चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) द्वारा फालुन गोंग के खिलाफ छेड़ा गया क्रूर अभियान मानव सभ्यता के इतिहास का एक काला अध्याय है। यह केवल एक आध्यात्मिक समुदाय के दमन की कहानी नहीं है, बल्कि कम्युनिस्ट तानाशाही के उस क्रूर और अमानवीय चेहरे को भी उजागर करता है, जो किसी भी स्वतंत्र विचार, आस्था या नैतिकता को बर्दाश्त नहीं करता। शांतिप्रिय साधकों पर ढाए गए अत्याचार सीसीपी की मार्क्सवादी विचारधारा की नंगी सच्चाई को सामने लाते हैं, जहाँ पार्टी की तानाशाही के अलावा किसी भी चीज़ को पवित्र नहीं माना जाता।
जुलाई 1999 में जियांग जेमिन के आदेश पर शुरू हुए इस अभियान के तहत फालुन गोंग अभ्यासियों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार कर "Re-Education Through Labour" शिविरों, जेलों, जबरन श्रम शिविरों और मानसिक अस्पतालों में ठूंस दिया गया। CCP का एकमात्र लक्ष्य था "परिवर्तन" के नाम पर इन साधकों को अपनी आस्था से मुकरने के लिए मजबूर करना। जो लोग इनकार करते, उन्हें अकल्पनीय यातनाएँ दी जाती थीं।
यातनाओं का भयावह स्वरूप
मानवाधिकार संगठनों और बचे हुए साक्षियों के अनुसार, यातनाओं में बिजली के झटके देना, सोने नहीं देना, जबरन दवाइयाँ खिलाना, यौन शोषण करना, लंबे समय तक तनावपूर्ण मुद्राओं में बाँधकर रखना, पानी में डुबोना, एकांत कारावास में रखना और मानसिक उत्पीड़न करना शामिल था। अनेक साधकों की कैद के दौरान यातनाओं के कारण मृत्यु हो गई। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस दौरान 5,000 से अधिक मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है, क्योंकि सीसीपी ने सूचनाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है।
परिवारों को भी निशाना बनाया गया। साधकों के रिश्तेदारों पर दबाव डाला जाता था कि वे उन्हें त्याग दें। उनकी नौकरियाँ छीन ली जाती थीं, बच्चों को स्कूलों से निकाल दिया जाता था और घरों की तलाशी ली जाती थी। चेहरे की पहचान वाली निगरानी प्रणाली, पड़ोस समितियों और डिजिटल निगरानी ने पूरे चीन को फालुन गोंग साधकों के लिए एक खुली जेल में बदल दिया। यहाँ तक कि विदेशों में बसे साधकों पर भी सीसीपी किसी न किसी रूप में दमन करने का प्रयास करती थी।
कम्युनिस्ट क्रूरता की असली तस्वीर
फालुन गोंग का दमन कोई अलग-थलग घटना नहीं है। शिनजियांग के उइगुर मुसलमानों, ईसाई समुदायों, तिब्बतियों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ भी इसी प्रकार की नीति अपनाई जाती रही है। इसमें सामूहिक नजरबंदी शिविर, सांस्कृतिक पहचान को मिटाना और जबरन "पुनर्शिक्षण" जैसे कदम शामिल रहे हैं। शी जिनपिंग के शासन में यह दमन और अधिक बढ़ गया है। 610 ऑफिस जैसी अतिरिक्त-कानूनी संस्था नाजी गेस्टापो और स्टालिन की गुप्त पुलिस की याद दिलाती है।
ध्यान से समझें तो कम्युनिज्म की विचारधारा ही इस पूरे दमन की जड़ है। यह भगवान, परंपरा, परिवार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को अपना दुश्मन मानती है। माओ के "महान लीप फॉरवर्ड" ने करोड़ों लोगों को भूख से मरने पर मजबूर किया, सांस्कृतिक क्रांति ने मंदिरों और परंपराओं को नष्ट किया तथा तियानआनमेन स्क्वायर में लोकतंत्र की मांग करने वाले युवाओं का खून बहाया। फालुन गोंग का दमन इसी निरंतर चलने वाली श्रृंखला का एक हिस्सा है। CCP के लिए चीनी जनता केवल उत्पादन करने वाली मशीन है, जिसमें आत्मा, आस्था या मानवीय गरिमा का कोई स्थान नहीं।
भाग 3 में पढ़ें... फालुन गोंग का कत्लेआम: जबरन अंग प्रत्यारोपण, नरसंहार और लाल ड्रैगन की नज़र।
लेख
केवली कबीर जैन
पत्रकारिता छात्र, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय