चीन में बाइबल से पहले पढ़ना होगा शी जिनपिंग का भाषण, CCP का नया फरमान

चीन में सरकारी मान्यता प्राप्त कैथोलिक चर्चों को अब CCP की विचारधारा, शी जिनपिंग के भाषण और धर्म के चीनीकरण की नीति के अनुरूप चलने का आदेश दिया गया।

The Narrative World    12-Jul-2026
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चीन में सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने कैथोलिक चर्चों को शी जिनपिंग के भाषण पढ़ाने, राजनीतिक शिक्षा लागू करने और पार्टी नियंत्रण स्वीकार करने का नया आदेश देकर धार्मिक स्वतंत्रता पर शिकंजा और कस दिया है।
 
चीन की सत्तारूढ़ CCP लगातार देश के सरकारी मान्यता प्राप्त कैथोलिक चर्चों को अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप ढालने में जुटी है। ताजा निर्देशों के तहत पादरियों, चर्च प्रबंधकों और प्रमुख श्रद्धालुओं को वैचारिक अध्ययन सत्रों में भाग लेना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही "धर्म के चीनीकरण" यानी सिनिसाइजेशन की नीति को पूरी तरह लागू करने और चर्च प्रशासन में पार्टी की निगरानी स्वीकार करने का निर्देश दिया गया है।
 
गुआंगडोंग और जियांग्सू प्रांतों के आधिकारिक कैथोलिक संगठनों ने हाल ही में कई घोषणाएं जारी कीं। इन घोषणाओं में चर्चों को राजनीतिक शिक्षा कार्यक्रम आयोजित करने, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भाषणों का अध्ययन कराने और चर्च संचालन में CCP की नीतियों को लागू करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया।
 
चीन केवल एक आधिकारिक कैथोलिक चर्च को मान्यता देता है। चीनी कैथोलिक पैट्रियॉटिक एसोसिएशन और बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ द कैथोलिक चर्च इन चाइना इसका संचालन करते हैं। दोनों संस्थाएं वेटिकन के बजाय सीधे CCP की निगरानी में काम करती हैं। दूसरी ओर, जो भूमिगत कैथोलिक समुदाय वेटिकन के प्रति निष्ठावान हैं, उन पर वर्षों से सरकारी दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
 
चर्चों में बढ़े राजनीतिक अध्ययन सत्र
 
8 जुलाई को गुआंगडोंग कैथोलिक चर्च ने घोषणा जारी कर बताया कि ग्वांगझोउ में हुई बैठक में सभी कैथोलिक संगठनों, पैरिशों, पादरियों और प्रमुख श्रद्धालुओं को राजनीतिक अध्ययन सत्रों में भाग लेने का निर्देश दिया गया। बैठक में राजनीतिक मार्गदर्शन मजबूत करने, चर्चों के आंतरिक प्रबंधन को सख्त बनाने और CCP की धार्मिक नीतियों के अनुरूप दीर्घकालिक प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
 
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इसी तरह 2 जुलाई को जियांग्सू प्रांत की राजधानी नानजिंग में भी बैठक हुई। आधिकारिक चाइना कैथोलिक वेबसाइट के अनुसार, इसमें प्रतिभागियों ने CCP की 105वीं वर्षगांठ पर शी जिनपिंग के भाषण, नए जातीय एकता कानून, राष्ट्रीय धार्मिक संगठनों की बैठक में जारी निर्देशों और आधिकारिक कैथोलिक नेतृत्व के कई नीति दस्तावेजों का अध्ययन किया।
 
चर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि इन निर्देशों का असली उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता खत्म कर उन्हें पूरी तरह पार्टी के प्रति वफादार बनाना है। अब अधिकांश चर्च धार्मिक गतिविधियों के साथ राजनीतिक शिक्षा सत्र भी नियमित रूप से आयोजित कर रहे हैं।
 
धार्मिक गतिविधियों पर नजर और बढ़ा नियंत्रण
 
श्रद्धालुओं के अनुसार, पिछले दस वर्षों में सरकार ने चर्चों पर निगरानी काफी बढ़ा दी है। वर्ष 2015 में शी जिनपिंग ने यूनाइटेड फ्रंट वर्क कॉन्फ्रेंस के दौरान "धर्म के चीनीकरण" की नीति पेश की थी। इसके बाद सरकार ने इस नीति को आधिकारिक धार्मिक सिद्धांतों में शामिल कर पूरे देश में लागू करना शुरू कर दिया।
अब कई चर्चों के बाहर और अंदर बड़ी संख्या में निगरानी कैमरे लगाए गए हैं। सरकार इन्हें सुरक्षा व्यवस्था बताती है, लेकिन चर्च के सदस्य मानते हैं कि इनका असली उद्देश्य धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं पर लगातार नजर रखना है।
 
