केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करेगी। सरकार कड़ी सजा, फास्ट ट्रैक कोर्ट और तय समय में जांच पूरी करने जैसे बड़े बदलावों के जरिए पेपर लीक पर सख्त रोक लगाने की तैयारी कर चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को इस संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी। इसके बाद केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को लोकसभा में विधेयक पेश करने की अनुमति मांगेंगे। सरकार ने यह कदम NEET UG 2026 परीक्षा में सामने आई व्यापक अनियमितताओं और लगातार उठ रहे सवालों के बाद उठाया है। नए संशोधन का उद्देश्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाकर दोषियों को जल्द सजा दिलाना है।
मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ, लेकिन पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के लगातार विरोध के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित रही। इसी बीच सरकार ने 2024 के मूल कानून को और प्रभावी बनाने का फैसला किया। नए संशोधन में जांच से लेकर मुकदमे और अपील तक हर चरण के लिए समय सीमा तय की गई है।
दोषियों को अब मिलेगी और कड़ी सजा
संशोधन विधेयक के अनुसार, अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए धारा 10 के तहत न्यूनतम सजा तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी जाएगी। अदालत दोष की गंभीरता के आधार पर अधिकतम दस साल तक की सजा भी दे सकेगी। इसके साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
परीक्षाएं आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता एजेंसियों के खिलाफ भी सरकार ने सख्ती बढ़ाई है। पहले अधिकतम एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये किया जाएगा। ऐसी एजेंसियों को सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंधित रखने की अवधि भी चार साल से बढ़ाकर आठ साल कर दी जाएगी।
यदि किसी सेवा प्रदाता संस्था के निदेशक या जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें कम से कम पांच साल की जेल होगी। पहले यह न्यूनतम अवधि तीन साल थी। उनके ऊपर पांच करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
संगठित अपराध पर और कड़ा प्रहार
यदि जांच में संगठित अपराध का मामला सामने आता है तो धारा 11 के तहत न्यूनतम सजा पांच साल से बढ़ाकर सात साल कर दी जाएगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम जुर्माना भी एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर दस करोड़ रुपये होगा। सरकार का मानना है कि इससे संगठित गिरोहों पर प्रभावी रोक लगेगी।
दो महीने में जांच पूरी करनी होगी
सरकार ने जांच प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया है। जरूरत पड़ने पर केंद्र विशेष कार्यबल यानी स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करेगा, जो इस कानून के तहत दर्ज मामलों की जांच करेगी।
चाहे जांच राज्य पुलिस करे, केंद्रीय जांच एजेंसी करे या विशेष कार्यबल, सभी को सूचना दर्ज होने या मामला सौंपे जाने की तारीख से दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि तय समय सीमा से जांच में देरी कम होगी और आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई हो सकेगी।
हर राज्य में बनेंगे स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट
संशोधन विधेयक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी नई जिम्मेदारी देगा। संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राज्य सरकारें एक सत्र न्यायालय को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट घोषित कर सकेंगी।
ये अदालतें सार्वजनिक परीक्षा कानून के साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 या अन्य संबंधित कानूनों के मामलों की भी एक साथ सुनवाई करेंगी। अदालत रोजाना सुनवाई करेगी और बिना ठोस कारण के स्थगन नहीं देगी। यदि स्थगन जरूरी होगा तो अदालत को उसका कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा।
तीन महीने में पूरा होगा मुकदमा
सरकार ने मुकदमों के निपटारे के लिए भी सख्त समय सीमा तय की है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत को तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी। संशोधन कानून लागू होने से पहले लंबित सभी मामले भी इन्हीं विशेष अदालतों में स्थानांतरित होंगे और उन्हें भी तीन महीने के भीतर पूरा करना होगा।
हर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए राज्य सरकारें विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति करेंगी। अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दो न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई करेगी। सरकार ने अपीलों का निपटारा भी यथासंभव तीन महीने में करने का लक्ष्य रखा है। जमानत संबंधी आदेशों के खिलाफ भी सीधे हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी। सामान्यतः अपील 30 दिनों के भीतर दायर करनी होगी, जबकि अधिकतम 90 दिनों की सीमा तय की गई है।
आंदोलन के बाद सरकार ने तेज किए सुधार
यह संशोधन ऐसे समय सामने आया है जब राजधानी में 37 दिन तक चला आंदोलन समाप्त हुआ। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सोनम वांगचुक के अगुवाई में जंतर मंतर पर धरना चला। बाद में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ कई दौर की बातचीत हुई। इसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और CJP ने केंद्र के साथ सहमति बनने के बाद अपना धरना "सद्भावना" के तहत वापस लेने की घोषणा कर दी।
उधर, सरकार केवल कानून को मजबूत करने तक सीमित नहीं रही। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA में भी बड़े स्तर पर बदलाव शुरू हो चुके हैं। अब तक 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं। कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है।
सरकार अगले एक महीने में NTA का पुनर्गठन पूरा करना चाहती है। इसके तहत आउटसोर्सिंग व्यवस्था की समीक्षा होगी, नए वरिष्ठ अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और परीक्षा केंद्रों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक से मुक्त बन सकें।