कांग्रेस विधायक ने माओवादी आतंकी माडवी हिडमा को बताया अपना रोल मॉडल

क्या कांग्रेस विधायक का माओवादी आतंकी माडवी हिडमा को अपना रोल मॉडल बताना नक्सली हिंसा का खुला महिमामंडन नहीं है?

The Narrative World    13-Jul-2026   
Total Views |
Representative Image 
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने आतंकी माओवादी संगठन के प्रमुख कमांडर माडवी हिडमा को अपना "रोल मॉडल" बताया है। श्रीवास्तव ने यह बयान INH 24×7 के जिला संवाद कार्यक्रम में भरे मंच से दिया। उन्होंने कहा, "हिडमा जल, जंगल और ज़मीन की लड़ाई लड़ता था। वह मेरे रोल मॉडल थे और आगे भी रहेंगे। मैं हिडमा के साथ हूं।"
 
 
सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हुए दर्जनों घातक हमलों के लिए जिम्मेदार एक कुख्यात आतंकी का इस प्रकार महिमामंडन करना बेहद शर्मनाक है। साथ ही, यह इस बात की ओर भी संकेत करता है कि देश और प्रदेश में नक्सलवाद का फैलना कांग्रेस की मर्जी के बिना संभव नहीं था।
 
कौन था लाल आतंकी हिडमा?
 
माडवी हिडमा (1981-2025) छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के सुकमा जिले का रहने वाला था। वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की एक बटालियन का नेतृत्व करता था। उसे माओवादी संगठन का सबसे युवा केंद्रीय समिति सदस्य माना जाता था। हिडमा पर लंबे समय तक 45 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित रहा। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की मोस्ट वॉन्टेड सूची में भी उसका नाम शामिल था।
 
Representative Image
 
18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मरेडुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में हिडमा, उसकी पत्नी मदकम राजे उर्फ राजक्का और चार अन्य माओवादियों को मार गिराया गया। सुरक्षा बलों ने यह अभियान खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया था।
 
हिडमा ने सुरक्षा बलों को कितना नुकसान पहुँचाया?
 
हिडमा को कम से कम 26 बड़े हमलों का मुख्य योजनाकार और संचालक माना जाता है। इन हमलों में सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की जान गई।
 
प्रमुख हमलों में शामिल हैं:
 
अप्रैल 2010, ताड़मेतला (दंतेवाड़ा) हमला: इस हमले में CRPF के 76 जवानों की हत्या कर दी गई। यह भारत के इतिहास में नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों पर किया गया सबसे बड़ा हमला माना जाता है। हिडमा इस घातक हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था।
 
Representative Image
 
2013, झीरम घाटी (दरभा) हमला: कांग्रेस के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया। इस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व विधायक और अन्य लोगों सहित कुल 29 लोगों की हत्या कर दी गई।
 
अन्य हमले: 2017 के सुकमा हमले सहित कई अन्य अभियानों में भी सुरक्षा बलों के जवानों को निशाना बनाया गया। कुल मिलाकर हिडमा से जुड़े हमलों में 260 से अधिक सुरक्षाकर्मियों और 76 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत हुई।
 
 
हिडमा केवल हमलों की योजना ही नहीं बनाता था, बल्कि बस्तर के जंगलों में माओवादी गुटों को संगठित करके सुरक्षा बलों के खिलाफ लगातार संघर्ष भी चलाता था। उसके नेतृत्व में माओवादियों ने सरकारी विकास कार्यों को रोकने, सड़क निर्माण में बाधा डालने और सरकारी मशीनरी को लगातार निशाना बनाया।
 
आम लोगों और सरकार को कितना नुकसान?
 
हिडमा और उसके गुट ने बस्तर में तथाकथित "जन अदालतें" लगाकर उन निर्दोष जनजातियों की हत्या की, जो माओवादी विचारधारा का विरोध करते थे या सरकारी योजनाओं का लाभ लेते थे। जबरन वसूली, अपहरण, हत्या और भय का माहौल बनाकर उसने पूरे क्षेत्र को आतंक के साए में रखा।
 
 
सरकार को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। विकास परियोजनाएं ठप रहीं, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हुए तथा करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचा। हिडमा जैसे आतंकी ने "जल, जंगल और ज़मीन" के नाम पर जनजातियों को गुमराह किया, जबकि वास्तव में वे वामपंथ की हिंसक विचारधारा को फैलाने और भारत को कमजोर करने का काम कर रहे थे।
 
हिडमा एक कट्टर माओवादी आतंकवादी था, जिसने सशस्त्र संघर्ष के जरिए भारतीय संविधान और लोकतंत्र को चुनौती दी। उसके नाम पर सुरक्षा बलों के जवानों, आम नागरिकों और राजनीतिक नेताओं की हत्याओं सहित अनेक गंभीर आतंकी वारदातें दर्ज हैं।
 
लेख
 
Representative Image
 
केवली कबीर जैन
पत्रकारिता छात्र, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय