देश के युवाओं और खास तौर पर जेन-जी (Gen Z) के हक की बात करने का दावा करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का असली चेहरा अब पूरी तरह सबके सामने आ चुका है। खुद को युवाओं का मसीहा बताने वाले इस संगठन के पीछे का सच बेहद डरावना है। यह संगठन युवाओं के भविष्य को संवारने के बजाय देश विरोधी नैरेटिव को लगातार बढ़ावा दे रहा है। CJP के मुख्य चेहरों और उनकी रणनीतियों का बारीक विश्लेषण करने पर साफ हो जाता है कि इनका मकसद सिर्फ अराजकता फैलाना और सुर्खियों में बने रहना है।
आम आदमी पार्टी और ध्रुव राठी से जुड़े हैं तार
CJP ने हाल ही में अपने तीन मुख्य प्रवक्ताओं के नामों की घोषणा की है। इन चेहरों को ध्यान से देखने पर एक खास राजनीतिक पैटर्न साफ नजर आता है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास खुले तौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) के बड़े समर्थक हैं। वे देशविरोधी गतिविधियों में शामिल रहे उमर खालिद का खुलकर समर्थन करते हैं। सौरव दास ने सोशल मीडिया पर उमर खालिद को 'सबसे बहादुर' बताते हुए देश की न्यायपालिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
दूसरे प्रवक्ता विजेता दहिया सीधे तौर पर मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी के लिए कंटेंट लिखने का काम करते हैं। वे भी अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के कट्टर समर्थक हैं। विजेता दहिया सोशल मीडिया पर खुलेआम यह स्वीकार करते हैं कि वे आम आदमी पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। तीसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका भी आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल से जुड़े हुए है। यह पूरा गठजोड़ दिखाता है कि युवाओं के नाम पर खड़ी हुई यह पार्टी असल में एक खास राजनीतिक एजेंडे के तहत काम कर रही है।
हिंदू देवी-देवताओं का अपमान और नफरत का खेल
CJP के प्रवक्ता भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व करने के नाम पर बहुसंख्यक हिंदू समाज को निशाना बना रहे हैं। प्रवक्ता विजेता दहिया लगातार हिंदुओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और हिंदू देवी-देवताओं का खुलकर अपमान कर रहे हैं। इस संगठन को देश के युवाओं की शिक्षा, रोजगार या विकास से कोई सरोकार नहीं है। विजेता दहिया जैसे लोग समाज में केवल धार्मिक नफरत और जहर घोलने का काम कर रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ जहर उगलने के बाद भी CJP इन लोगों को नफरत से ऊपर उठकर काम करने वाले नायक के रूप में पेश कर रही है। असलियत तो यह है कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने और समाज को बांटने के जुर्म में पुलिस को ऐसे लोगों को तुरंत सलाखों के पीछे डालना चाहिए। CJP इन चेहरों के जरिए देश की एकता और अखंडता पर सीधा प्रहार कर रही है।
एक इंटरव्यू ने खोली CJP की पूरी स्क्रिप्ट
एक हालिया इंटरव्यू ने CJP के प्रदर्शनों और आंदोलनों के पीछे की असली सच्चाई को पूरी तरह उजागर कर दिया है। इस इंटरव्यू ने साबित कर दिया कि CJP का मकसद शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना कभी था ही नहीं। संगठन की पूरी योजना केवल हंगामा खड़ा करने की थी।
CJP की इस साजिश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
कोई पूर्व अनुमति नहीं: CJP ने विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए प्रशासन से कोई अग्रिम लिखित अनुमति नहीं ली।
अंडरटेकिंग से दूरी: संगठन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में प्रशासन को कोई आश्वासन पत्र नहीं सौंपा।
मंजूरी प्रक्रिया का उल्लंघन: CJP के नेताओं ने किसी भी तरह की वैधानिक मंजूरी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी नहीं समझा।
इस पूरी प्लानिंग के पीछे की रणनीति बेहद चौंकाने वाली है। संगठन की असली योजना यह थी कि वे बिना किसी पूर्व अनुमति के सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचेंगे और ऐन वक्त पर प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। अगर CJP का वास्तविक उद्देश्य एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन होता, तो वे नियमानुसार बहुत पहले ही प्रशासन से अनुमति मांगते। लेकिन, जब संगठन का मुख्य उद्देश्य केवल मीडिया की सुर्खियां बटोरना और TV चैनलों पर जगह पाना हो, तो यह हथकंडा बिल्कुल सटीक बैठता है। CJP ने जानबूझकर कानून का उल्लंघन किया ताकि पुलिस कार्रवाई करे और वे खुद को पीड़ित दिखाकर पब्लिसिटी बटोर सकें।
Gen Z के लिए बड़ा जाल
CJP असल में देश के भोले-भले युवाओं और Gen Z को एक बड़े जाल में फंसा रही है। ये प्रवक्ता युवाओं के अधिकारों की आड़ में देश को बांटने, हिंदुओं को निशाना बनाने और राष्ट्रविरोधी तत्वों को संरक्षण देने का घिनौना खेल खेल रहे हैं। जब भी देश का युवा वर्ग ऐसे भ्रामक संगठनों का समर्थन करता है, तो वह अनजाने में देश की प्रगति की रफ्तार को धीमा कर देता है।
यह नफरती एजेंडा सीधे तौर पर भारत के युवाओं के रोजगार, आर्थिक विकास और सामाजिक एकता पर चोट करता है। देश के जागरूक नागरिकों और युवाओं को ऐसे नफरत फैलाने वाले तत्वों से तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए।