देश के विभिन्न राज्यों से धार्मिक पहचान छिपाने, प्रेम संबंधों के नाम पर शोषण, ब्लैकमेल और कन्वर्जन से जुड़े मामले सामने आए। इन मामलों में धार्मिक पहचान छिपाकर संबंध बनाना, विवाह का झांसा देना, यौन शोषण करना, ब्लैकमेल करना और कन्वर्जन के लिए दबाव बनाना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और बिहार सहित कई राज्यों में पुलिस ने शिकायतों के आधार पर FIR दर्ज की, आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा संबंधित राज्यों के कन्वर्जन विरोधी कानूनों और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की।
इंदौर का मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा
सबसे चर्चित घटना मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आई, जहां पुलिस ने फरहान शाह को गिरफ्तार किया। पुलिस के
अनुसार, वह "गोलू सोलंकी" नाम से अपनी पहचान बताकर स्वयं को बजरंग दल का पदाधिकारी प्रस्तुत करता था। शिकायत के अनुसार, उसने सोशल मीडिया के माध्यम से एक हिंदू युवती से संपर्क स्थापित किया। बाद में उसने अश्लील हरकतें कीं और पहचान उजागर होने पर कन्वर्जन का दबाव बनाया। पुलिस ने उसके कब्जे से फर्जी पहचान पत्र बरामद कर मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों से भी सामने आए मामले
इसी अवधि में उत्तर प्रदेश के हापुड़, मुरादाबाद, सहारनपुर, हरदोई, मुजफ्फरनगर और इटावा से भी कई मामले सामने आए। कहीं धार्मिक पहचान छिपाकर संबंध बनाने और अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने के आरोप लगे, तो कहीं जबरन कन्वर्जन, दुष्कर्म, नाबालिगों को बहला-फुसलाकर ले जाने अथवा निकाह के लिए दबाव बनाने की शिकायतें दर्ज हुईं। पुलिस ने अधिकांश मामलों में जांच शुरू कर दी है, जबकि कुछ मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
उत्तराखंड, राजस्थान और बिहार से भी दर्ज हुए गंभीर मामले
उत्तराखंड के टिहरी जिले में एक नाबालिग छात्रा के यौन शोषण के मामले में आरोपी मोहम्मद जसीम अंसारी को गिरफ्तार किया गया। वहीं, राजस्थान के श्रीगंगानगर में इंस्टाग्राम पर फर्जी पहचान बनाकर एक युवती को विवाह का झांसा देने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया। बिहार के मुजफ्फरपुर में भी एक युवती ने आरोपी पर स्वयं को सेना का जवान बताकर धोखाधड़ी, आर्थिक शोषण और धमकी देने के आरोप लगाए।
इन घटनाओं में एक समान तत्व यह दिखाई देता है कि अधिकांश शिकायतों में सोशल मीडिया, फर्जी पहचान, विवाह का झूठा आश्वासन, निजी तस्वीरों अथवा वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल और उसके बाद कन्वर्जन के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं।
कन्वर्जन के अलग मामले भी चर्चा में
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में संचालित एक मदरसे के मौलाना और उनके पुत्र के विरुद्ध उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत FIR दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि हिंदू समाज के लोगों को बहला-फुसलाकर और दबाव के माध्यम से कन्वर्जन कराया गया। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की हैं।
कन्वर्जन से जुड़े मामलों की चर्चा केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं रही। हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में ईसाई मिशनरियों और चर्च से जुड़े व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध भी प्रलोभन, आर्थिक सहायता, चमत्कारों के दावों अथवा अन्य माध्यमों से अवैध कन्वर्जन कराने के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज होती रही हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में ऐसे मामलों में समय-समय पर पुलिस कार्रवाई भी हुई है।
बढ़ती चुनौती और कानून की भूमिका
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य कई राज्यों ने धार्मिक स्वतंत्रता अथवा धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखे अथवा विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले कन्वर्जन को रोकना है।
हिंदू महिलाओं की सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते अपराध, पहचान छिपाकर संबंध बनाने और उसके बाद कन्वर्जन के जाल में फंसाने के आरोपों को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। कट्टरपंथी इस्लामी और ईसाई ताकतें भारत की नींव कमजोर कर रही हैं, और कन्वर्जन इनका पहला हथियार है।