मई 2026 में सोशल मीडिया पर अचानक उभरी "कॉकरोच जनता पार्टी" ने कुछ ही दिनों में देशभर में चर्चा बटोर ली। इसके संस्थापक अभिजीत डिपके ने इसे एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में शुरू किया, लेकिन देखते ही देखते यह अभियान राजनीतिक रंग लेने लगा। विपक्षी नेताओं, वामपंथी कार्यकर्ताओं, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कुछ फिल्मी हस्तियों ने इसे खुलकर समर्थन दिया। हालांकि इसके साथ ही अभिजीत डिपके के पुराने विवादित पोस्ट भी सामने आने लगे, जिन्होंने इस पूरे आंदोलन की मंशा और वैचारिक दिशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
कैसे शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी?
15 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान कुछ युवाओं और तथाकथित एक्टिविस्ट समूहों पर
टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग रोजगार नहीं मिलने के बाद मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर संस्थाओं पर हमला करते हैं। अपनी टिप्पणी में उन्होंने "कॉकरोच" और "समाज के परजीवी" जैसे शब्दों का भी प्रयोग किया।
मुख्य न्यायाधीश की इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा की। अगले ही दिन राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत डिपके ने X पर एक पोस्ट लिखकर
"कॉकरोच जनता पार्टी" की घोषणा कर दी। उन्होंने इसे बेरोजगार, ऑनलाइन सक्रिय और व्यवस्था से नाराज युवाओं का मंच बताया। पार्टी का नाम स्पष्ट रूप से भारतीय जनता पार्टी की पैरोडी के रूप में रखा गया।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैला अभियान
16 मई को लॉन्च होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर असाधारण गति से लोकप्रियता हासिल की। पार्टी का इंस्टाग्राम अकाउंट महज 78 घंटे में 30 लाख फॉलोअर्स तक पहुंच गया। पांच दिनों के भीतर यह संख्या एक करोड़ से अधिक हो गई। इस दौरान पार्टी ने खुद को "Voice of the Lazy & Unemployed" के रूप में प्रचारित किया।
हालांकि आलोचकों ने सवाल उठाया कि किसी नए व्यंग्यात्मक अभियान का इतनी तेज गति से वायरल होना केवल स्वतःस्फूर्त जनसमर्थन का परिणाम नहीं हो सकता। उन्होंने इसके पीछे संगठित डिजिटल नेटवर्क और राजनीतिक समर्थन की संभावना जताई।
विपक्षी नेताओं ने दिया खुला समर्थन
कॉकरोच जनता पार्टी को कई विपक्षी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया। कांग्रेस नेता शशि थरूर, उमंग सिंघार और दीपेंद्र हुड्डा ने इसे युवाओं की नाराजगी का प्रतीक बताया। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और उदयवीर सिंह ने भी अभियान के पक्ष में बयान दिए।
तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ'ब्रायन और कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर इस अभियान को बढ़ावा दिया। वहीं आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और हरपाल सिंह चीमा ने भी इसका समर्थन किया। इन नेताओं की सक्रियता ने इस आंदोलन को महज व्यंग्य तक सीमित नहीं रहने दिया और इसे स्पष्ट राजनीतिक स्वरूप प्रदान किया।
आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे अभिजीत डिपके
अभिजीत डिपके का राजनीतिक अतीत भी चर्चा का विषय बना। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में जन्मे डिपके ने पत्रकारिता की पढ़ाई की। वर्ष
2020 से 2023 के बीच उन्होंने आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में वालंटियर के रूप में काम किया।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने युवाओं को आकर्षित करने वाले मीम आधारित डिजिटल कंटेंट तैयार किए। बाद में उन्होंने दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में संचार सलाहकार के रूप में भी काम किया। सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और पोस्ट वायरल हुए, जिनमें वह आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ दिखाई दिए। इससे कॉकरोच जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच वैचारिक निकटता की चर्चाएं तेज हो गईं।
वामपंथी इन्फ्लुएंसर्स और एक्टिविस्टों का समर्थन
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद कई वामपंथी झुकाव वाले इन्फ्लुएंसर्स ने इस अभियान को बढ़ावा दिया। ध्रुव राठी ने एक वीडियो जारी कर युवाओं से इस आंदोलन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने इसे केंद्र सरकार के खिलाफ डिजिटल आंदोलन का रूप देने की बात कही।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अर्पित शर्मा और अन्य कई डिजिटल क्रिएटर्स ने भी अभियान के समर्थन में पोस्ट किए। इसके अलावा प्रशांत भूषण, अंजलि भारद्वाज और योगेंद्र यादव जैसे कार्यकर्ताओं ने भी इसे लोकतांत्रिक असहमति का प्रतीक बताया।
फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप, कॉमेडियन कुणाल कामरा, अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा, फातिमा सना शेख, दिया मिर्जा और ईशा गुप्ता समेत कई हस्तियों ने भी पार्टी के कंटेंट को साझा किया। सोनम वांगचुक ने तो खुद को "मानद कॉकरोच" तक घोषित कर दिया।
विवादों में घिरे अभिजीत डिपके
कॉकरोच जनता पार्टी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही अभिजीत डिपके के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट भी सामने आने लगे। इनमें कई पोस्ट विवादास्पद माने गए।
29 मार्च 2026 को उन्होंने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद के समर्थन में पोस्ट लिखते हुए पूछा था कि उन्हें बिना मुकदमे के पांच साल तक जेल में क्यों रखा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उमर खालिद के पुराने वीडियो साझा किए और डिपके की आलोचना की।
इसी तरह उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का भी
विरोध किया था। 2019 में उन्होंने लिखा था कि आज कश्मीर है, कल किसी और राज्य की बारी हो सकती है। उनके इस बयान को कई लोगों ने राष्ट्रीय एकीकरण के खिलाफ बताया।
CAA और NRC को लेकर भी रहे मुखर
वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए आंदोलनों के दौरान भी अभिजीत डिपके सक्रिय रहे। उन्होंने CAA का विरोध किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्टून साझा किए। आलोचकों का आरोप है कि उन्होंने उन समूहों का समर्थन किया जिन्होंने NRC को लेकर भ्रामक दावे फैलाए और देश में तनाव का माहौल बनाया।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी दिया मंच
BBC, CNN, NBC न्यूज, CBS न्यूज, अल जजीरा और द गार्जियन जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने कॉकरोच जनता पार्टी को भारत में युवाओं की नाराजगी और डिजिटल प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि आलोचकों ने कहा कि विदेशी मीडिया ने इस अभियान के राजनीतिक और वैचारिक पहलुओं को नजरअंदाज किया।
सवाल अभी भी बाकी हैं
कॉकरोच जनता पार्टी खुद को व्यंग्य और डिजिटल असहमति का मंच बताती है, लेकिन इसके संस्थापक के राजनीतिक संबंध, पुराने विवादित बयान, विपक्षी दलों का खुला समर्थन और वामपंथी नेटवर्क की सक्रियता कई प्रश्न खड़े करते हैं। यही कारण है कि आलोचक इसे केवल हास्य या व्यंग्य का मंच नहीं मानते। उनके अनुसार यह अभियान युवाओं की भावनाओं का उपयोग कर एक विशेष राजनीतिक और वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करता दिखाई देता है।
आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि कॉकरोच जनता पार्टी केवल सोशल मीडिया की क्षणिक सनसनी साबित होती है या फिर भारतीय राजनीति में किसी बड़े वैचारिक संघर्ष का नया चेहरा बनकर उभरती है।