जंतर मंतर पर चल रहे CJP के तथाकथित छात्र आंदोलन ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। राजधानी में छात्रों के अधिकारों के नाम पर जो प्रदर्शन चल रहा है, उसके पीछे गहरी साजिश नजर आने लगी है।
इस प्रदर्शन में सैयद कासिम रसूल इलियास ने दस्तक दे दी है। यह नाम आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े पन्नों को खोलता है। इलियास के धरनास्थल पर पहुँचते ही बात साफ हो गई है कि CJP का मंच छात्रों के लिए नहीं, बल्कि 'एंटी-इंडिया गैंग' के लिए नया सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।
SIMI का पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष है इलियास
सैयद कासिम रसूल इलियास सिर्फ एक प्रदर्शनकारी नहीं है। वह प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का संस्थापक सदस्य रह चुका है। उसने SIMI के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी संभाला है। हर नागरिक यह बात जानता है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने SIMI को आतंकवादी समूह घोषित किया था। SIMI ने मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली में हुए भयानक बम धमाकों की जिम्मेदारी ली थी और मासूमों की जान ली थी।
साल 2001 में केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत SIMI पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। SIMI पर बैन लगने के बाद इलियास रुका नहीं। उसने तुरंत अपना ठिकाना बदला और जमात-ए-इस्लामी हिंद में शामिल हो गया। वहां भी उसने कई अहम पदों पर कब्ज़ा जमा लिया। अब वही व्यक्ति CJP के आंदोलन में युवाओं को भड़काने पहुंच गया है।
CAA और धारा 370 के खिलाफ भी उगला था जहर
इलियास का विवादों और देश का माहौल बिगाड़ने का इतिहास बहुत पुराना है। जब मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाई थी, तब भी इलियास ने खुलेआम केंद्र सरकार के फैसले का विरोध किया था। उसने देश के इस ऐतिहासिक कदम के विरोध में जमकर जहर उगला था।
इसके बाद, दिसंबर 2019 से मार्च 2020 के बीच देश की राजधानी दिल्ली और अन्य शहरों में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों में भी इलियास सबसे आगे खड़ा था। उसने वहां लोगों की भावनाओं को भड़काने का काम किया था। अब यही इंसान जंतर मंतर पर आंदोलन का फायदा उठाकर देश में अस्थिरता पैदा करने की फिराक में है।
बेटा उमर खालिद दिल्ली दंगों के आरोप में काट रहा है जेल
सैयद कासिम रसूल इलियास का बेटा उमर खालिद भी अपने पिता के नक्शेकदम पर ही चल रहा है। उमर खालिद साल 2020 में हुए खौफनाक दिल्ली दंगों के आरोप में पिछले कई सालों से जेल की सलाखों के पीछे है। उमर खालिद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन का प्रमुख नेता था।
जांच एजेंसियों ने डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन को CPI (माओवादी) का फ्रंटल संगठन बताया था। अपनी गिरफ्तारी से पहले उमर खालिद ने JNU परिसर में संसद हमले के दोषी और जैश के आतंकी अफजल गुरु के समर्थन में एक कार्यक्रम आयोजित किया था। उस कार्यक्रम में उसने आतंकी अफजल गुरु के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई थी और देश तोड़ने वाले नारे लगाए थे।
राष्ट्रविरोधियों का नया छाता बन रही है CJP
अब यह पूरी साजिश एक शीशे की तरह साफ हो चुकी है। CJP के बैनर तले चल रहा यह पूरा प्रदर्शन छात्रों के हक की लड़ाई बिल्कुल नहीं है। इस आंदोलन की आड़ में एक बहुत ही भयानक और खतरनाक योजना काम कर रही है। धीरे-धीरे देश का हर वह व्यक्ति जो राष्ट्रविरोधी सोच रखता है, वह CJP के इस छाते के नीचे जमा हो रहा है। यह भारत को कमजोर करने वाली ताकतों का एक नया अड्डा बन गया है।