फैक्ट चेक रिपोर्ट: नेताओं से इन्फ्लुएंसर्स तक, किसने फैलाए झूठ और भ्रम के सबसे बड़े नैरेटिव?

जाति उत्पीड़न, सेना, बंगाल हिंसा और RSS से जुड़े कई चर्चित दावों की जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर सच से ज्यादा भ्रम फैलाया गया।

The Narrative World    03-Jun-2026   
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डिजिटल दौर में सोशल मीडिया सूचना का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। हालांकि, इसी मंच पर फर्जी खबरें, एडिटेड वीडियो, AI से तैयार तस्वीरें और भ्रामक दावे भी तेजी से फैलते हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं, मीडिया पोर्टलों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मई 2026 के दौरान कई ऐसे दावे किए, जिनकी बाद में फैक्ट चेकिंग हुई और वे झूठे या भ्रामक निकले। यह रिपोर्ट ऐसे ही मामलों की पड़ताल करती है और बताती है कि किस तरह लोगों को गुमराह करने की कोशिश हुई।
 
जाति उत्पीड़न के नाम पर पुराना वीडियो वायरल
 
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25 मई 2026 को समाजवादी पार्टी के नेता पुष्पेंद्र सरोज और कांग्रेस नेता रितु चौधरी ने एक वीडियो साझा किया। दोनों नेताओं ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति के अंतिम संस्कार को इसलिए रोका गया क्योंकि चिता का धुआं ब्राह्मणों के श्मशान घाट तक पहुंचता था।
 
पोस्ट में जातिगत भेदभाव, प्रशासनिक पक्षपात और सामाजिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। हालांकि, जांच में यह दावा पूरी तरह गलत निकला। वायरल वीडियो का संबंध मध्य प्रदेश से नहीं था। यह वीडियो वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के अमेठी की एक घटना का था। रिपोर्टों के अनुसार मृतक मक्कन सिंह ठाकुर समुदाय से थे। वीडियो में दिखाई दे रहा विरोध प्रदर्शन पुलिस की कार्रवाई में देरी को लेकर था। घटना का जातिगत भेदभाव से कोई संबंध नहीं मिला।
 
सेना पर आरोप लगाने वाला दावा भी निकला फर्जी
 
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22 मई 2026 को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो वायरल हुआ। राज्यसभा सांसद मनोज झा और संजय सिंह ने पूर्व सैनिकों के साथ मंच साझा किया। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि सरकार ने एक युद्ध नायक के परिवार को भूखमरी की स्थिति में पहुंचा दिया।
 
संजय सिंह ने चंदू चव्हाण का मामला उठाते हुए केंद्र सरकार और सेना की आलोचना की। लेकिन भारतीय सेना ने इस दावे का खंडन किया। सेना ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रहे चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी. नरेंद्र को अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन के कारण सेवा से बर्खास्त किया गया था।
 
सेना ने यह भी बताया कि चौथे व्यक्ति शंकर सिंह गुर्जर के खिलाफ सैन्य और दीवानी अदालतों में कार्रवाई चल रही है। सेना ने आरोप लगाया कि ये लोग अपनी गलतियों से ध्यान हटाने और सेना की छवि खराब करने के लिए भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं।
 
बंगाल चुनाव के बाद हिंसा बताकर पुराना वीडियो फैलाया गया
 
5 मई 2026 को तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद ने हिंसा का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा कार्यकर्ता हिंसा फैला रहे हैं।
 
पोस्ट में भाजपा और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए। लेकिन जांच में पता चला कि वीडियो चुनाव परिणामों से पहले का था और मार्च 2026 से इंटरनेट पर मौजूद था। किसी भी विश्वसनीय स्रोत ने वीडियो को चुनाव बाद की हिंसा से नहीं जोड़ा। इस प्रकार पुराने वीडियो को नया बताकर राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की गई।
 
भाजपा कार्यकर्ताओं पर तोड़फोड़ का आरोप भी झूठा निकला
 
उसी दिन समाजवादी पार्टी के आई.पी. सिंह और कांग्रेस नेता अतुल लोंढे पाटिल ने एक अन्य वीडियो साझा किया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के सत्ता में आते ही कार्यकर्ताओं ने बंगाल में तोड़फोड़ शुरू कर दी।
 
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फैक्ट चेक में पता चला कि वीडियो पुराने थे और हालिया चुनावी घटनाओं से उनका कोई संबंध नहीं था। किसी आधिकारिक रिपोर्ट या विश्वसनीय समाचार स्रोत ने दावों की पुष्टि नहीं की। वायरल पोस्ट ने केवल भ्रम और राजनीतिक तनाव पैदा करने का प्रयास किया।
 
प्रधानमंत्री मोदी का AI वीडियो बनाकर फैलाया गया
 
25 मई को एक X अकाउंट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो साझा किया। वीडियो में दावा किया गया कि मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर अजीबोगरीब बयान दिए।
 
जांच में पता चला कि वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की मदद से तैयार किया गया था। किसी भी विश्वसनीय समाचार रिपोर्ट या सरकारी बयान ने ऐसे कथनों की पुष्टि नहीं की। वीडियो पूरी तरह मनगढ़ंत निकला।
 
मोदी और कंगना की फर्जी तस्वीर वायरल
 
इसी दिन इंस्टाग्राम पर एक अकाउंट ने नरेंद्र मोदी और अभिनेत्री कंगना रनौत की कथित तस्वीर साझा की। तस्वीर में दोनों को गले मिलते हुए दिखाया गया।
 
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फैक्ट-चेकर्स ने पाया कि तस्वीर AI से तैयार की गई थी। तस्वीर में हाथों की बनावट, रोशनी और अन्य तकनीकी खामियां साफ दिखाई दे रही थीं। वास्तविक दुनिया में ऐसा कोई फोटो या घटना मौजूद नहीं थी।
 
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
 
10 मई 2026 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने दावा किया कि पंजाब से राजस्थान तक नहरों में मानव शव बहकर पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट में सुखचैन सिंह के शव को छह गेट पार कराए जाने और उसे "डिजास्टर गेस्ट" कहने का उल्लेख किया गया।
 
हालांकि, राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला प्रशासन ने इस दावे को तथ्यहीन बताया। प्रशासन की जांच में पता चला कि सुखचैन सिंह का शव श्रीकरणपुर क्षेत्र में मिला था और उसकी पहचान कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई। प्रशासन ने कहा कि रिपोर्ट में बताए गए कई दावे वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते।
 
तमिलनाडु में RSS पर प्रतिबंध का दावा भी फर्जी
 
21 मई 2026 को एक इंस्टाग्राम पेज ने दावा किया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया है।
 
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पोस्ट में विजय का कथित बयान भी जोड़ा गया। लेकिन किसी सरकारी आदेश, अधिसूचना या आधिकारिक घोषणा ने इस दावे की पुष्टि नहीं की। जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला।
 
मोहन भागवत और 52वें शक्तिपीठ की कहानी भी गढ़ी गई
 
9 मई 2026 को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की एक तस्वीर वायरल हुई। तस्वीर के साथ दावा किया गया कि उन्होंने नागपुर में 52वें शक्तिपीठ की आधारशिला रखी और सनातन धर्म का अपमान किया।
 
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फैक्ट चेक में सामने आया कि तस्वीर के साथ भ्रामक जानकारी जोड़ी गई थी। वास्तविकता में मोहन भागवत ने नागपुर में भारत दुर्गा मंदिर की आधारशिला रखी थी। कार्यक्रम में कई संत और धार्मिक नेता शामिल हुए थे। किसी भी आधिकारिक रिपोर्ट ने इस मंदिर को 52वां शक्तिपीठ नहीं बताया।
 
निष्कर्ष
 
इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित किया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी सच नहीं होती। कई राजनीतिक नेता, मीडिया संस्थान और इन्फ्लुएंसर्स अधूरी जानकारी, पुराने वीडियो, AI सामग्री और मनगढ़ंत दावों का सहारा लेकर लोगों की भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। इसलिए किसी भी सनसनीखेज दावे पर भरोसा करने से पहले उसके स्रोत और तथ्यों की जांच करना जरूरी है। फर्जी खबरों के इस दौर में जागरूक नागरिक ही सबसे मजबूत रक्षा कवच साबित हो सकता है।