वामियों (कम्युनिस्टों) की मनोवृत्ति,हथकंडे व दमनकारी इतिहास पर धारदार लेखनी से वज्रपात करती पुस्तक विषैला वामपंथ भाग 2

राजीव जी ने जर्मनी के कम्युनिस्ट विचारधारा का प्रसार करने के लिए स्थापित फ्रैंकफ़र्ट स्कूल के बारे में भी बताया जिसकी स्थापना 1957 में हुई थी

The Narrative World    26-Jan-2023   
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पिछले भाग में हमने वामियाें (कम्युनिस्टों) की वृत्ति,प्रवृत्ति,वामपंथ (कम्युनिज्म) के मॉडर्न (आधुनिक) रूप व लुभाने वाली शब्दावली के रूप में जाना, साथ ही अमेरिका में वामपंथ कैसे फला - फुला यह भी विस्तार से जाना और इसे समाप्त करने हेतु अमेरिकी राजनीति में समय - समय पर उभरे लीडर्स द्वारा किए गए अथक प्रयासों को भी निकट से जाना।
 
अमेरिका में ही 50 के दशक में एक और व्यक्तित्व हुआ जिसने कम्युनिस्टों के नाक में दम कर रखा था, रिचर्ड निक्सन अपनी सारी उपलब्धियों के बावजूद इतिहास जिसके लिए उन्हें याद करता है, वह वॉटरगेट कांड। अमेरिका वियतनाम युद्ध से अपने हाथ खींचने को था तभी वाशिंगटन पोस्ट नाम के समाचार पत्र के प्रथम पृष्ठ पर टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट प्रकाशित हो जाते हैं, जिस दिन यह टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट प्रकाशित होते हैं ठीक उसी दिन मैककार्थी के बेटी की शादी होती हैI
 
यह उसकी निजी जीवन को प्रभावित करने के उद्देश्य से भी किया गया होता है, बाद में मैकार्थी इस बात से बहुत परेशान हो जाते हैं जिसके फलस्वरूप वे संसद में और हर दफ्तर में बातों को टेप करना शुरू करते हैं यह जांचने के लिए कि कौन आखिर इन गुप्त दस्तावेजों के उजागर होने के लिए लिए जिम्मेदार था I इस ऑपरेशन में जिन लोगों ने कार्य किया उन्हें प्लंबर कहा गया। बाद में जुडिशरी ने इस मामले में असाधारण रुचि दिखाई और अंत में इस मामले में निक्सन की संलिप्तता सिद्ध करने में सफल हुए आखिरकार निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा और इस प्रकार एक और कम्युनिस्टों के विरुद्ध खड़े रहने वाले व्यक्तित्व का राजनीतिक कैरियर पूरी तरह समाप्त कर दिया गयाI
 
इसी के साथ अमेरिका के सन्दर्भ में लेखक यह भी बताते हैं कि वामपंथियों का समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित कभी ही नहीं रहा हैI इस बात का सशक्त उदाहरण हमें अमेरिका सिविल राइट्स मूवमेंट के दौरान उभरे कैदी- गैंगस्टर के मतों को जानने के बाद भली प्रकार ज्ञात होता है I इस पुस्तक में बताया गया है कि 1950 से 1960 के दशक में अमेरिका में अमेरिका सिविल राइट्स मूवमेंट की शुरुआत होती है, यह आंदोलन श्वेतों द्वारा अश्वेत ऊपर किए गए अत्याचारों के विरोध में खड़ा किया गया था जिसके लीडर बनकर उभरते हैं मार्टिन लूथर I
 
किंग मार्टिन लूथर को विश्व का गांधी भी कहा गया हैI बाद में आगे चलकर 1964 में मार्टिन लूथर का मर्डर हो जाता है I आंदोलन के बाद अमेरिका में काफी कानून बनाए जाते हैं, स्थितियों में सुधार होता हुआ भी दिखाई देता हैI लेकिन इसी बीच मेलकॉम एक्स जो कि एक गैंगस्टर और चोर था जिसने जेल में रहते हुए हैं इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था, सिविल राइट्स मूवमेंट का बहुत बड़ा विरोधी था; उसके अनुसार सिविल राइट मूवमेंट श्वेत और अश्वेत के बीच की दूरी को और बढ़ा रहा है I दरअसल मैलकम एक्स यह विद्वेष कभी मिटाना ही नहीं चाहता था वह मार्टिन लूथर को गोरों का एजेंट मानता था, यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों के बीच डिबेटिंग कराता था और बीबीसी तक उसकी डिबेट को लाइव प्रसारित किया करता थाI वह नेशंस ऑफ इस्लाम का प्रचारक और मौलवी था, उसकी शिक्षा के चार मुख्य बिंदु थे
 
1) दुनिया के मूल निवासी अश्वेत हैं
2) श्वेत लोग शैतान है
3) अश्वेत जातियां श्वेतों से श्रेष्ठ हैं
4) श्वेत जातियों का अंत निकट है
5) उसने अश्वेत लोगों के सेल्फ डिटरमिनेशन यानी उनके लिए अलग देश की मांग की और सभी को सशस्त्र विद्रोह करने के लिए भी प्रेरित किया, इस प्रकार की अलगाववादी मांगें आज हम पूरे में उठते हुए पाते हैंI
 
राजीव जी ने जर्मनी के कम्युनिस्ट विचारधारा का प्रसार करने के लिए स्थापित फ्रैंकफ़र्ट स्कूल के बारे में भी बताया जिसकी स्थापना 1957 में हुई थीI यह समाज को तोड़ने के लिए नए-नए नैरेटिव गढ़ने का काम करता था, इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल रिसर्च ही फ्रैंकफर्ट स्कूल के नाम से जाना जाता थाI
 
“फ्रैंकफर्ट स्कूल को समझने के लिए इसके 11 पॉइंट प्लांट जानना बहुत आवश्यक है जिन मुद्दों पर भारत में कम्युनिस्टों ने नैरेटिव गढ़ कर अपना तंत्र स्थापित किया हुआ है, उन्हीं मुद्दों को चिन्हित करता है I फ्रैंकफर्ट स्कूल का यह 11 पॉइंट प्लान मुद्दों को जान लेना एक सामान्य व्यक्ति के मस्तिष्क में आसपास चल रही घटनाओं के पीछे वामपंथी ताकत को पहचानने में कारगर साबित होगा I यह 11 पॉइंट प्लान भारत के वर्तमान वामपंथी षड्यंत्रों की सूची हैI यह 11 पॉइंट प्लान कुछ इस प्रकार है कि -”
 
 
 
1) रेसिजम के आरोपों की कल्पना करना
2) लगातार बदलाव और भ्रम की स्थिति बनाए रखना
3) बच्चों को सेक्स और समलैंगिकता का पाठ पढ़ाना
4) स्कूलों और शिक्षकों की अथॉरिटी को खत्म करना
5) शरणार्थियों घुसपैठियों और प्रवासियों को बढ़ावा देकर सामाजिक संरचना और पहचान को खत्म करना
6) नशे को बढ़ावा और समर्थन देना
7) धर्म स्थलों को खाली करना लोगों को धर्म से विमुख करना
8) अन्याय पूर्ण और अविश्वसनीय न्याय व्यवस्था खड़ी करना
9) सरकारी मदद पर लोगों को आश्रित बनाने को बढ़ावा
10) मीडिया पर नियंत्रण
11) परिवार की व्यवस्था को संपूर्ण नष्ट करना
 
और हम आज दुर्भाग्यवश इन सभी मुद्दों पर नित्य दिन नए-नए संघर्ष खड़े होते हुए देखते हैं। इस पुस्तक में यह भी बताया गया है कि वामपंथियों के आंदोलन और संघर्ष की तकनीक को 50 और 60 के दशक में अलिंसकी ने अपने प्रयोगों और अनुभवों से निखारा I 1971 में उसने अपने सारे अनुभव का सार एक पुस्तक में लिखा जो आज भी वामपंथी रणनीति की बाइबिल गिनी जाती है “रूल्स और रेडिकल्स” I वे कहते हैं कि वामपंथ की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो या दास कैपिटल नहीं अपितु रूल्स फॉर रेडिकल्स है I दुनिया के 2% वामियों ने भी कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो नहीं पढ़ी होगी, लेकिन रूल्स फॉर मेडिकल हर वामपंथी आंदोलन और रणनीति की रीढ़ है I अलिंसकी के 13 रूल्स हैं, जिन्हें आज भारत के वामी उपद्रवियों द्वारा प्रयोग किया जाता है उसमें से कुछ मुख्य रूल यहाँ उल्लेखित है।
 
प्रथम- शक्ति सिर्फ वह नहीं है जो आपके पास है वह भी है जो आपका शत्रु समझता है कि आपके पास है,दूसरा -कभी भी अपने एक्सपर्टीज के बाहर कुछ मत करो, तीसरा - जब भी संभव हो अपने शत्रु को उसके एक्सपर्टीज की सीमा से बाहर लाओ; हमेशा चिंता अनिश्चितता और और सुरक्षा बनाए रखने के प्रयास करो, चौथा-विपक्षी को उसके नियमों से चलने के लिए बाध्य करो, पांचवा - उपहास सबसे बड़ा हथियार है और अंतिम सबसे महत्वपूर्ण अपने टारगेट को चुने और फ्रिज कर दे पर्सोनालिज़े करें और धूल में मिला दें अपने आक्रमण को व्यक्ति केंद्रित रखें उसके समर्थन के सारे रास्ते बंद कर दें और उसे किसी भी कोने से सहानुभूति ना पाने दे I
 
व्यक्ति पर हमला करें संस्था पर नहीं व्यक्तिगत हमला ज्यादा परिणाम देता हैI भारतीय राजनीति में अंतिम रूल को उन पर बहुत लागू किया जाता रहा है जिन्होंने राष्ट्रद्रोहियों के विरुद्ध अपनी आवाज को मुखर किया है और राष्ट्र हित की बात प्रखरता से की है I इस प्रकार हम इन सभी नीतियों का भारत की राजनीति में हमें उपयोग होता हुआ दिखता है I
 
लेखक ने अपनी इस पुस्तक में चीन में उदय हुए वामपंथ और वामपंथी लीडर्स द्वारा किस प्रकार चीन की आर्थिक सामाजिक दशा को पतन की ओर ले जाया गया यह 4 से 5 चैप्टर्स में वर्णित किया हैI लेखक माओ ज़ेडोंग द्वारा ग्रेट लीप फॉरवर्ड अभियान और सफलता के बारे में विस्तार से बताते हुए कहते हैं कि “1958 से 1962 के मध्य चीन को विशुद्ध साम्यवादी सिद्धांतों के आधार पर करने को तत्पर माओ को देश के औद्योगिक आर्थिक विकास का एक आईडिया आया जिसे उसने अपनी महत्वकांक्षी योजना द ग्रेट लीप फॉरवार्ड के साथ लांच किया, माओ के दिमाग में घुस गई थी कि किसी भी देश की तरक्की और विकास का मापदंड स्टील का उत्पादन है तो, बड़े - बड़े पैमाने पर अपने-अपने घरों में स्टील बनाने के काम में लगा दिया I
 
पार्टी के पदाधिकारियों ने अपने - अपने क्षेत्र में टारगेट पूरा करने का काम मिला और सबको इसमें झोंक दिया,किसानों को उनके खेतों से निकालकर कम्युनो में डाल दिया गया और तीर बनाने के काम में लगा दिया उधर उनके खेतों की फसल पड़ी- पड़ी सड़ गई ज्यादातर लोगों के पास खेती करने के औजार फसल काटने की हसिया तक नहीं थीI सब कुछ स्टील बनाने के लिए कुछ पिघलाया जा चुका था नतीजा यह हुआ कि अकाल पड़ गयाI इस प्रकार सोशलिज्म के अंतर्गत लागू की गई आर्थिक नीतियों ने देश को भुखमरी की ओर धकेल दिया I
 
भारत की कम्युनिस्ट प्रवृत्तियां अगले लेख भाग 3 में.......