
सोशल मीडिया पर हमारे सामने हमेशा एक नैरेटिव दिखाई देता है, जिसमें कहा जाता है कि चीन तकनीकी रूप से "एक सदी आगे" है। कभी वहाँ के शहरों को दिखाया जाता है, तो कभी ट्रेन को, कभी वहाँ की गाड़ियों को दिखाया जाता है, तो कभी बविशाल बाँधों को। इन्हें दिखाकर ही यह कहा जाता है कि देखिए चीन ने कितनी तरक़्क़ी कर ली है। और इसका श्रेय चीनी वामपंथी सरकार को दिया जाता है।
लेकिन पिछले एक वर्ष में दुनिया के दो अलग-अलग महाद्वीपों पर आए भूकंपों ने चीन की इस सच्चाई की पोल खोल के रख दी है। एक ओर तो थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में म्यांमार के भूकंप के झटकों ने चीनी कम्पनी द्वारा निर्मित एक 30 मंजिला इमारत को चपटा कर दिया। वहीं दूसरी ओर वेनेजुएला के तटवर्ती इलाकों में आए भूकंपों ने चीनी कंपनियों द्वारा बनाए गए पूरे आवास परिसरों को मलबे के ढेर में बदल दिया।

ये हादसे महज प्राकृतिक आपदाएं नहीं हैं। ये उस बड़े प्रोपेगेंडा को बेनकाब करते हैं जिसमें बीजिंग दुनिया को यह दिखाने की कोशिश करता है कि उसकी तकनीक विश्व से सौ साल आगे है और कम्युनिस्ट मॉडल विकास का सबसे बेहतर रास्ता है।
बीते वर्ष 28 मार्च 2025 को म्यांमार में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसकी कंपनें 1000 किलोमीटर दूर बैंकॉक तक पहुंचीं। इसके कारण वहां मौजूद राज्य लेखा परीक्षा कार्यालय की अधूरी ऊंची इमारत ढह गई। ग़ौर करने वाली बात यह थी कि आसपास की कोई भी इमारत नहीं गिरी। सिर्फ वही इमारत गिरी जिसे चीनी कम्पनी बना रही थी। करीब 95 मजदूर इस हादसे में जान गंवा बैठे।

मीडिया रिपोर्ट में साफ सामने आया कि इस परियोजना में घटिया स्टील, खराब डिजाइन और लागत बचाने के लिए हड़बड़ी में काम किया जा रहा था। थाईलैंड के बड़े नेताओं ने खुलकर कहा कि आसपास की सभी इमारतें खड़ी रहीं, लेकिन सिर्फ यही क्यों गिरी।
वहीं कुछ महीने बाद, बीते 24 जून 2026 को वेनेजुएला में दो शक्तिशाली भूकंप आए। इसमें Urbano Hugo Chavez Frías और Ciudad Hugo Chavez जैसे बड़े आवासीय कॉम्प्लेक्स तबाह हो गए। मीडिया रिपोर्ट में इंजीनियरों ने बताया कि कई इमारतें "पैनकेक" की तरह एक के ऊपर एक ढह गईं। मौतों की संख्या हजारों में पहुंच गई।

चीनी कंपनियां CITIC Construction और China CAMC Engineering ने यहां बड़े पैमाने पर यूनिट बनाए थे। वेनेजुएला के वरिष्ठ इंजीनियरों ने मीडिया को बताया कि नरम मिट्टी, तेजी से बिना निगरानी के निर्माण और घटिया सामग्री ने आपदा को और भयानक बना दिया।
चीनी कम्पनियों द्वारा निर्माण किए जा रहे भवनों में कई जगहों पर कंक्रीट की जगह सस्ते फोम जैसे पदार्थ इस्तेमाल हुए थे। स्थानीय पत्रकारों और लोगों ने बताया कि इस भूकम्प में चीनी परियोजनाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं, जबकि कुछ पुरानी इमारतें खड़ी रहीं।
ये दो हादसे अलग-अलग देशों में हुए, लेकिन कहानी दोनों की एक है। चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत दुनिया भर में फैली परियोजनाएं बार-बार घटिया गुणवत्ता, भ्रष्टाचार और हड़बड़ी के आरोपों में घिरी रहती हैं। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों ने इस चीनी निर्माण के लिए "tofu-dreg प्रोजेक्ट्स" शब्द का इस्तेमाल किया है। यह शब्द 1998 में चीन के पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंग्जी ने यांग्जी नदी के खराब बांधों के लिए गढ़ा था। आज यह शब्द वैश्विक स्तर पर चीनी निर्माण की निशानी बन गया है।

वेनेजुएला में चीनी ठेकेदारों ने राजनीतिक संबंधों का फायदा उठाकर बड़े ठेके हासिल किए। लेकिन चीनी सैन्य हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार ने गुणवत्ता को तहस-नहस कर दिया। वहीं अफ्रीका के कई देशों में भी चीनी सड़कें और पुल जल्दी टूटते पाए गए हैं। पाकिस्तान के CPEC प्रोजेक्ट्स पर गंभीर सवाल उठे हैं।
चीन घरेलू स्तर पर भी tofu-dreg निर्माण करता रहा है। 2008 सिचुआन भूकंप में स्कूल भवन ढहने से हजारों बच्चे मारे गए। कुछ स्वतंत्र आवाजों ने इस पर उंगली उठाई, लेकिन कम्युनिस्ट सेंसरशिप ने बहस को दबा दिया था।