पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे होते कच्चे तेल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने काफिले की गाड़ियां आधी करने का फैसला लिया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान सरकारों ने भी ईंधन बचत अभियान तेज कर दिया।
देश में बढ़ती ईंधन चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार ने अब सरकारी तंत्र से ही बचत अभियान की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सुरक्षा काफिले में वाहनों की संख्या 50 फीसदी तक घटाने का निर्देश देकर सादगी और संसाधन बचत का संदेश दिया है। इसके बाद भाजपा शासित राज्यों ने भी अपने स्तर पर फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी SPG को साफ निर्देश दिया कि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना काफिले में कम गाड़ियां शामिल की जाएं। साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। सरकार ने यह भी तय किया कि इस बदलाव के लिए नई गाड़ियों की खरीद नहीं होगी। अधिकारी मौजूदा संसाधनों के जरिए ही व्यवस्था संभालेंगे।
सरकार इस पहल को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं मान रही, बल्कि इसे आर्थिक अनुशासन और ऊर्जा बचत से जोड़कर देख रही है। केंद्र का मानना है कि जब शीर्ष नेतृत्व खुद सादगी अपनाएगा, तब आम लोग भी ईंधन बचाने के लिए प्रेरित होंगे।
प्रधानमंत्री के फैसले का असर सबसे पहले उत्तर प्रदेश में दिखाई दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने काफिले समेत मंत्रियों के काफिलों में भी गाड़ियों की संख्या आधी करने का
आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रियों और विधायकों को सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने को कहा है।
राज्य सरकार ने मेट्रो और बसों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 'नो व्हीकल डे' जैसे अभियान पर भी काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा कई सरकारी बैठकों को वर्चुअल मोड में आयोजित करने की तैयारी चल रही है ताकि यात्रा खर्च और ईंधन की खपत कम हो सके।
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी
तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी। साथ ही मंत्रियों को कम वाहन उपयोग करने और सार्वजनिक जीवन में सादगी अपनाने की सलाह दी। राज्य सरकार प्राकृतिक खेती और स्थानीय संसाधनों को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है।
दिल्ली सरकार ने भी सरकारी खर्च में कटौती के लिए नई व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंत्रियों के लिए सीमित वाहन उपयोग और कारपूलिंग को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उन्होंने दिल्लीवासियों से निजी गाड़ियों की जगह मेट्रो और बसों का उपयोग बढ़ाने की अपील की।
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाने के साथ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए
नई गाइडलाइन जारी की है। सरकार चाहती है कि सरकारी कार्यक्रमों और दौरों में अनावश्यक गाड़ियों का उपयोग रोका जाए।
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले हैदराबाद और गुजरात के कार्यक्रमों में भी ऊर्जा संकट को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। साथ ही उन्होंने विदेशी यात्राओं पर खर्च कम करने और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर जोर दिया था।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की भी सलाह दी थी ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। सरकार मानती है कि वैश्विक हालात के चलते आने वाले समय में तेल आयात महंगा हो सकता है।
दरअसल, ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से केंद्र सरकार अब वर्क फ्रॉम होम, सार्वजनिक परिवहन, प्राकृतिक खेती और ऊर्जा बचत जैसे उपायों को बढ़ावा दे रही है। सरकार चाहती है कि पहले सरकारी व्यवस्था उदाहरण पेश करे और फिर जनता इस अभियान से जुड़े।