चीन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सरकारी हंटर चलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक खौफनाक घटना ने यह साबित कर दिया है कि शी जिनपिंग की अगुवाई वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) अब बच्चों और किशोरों के दिमाग को भी पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेना चाहती है। चीनी सरकार ने देश के एक बेहद लोकप्रिय और करीब 8 लाख सदस्यों वाले ऑनलाइन जापानी एनीमे फैन समुदाय, फैन'एर कम्युनिटी (Fan'er Community) पर एक सोची-समझी और हिंसक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई ने चीन के भीतर मानवाधिकारों और विशेषकर नाबालिगों के अधिकारों के हनन की सारी हदें पार कर दी हैं।
एक व्हिसलब्लोअर और पीड़ित परिवारों द्वारा लगाए गए
गंभीर आरोपों से स्पष्ट है कि कैसे चीनी प्रशासन ने जापानी कार्टून (एनीमे), मीम्स और सामान्य चर्चाओं में शामिल रहने वाले मासूम बच्चों को डराने, धमकाने, जबरन झूठे कबूलनामे लिखवाने और यहां तक कि जेल की काल कोठरी में शारीरिक यातनाएं देने का एक भयावह चक्रव्यूह तैयार किया है।
कैसे एक एनिमे फोरम बना CCP के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा?
फैन'एर कम्युनिटी मुख्य रूप से चीन के उन युवाओं और बच्चों का ऑनलाइन अड्डा था, जो जापानी एनीमे संस्कृति को पसंद करते थे। यहाँ युवा आपस में एनीमे के वीडियो एडिट, मीम्स और कलाकृतियाँ साझा करते थे। कभी-कभी ये युवा अनौपचारिक रूप से देश की सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों पर भी अपनी राय रख देते थे। चीन जैसे बंद समाज में, जहाँ मुख्यधारा के सोशल मीडिया पर कड़ा पहरा है, यह फोरम युवाओं के लिए खुलकर सांस लेने और अभिव्यक्ति का एक जरिया बन गया था।
लेकिन युवाओं का यह खुलापन और स्वतंत्र विचार प्रक्रिया चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को हजम नहीं हुई। CCP को हमेशा से डर रहा है कि यदि युवा स्वतंत्र रूप से सोचना शुरू कर देंगे, तो उनका तानाशाही साम्राज्य ढह जाएगा। नतीजतन, चीनी अधिकारियों ने इस मासूम बच्चों के ग्रुप को विदेशी शक्तियों से प्रभावित विचारधारा का नेटवर्क और चीन विरोधी शत्रुतापूर्ण आपराधिक संगठन घोषित कर दिया।
इस क्रूर कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब दो एडमिनिस्ट्रेटर के बीच आपसी विवाद के बाद एक ने पुलिस में शिकायत कर दी कि ग्रुप पर राजनीतिक सामग्री साझा की जा रही है। इसके बाद, झेजियांग प्रांत की युहुआंग पुलिस ने इसे एक बहुत बड़ा आपराधिक नेटवर्क मानकर एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया और 2025 में बड़े पैमाने पर धरपकड़ शुरू कर दी।
मासूम बच्चों पर बर्बरता
इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने दर्जनों एडमिनिस्ट्रेटर्स को गिरफ्तार किया और 200 से अधिक यूजर्स को हिरासत में लिया, जिनमें से अधिकांश स्कूल जाने वाले नाबालिग बच्चे थे। पुलिस ने इन बच्चों पर झगड़ा मोल लेने और परेशानी भड़काने का बेहद अस्पष्ट और क्रूर आरोप लगाया, जिसका इस्तेमाल CCP हर उस व्यक्ति को कुचलने के लिए करती है जो उनकी हां में हां नहीं मिलाता।
