भारत के सबसे बड़े संपत्ति धारकों में से एक, चर्च ऑफ साउथ इंडिया (CSI) इन दिनों गंभीर कानूनी संकट से गुजर रहा है। कई राज्यों में जांच एजेंसियां और अदालतें इस संस्था के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। चर्च के अधिकारियों पर जमीन की अवैध खरीद फरोख्त, मेडिकल एडमिशन में धोखाधड़ी और गुटबाजी के कारण हिंसक झड़प करने के आरोप लगे हैं। पिछले दो सालों में CSI लगातार विवादों में घिरा है।
तमिलनाडु में 31 एकड़ सरकारी जमीन का खेल
तमिलनाडु में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच ने नवंबर 2024 में इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। डी. देवसहायम ने अदालत में जनहित याचिका दायर की थी। जस्टिस के.के. रामकृष्णन ने CBI को तुरंत केस दर्ज करने का आदेश दिया।
सरकार ने मदुरई शहर स्थित 31.10 एकड़ जमीन अमेरिकन बोर्ड ऑफ कमिश्नर्स फॉर फॉरेन मिशन्स को दी थी। सरकार ने शर्त रखी थी कि इस जगह पर जरूरतमंद महिलाओं के लिए इंडस्ट्रियल होम बनेगा। इस जमीन से होने वाली आय का उपयोग सिर्फ महिलाओं की भलाई के लिए करना था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि CSI मदुरई रामनाड डायोसीज के अधिकारियों ने सरकारी बाबुओं के साथ मिलकर फर्जी पावर डीड बनाई। इन लोगों ने सरकार की शर्तों को तोड़ते हुए करोड़ों की संपत्ति बेच दी।
हाई कोर्ट ने दस्तावेजों की जांच की और अधिकारियों की बड़ी साजिश को पकड़ा। पुराने सरकारी आदेश में सरकार ने लिखा था कि अगर कोई व्यक्ति जमीन का इस्तेमाल तय उद्देश्य के लिए नहीं करता है, तो सरकार संपत्ति वापस ले लेगी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि संपत्ति पर आज भी सरकार का मालिकाना हक है। अधिकारियों के पास जमीन बेचने का अधिकार नहीं था।
आंध्र प्रदेश में 7.75 एकड़ जमीन की हेराफेरी
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2026 में CSI को एक और झटका दिया। सर्वोच्च अदालत ने आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु में 7.75 एकड़ जमीन के फर्जीवाड़े से जुड़े आपराधिक मामले को फिर से खोल दिया। इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने यह केस रद्द कर दिया था। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने हाई कोर्ट का फैसला पलट दिया।
विवाद तब शुरू हुआ जब चर्च ऑफ साउथ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन ने केवल एक एकड़ जमीन को एक करोड़ रुपये में बेचने का प्रस्ताव पास किया। अधिकारियों ने बिक्री विलेख बनाते समय पूरी 7.75 एकड़ जमीन हस्तांतरित कर दी। राज्य सरकार ने साबित किया कि अधिकारियों ने बहुत कम कीमत पर यह जमीन बेची।
सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों को देखकर कहा कि रिकॉर्ड में एक एकड़ से ज्यादा जमीन बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं है। अदालत ने क्रिमिनल ट्रायल आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
केरल में एडमिशन के नाम पर ठगी
केरल में CSI साउथ केरल डायोसीज एक बड़ा मेडिकल कॉलेज चलाता है। इस डॉ. सोमरवेल मेमोरियल CSI मेडिकल कॉलेज पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। ED ने पूर्व CSI बिशप ए. धर्मराज रसालम और अन्य लोगों को आरोपी बनाया है।
जांच अधिकारियों ने बताया कि इन लोगों ने छात्रों से मेडिकल सीट दिलाने का झूठा वादा किया। अधिकारियों ने एडमिशन के नाम पर करोड़ों रुपये नकद वसूले। कई उम्मीदवारों ने 92 लाख रुपये तक का भुगतान किया। लेकिन छात्रों को सीट नहीं मिली।
ED ने अदालत में साबित किया कि अधिकारियों ने अवैध पैसे को आधिकारिक खातों में नहीं दिखाया। ED ने कई जगह छापे मारे और कई संपत्तियों को जब्त किया।
हाई कोर्ट ने बिशप को दी सजा
मद्रास हाई कोर्ट ने 2021 में सेंट जॉर्ज कैथेड्रल विवाद में सख्त फैसला सुनाया। अदालत ने मद्रास के बिशप रेवरेंड डॉ. जे. जॉर्ज स्टीफन और अन्य अधिकारियों को नागरिक अवमानना का दोषी ठहराया। अदालत ने सभी दोषियों को साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
इससे पहले 2018 में हाई कोर्ट की मदुरई बेंच ने चुनाव प्रक्रिया में धांधली करने पर बिशप रेवरेंड एस.ई.सी. देवसहायम को जेल भेज दिया था।
कर्नाटक की अदालतें लगातार CSITA के प्रशासन से जुड़े विवादों की सुनवाई कर रही हैं। अधिकारियों ने अदालती आदेशों को दरकिनार करने की कोशिश की। इसके बाद अदालतों ने चर्च की निगरानी के लिए रिटायर्ड जजों की नियुक्ति कर दी।
चर्च के अंदर खूनी संघर्ष
कानूनी मुकदमों के बीच CSI के कई डायोसीज में गुटबाजी इतनी बढ़ गई है कि लोग हिंसक झड़पों पर उतर आए हैं। कोयंबटूर डायोसीज में 2021 में विवाद को लेकर बैठक में मारपीट हुई। पुलिस ने प्रशासनिक सदस्य पर हमले के बाद मामले दर्ज किए। आंध्र प्रदेश के नरसापुरम और चेन्नई में भी विरोधी गुट अक्सर आपस में भिड़ते रहते हैं। पुलिस को बैठकों के दौरान शांति बनाए रखने के लिए बल तैनात करना पड़ता है।
समान कानून की जरूरत
अंत में एक बड़ा सवाल उठता है। अगर बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप और संपत्ति कुप्रबंधन के आरोप सरकारों को हिंदू मंदिरों की देखरेख करने का अधिकार देते हैं, तो यही नियम चर्चों पर भी लागू होना चाहिए। राज्य सरकारें एक धर्म के संस्थानों पर नियंत्रण नहीं रख सकतीं जबकि दूसरों को छूट दें। सभी प्रमुख धार्मिक संस्थानों को एक ही ढांचे के तहत आना चाहिए। समान कानून ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है।