिति के सभी सदस्यों ने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। लंबे समय से हिंसा फैलाने वाली यह समिति अब सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सामान्य जीवन जीने की इच्छा जता रही है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों की पुनर्वास योजनाओं और विकास कार्यक्रमों ने माओवादी नेटवर्क पर गहरा असर डाला है। इन योजनाओं ने कई माओवादी सदस्यों को यह समझाया कि बंदूक और हिंसा का रास्ता केवल विनाश की ओर ले जाता है। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग इस तथाकथित माओवादी आंदोलन को छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने भी यही कहा कि वे अब सामान्य जीवन जीना चाहते हैं। सरकार की पुनर्वास योजनाओं की मदद से वे अपने पैरों पर खड़े होकर समाज के साथ जुड़ना चाहते हैं।
यह आत्मसमर्पण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस अपील के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चलाकर माओवादी नेटवर्क को कमजोर कर रही हैं। हाल के महीनों में कई माओवादी या तो मारे गए हैं या फिर उन्होंने हथियार डाल दिए हैं।
इसी बीच खबरें सामने आई हैं कि वरिष्ठ माओवादी नेता मुप्पला लक्ष्मण राव, जिसे गणपति के नाम से जाना जाता है, आत्मसमर्पण कर सकता है।
गणपति को भारत में माओवादी आतंकवाद का एक बड़ा चेहरा माना जाता है। वह लगभग चार दशक तक भूमिगत रहा और उसने माओवादी संगठन की रणनीति और विचारधारा को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यदि गणपति जैसा वरिष्ठ नेता भी आत्मसमर्पण करता है, तो यह माओवादी हिंसा के कमजोर पड़ने का बड़ा संकेत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा अभियानों, विकास योजनाओं और पुनर्वास नीति ने माओवादी नेटवर्क को लगातार कमजोर किया है।
अब बड़ी संख्या में माओवादी समझ रहे हैं कि हिंसा और बंदूक के रास्ते से समाज को केवल नुकसान होता है। इसलिए वे धीरे-धीरे इस भटके हुए रास्ते को छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र