व्हिसलब्लोअर द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, चीनी पुलिस ने इन किशोरों से जबरन कबूलनामा कराने के लिए ऐसी प्रणालियों और यातनाओं का इस्तेमाल किया जो खूंखार अपराधियों के लिए की जाती हैं:
नींद से वंचित करना और भूखा रखना: बच्चों को रात-रात भर सोने नहीं दिया गया। उन्हें लगातार खड़े रहने के लिए मजबूर किया गया और दिन के समय उनका मानसिक उत्पीड़न करते हुए पूछताछ की गई। कई दिनों तक उन्हें खाना और पानी भी ठीक से नहीं दिया गया।
शारीरिक हिंसा और रिस्ट्रेंट चेयर्स: पूछताछ के दौरान नाबालिगों को ऐसी कुर्सियों से बांधकर घंटों एक ही दर्दनाक स्थिति में रखा जाता था, जिससे उनके शरीर में असहनीय दर्द पैदा हो सके।
वयस्क अपराधियों के साथ जेल में बंद करना: नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, चीनी अधिकारियों ने इन मासूम किशोरों को जेल में खूंखार और हिंसक वयस्क अपराधियों के साथ एक ही कोठरी में डाल दिया, जिससे बच्चे गहरे मानसिक सदमे में चले गए।
इस बर्बरता का असर यह हुआ कि 'डोंग' उपनाम वाले एक युवा ने हिरासत में रहने के महज तीन महीनों के भीतर अपना 20 किलोग्राम से अधिक वजन खो दिया।
तबाह होते बचपन की कुछ दर्दनाक कहानियां
इस दमनकारी चक्र ने कई परिवारों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। सामने आए कुछ मामले दिल दहला देने वाले हैं:
17 वर्षीय अन (An): यह किशोर केवल एनीमे से जुड़े छोटे वीडियो एडिट बनाता था। वह पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा था। चीनी पुलिस ने उसके इस मानसिक लचीलेपन का फायदा उठाया और भारी दबाव डालकर उससे मनमाना कबूलनामा करवा लिया।
16 वर्षीय वू (Wu): मामले की "गोपनीयता" का हवाला देकर पुलिस ने इस बच्चे को दो महीने तक उसके माता-पिता से मिलने नहीं दिया। हिरासत के दौरान उसे बेरहमी से पीटा गया, जिसके कारण आज वह बेहद गंभीर मनोवैज्ञानिक आघात से गुजर रहा है।
13 वर्षीय मासूम बच्ची लेई (Lei): उसकी कम उम्र के कारण पुलिस ने उसे पूछताछ के बाद छोड़ तो दिया, लेकिन पुलिस द्वारा दी गई भयानक धमकियों ने उसके दिमाग पर ऐसा गहरा और डरावना असर छोड़ा कि उसने आत्महत्या की कोशिश की।
इतना ही नहीं, जो युवा चीन से बाहर रह रहे थे और जिन्होंने इस तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की, उनके चीन में रह रहे माता-पिता और रिश्तेदारों को चीनी पुलिस द्वारा सीधे तौर पर धमकाया और प्रताड़ित किया गया।
न्याय तंत्र का ढोंग
पीड़ित परिवारों का यह भी आरोप है कि सरकारी और कानूनी सहायता देने वाले वकीलों ने बच्चों को बचाने के बजाय पुलिस के साथ मिलकर काम किया। वकीलों ने परिवारों को डराया कि चूंकि मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, इसलिए निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद छोड़ दें और चुपचाप अपना अपराध स्वीकार कर लें, नहीं तो और लंबी सजा होगी। साक्ष्यों को फर्जी तरीके से गढ़ा गया ताकि एक बड़े आपराधिक जाल का नाटक रचा जा सके।
खुद को दुनिया की महाशक्ति बताने वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का एक एनीमे फैन ग्रुप से इस कदर डर जाना यह दिखाता है कि अंदर से यह व्यवस्था कितनी खोखली और असुरक्षित है। जो सरकार कार्टून देखने वाले और मीम्स बनाने वाले बच्चों को आतंकवादी और देशद्रोही घोषित कर दे, वह समाज कभी भी स्वस्थ नहीं हो सकता।