पेपर लीक पर सरकार का बड़ा प्रहार, लोकसभा ने पारित किया सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026

विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा ने संशोधन विधेयक को मंजूरी दी, सरकार ने परीक्षा माफियाओं पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी व्यवस्था का भरोसा जताया।

The Narrative World    30-Jul-2026   
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29 जुलाई को लोकसभा ने विपक्ष के हंगामे के बीच सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। सरकार ने सख्त दंड, फास्ट ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध जांच का प्रावधान जोड़कर परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने का दावा किया।
 
संसद में बुधवार को पूरे दिन विपक्ष के शोरगुल और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुभवों से सीख लेकर और रचनात्मक सुझावों को स्वीकार करते हुए कानून को पहले से अधिक प्रभावी बनाया है ताकि संगठित परीक्षा अपराधों पर कड़ी रोक लगाई जा सके।
 
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई को यह विधेयक लोकसभा में पेश किया था। इससे कुछ दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। सरकार ने उसी क्रम में परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए संशोधन लाने का फैसला किया।
 
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने लगातार नारेबाजी की। इस पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भी आलोचना की और कहा कि उन्होंने चर्चा के दौरान असंसदीय भाषा का प्रयोग किया।
 
 
CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी केंद्रीय मंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कोई गोली नहीं चलाई। पुलिस ने केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं होता। ऐसा निर्णय केवल मजिस्ट्रेट ही ले सकता है। इसलिए सरकार पर लगाए गए आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते।
 
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि संशोधन विधेयक में पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों से जुड़े अपराधों के लिए पहले से कहीं अधिक कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। अब ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 3 से 5 वर्ष की जगह 5 से 10 वर्ष तक की जेल होगी। साथ ही अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है।
 
सरकार ने परीक्षा संचालन से जुड़े सेवा प्रदाताओं के खिलाफ भी कठोर कदम उठाए हैं। यदि कोई सेवा प्रदाता अनुचित गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उस पर अब अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। पहले यह सीमा 1 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा ऐसे संस्थानों पर सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने पर 4 वर्ष की जगह 8 वर्ष तक प्रतिबंध लगाया जाएगा।
 
 
संशोधन विधेयक में सेवा प्रदाता संस्थानों के निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन की जवाबदेही भी बढ़ाई गई है। यदि उनकी भूमिका परीक्षा संबंधी अनियमितताओं में सामने आती है तो उन्हें 5 से 10 वर्ष तक की सजा का सामना करना पड़ेगा। पहले इस श्रेणी में 3 से 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान था। सरकार ने अधिकतम जुर्माना भी 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया है।
 
संगठित परीक्षा अपराधों के खिलाफ भी सरकार ने कानून को और कठोर बनाया है। ऐसे मामलों में अब 7 से 10 वर्ष तक की जेल होगी, जबकि पहले 5 से 10 वर्ष की सजा निर्धारित थी। अधिकतम जुर्माना भी 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि सख्त दंड से संगठित गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और परीक्षा प्रणाली में विश्वास मजबूत होगा।
 
 
संशोधन विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना का प्रावधान शामिल है। सरकार ने इन मामलों के त्वरित निपटारे के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है। जांच एजेंसियां 2 महीने के भीतर जांच पूरी करेंगी।
 
इसके बाद आरोप पत्र दाखिल होने की तारीख से 3 महीने के भीतर अदालत सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाएगी। सरकार का कहना है कि समयबद्ध जांच और शीघ्र न्याय से पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और लाखों छात्रों के भविष्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।