सरकारी नियंत्रण केवल कैमरों तक सीमित नहीं है। चर्चों को विदेशी धार्मिक संस्थाओं से संपर्क रखने की अनुमति नहीं मिलती। खास तौर पर ताइवान और दक्षिण कोरिया के कैथोलिक समुदायों से बातचीत पर सख्त रोक लगाई गई है। पादरियों से पासपोर्ट जमा कराने की भी बात सामने आई है। उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति बहुत कम मिलती है और नए पासपोर्ट के आवेदन भी सामान्य तौर पर स्वीकार नहीं किए जाते।
 
कुछ श्रद्धालुओं का दावा है कि यदि किसी विदेशी कैथोलिक का फोन किसी चीनी चर्च सदस्य के पास आता है तो थोड़ी ही देर में पुलिस पहुंचकर कॉल करने वाले की पहचान, फोन नंबर और बातचीत की पूरी जानकारी पूछती है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार धार्मिक समुदायों की निजी बातचीत तक पर नजर रख रही है।
 
चर्चों का स्वरूप तेजी से बदल रहा
 
जियांग्सू प्रांत में पैरिश समुदाय अब धार्मिक प्रशासन से जुड़े कानूनी और राजनीतिक दस्तावेजों का भी अध्ययन कर रहे हैं। चर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि शी जिनपिंग के भाषणों को लागू करना अब चर्चों का प्रमुख राजनीतिक दायित्व बन गया है।
 
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उनके अनुसार, पहले चर्चों का केंद्र प्रार्थना सभा, स्वीकारोक्ति और धार्मिक अनुष्ठान होते थे। अब चर्चों को सरकारी नीतियों के साथ कदम मिलाकर चलना पड़ रहा है। कई श्रद्धालु महसूस करते हैं कि चर्च धीरे-धीरे केवल आस्था का स्थान नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक संदेश फैलाने का माध्यम बनता जा रहा है। हालांकि, सरकारी दबाव के कारण बहुत कम लोग सार्वजनिक रूप से विरोध करने का साहस जुटा पाते हैं।
 
इसी दौरान चर्चों, मस्जिदों और बौद्ध मठों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने और चीनी राष्ट्रगान गाने जैसी गतिविधियां भी तेजी से बढ़ी हैं। कई मस्जिदों में पारंपरिक गुंबद हटाने जैसे वास्तु परिवर्तन भी कराए गए हैं।
 
भूमिगत चर्चों पर भी बढ़ सकता है दबाव
 
चर्च से जुड़े लोगों का मानना है कि आधिकारिक चर्चों में चल रहे राजनीतिक अभियान भविष्य में भूमिगत चर्चों पर और सख्त कार्रवाई की तैयारी हैं। सरकार पहले सरकारी मान्यता प्राप्त चर्चों को पूरी तरह नियंत्रित करती है, फिर उन्हीं नियमों को भूमिगत चर्चों पर लागू करने का दबाव बनाती है।
 
जो चर्च सरकारी पंजीकरण स्वीकार करते हैं, उन्हें चीनी कैथोलिक पैट्रियॉटिक एसोसिएशन के अधीन काम करना पड़ता है। जो ऐसा नहीं करते, सरकार उन्हें अवैध घोषित कर देती है।
 
 
हेनान प्रांत के शुचांग शहर में 30 नवंबर 2025 को एक चर्च ने बच्चों को पियानो बजाने और प्रार्थना सभा में भाग लेने की अनुमति दी। धार्मिक स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले संगठन चाइनाएड के अनुसार, दो दिन बाद स्थानीय कैथोलिक मामलों की समिति और कैथोलिक पैट्रियॉटिक एसोसिएशन ने चर्च की सेवाएं तत्काल रोकने का आदेश दिया और सुधार योजना पेश करने को कहा। अधिकारियों ने चर्च के प्रवेश द्वार पर अस्थायी बंदी का सरकारी नोटिस भी लगा दिया।
 
वेटिकन समझौते पर भी उठ रहे सवाल
 
वर्ष 2018 में वेटिकन और चीन ने बिशपों की नियुक्ति को लेकर एक अस्थायी समझौता किया था। इस समझौते का पूरा विवरण आज तक सार्वजनिक नहीं हुआ। अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों ने इसे अगले चार वर्षों के लिए बढ़ाने पर सहमति जताई।
 
 
हालांकि, कई श्रद्धालु मानते हैं कि इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ CCP को मिला। उनका आरोप है कि पार्टी ने इसका इस्तेमाल भूमिगत चर्चों को और कमजोर करने तथा सरकारी नियंत्रण वाले चर्च को ही चीन का एकमात्र वैध कैथोलिक संस्थान साबित करने के लिए किया। इसी बीच आधिकारिक चर्च लगातार नए पार्टी निर्देश लागू कर रहे हैं। इनमें शी जिनपिंग के भाषणों का अध्ययन, राजनीतिक शिक्षा को अनिवार्य बनाना और धर्म के चीनीकरण की नीति को चर्च प्रशासन का स्थायी हिस्सा बनाना शामिल है। इससे साफ संकेत मिलता है कि चीन में धार्मिक आस्था पर पार्टी की विचारधारा को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है।