कांग्रेस-नक्सली लिंक : मुठभेड़ में ढेर माओवादी को श्रद्धांजलि देने पहुंची कांग्रेसी मंत्री

24 Apr 2024 17:38:45

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भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है माओवादी आतंक, और इसी माओवादी आतंक से निपटने के लिए अब केंद्र सरकार ने आक्रामक तरीके से मोर्चा खोल दिया है।


इसी का परिणाम है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में हुई मुठभेड़ में 29 माओवादी एक साथ मारे गए हैं, जो छत्तीसगढ़ राज्य में माओवादियों के विरुद्ध सबसे बड़ी सफलता है।


इस मुठभेड़ को बीएसएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस की डीआरजी इकाई ने संयुक्त ऑपरेशन में अंजाम दिया है, जिसकी अब सभी ओर से सराहना की जा रही है।


एक तरफ जहां भारत के आम नागरिक और सुरक्षाबल के जवान इस सफलता पर प्रसन्न हो रहे थे, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर माओवादी आतंकियों को 'शहीद' बता रही थी।


सुरक्षा बल के जवान जो अपने जान को दांव पर लगाकर मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं, उनकी उपलब्धि को कांग्रेस के नेता 'फर्जी' बताने में लगे हुए थे।


अब इससे एक कदम आगे बढ़ कर कांग्रेस पार्टी की एक वरिष्ठ नेता और तेलंगाना की कांग्रेस सरकार में मंत्री अनुसुइया दनसारी उर्फ सीताक्का ने मारे गए माओवादी आतंकी शंकर राव के घर जाकर उसे श्रद्धांजलि दी है।

 

गौरतलब है कि मारा गया माओवादी आतंकी शंकर राव माओवादी आतंकी संगठन में उत्तर बस्तर डिवीजनल कमेटी का खूंखार माओवादी था, जिसके शव को मुठभेड़ के बाद बरामद किया गया।


आंध्रप्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष विष्णु वर्धन रेड्डी ने सोशल मीडिया में एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा है कि 'तेलंगाना में कांग्रेस की मंत्री सीताक्का ने माओवादी सिरिपेल्ली सुधाकर उर्फ शंकरअन्ना के घर का दौरा किया, जिसकी कांकेर मुठभेड़ में मौत हुई थी। इस दौरान उसकी फोटो को कांग्रेस की मंत्री ने श्रद्धांजलि भी दी।'


उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा है कि कांग्रेस के नेता नक्सलियों को शहीदों की तरह मानते हैं। मुझे आश्चर्य नहीं होगा यदि कांग्रेस सत्ता में आने के बाद माओवादियों के नामों को गैलेंटरी अवार्ड के लिए नामित करेगी।'

भाजपा नेता के इन आरोपों को यदि हम दरकिनार कर भी दें तो कांग्रेस नेता का एनकाउंटर में मारे गए माओवादी आतंकी के घर जाकर श्रद्धांजलि देना भारत की जनता के सामने एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है।


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चित्र - मुठभेड़ में मारा गया माओवादी आतंकी शंकर राव 


यह जनता को सोचने के लिए मजबूर करता है कि कहीं देश को माओवादी आतंक में झोंकने वाली कांग्रेस पार्टी ही तो नहीं है ? यह प्रश्न भी उठता है कि क्या छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस पार्टी के कैडर की तरह माओवादी काम करते हैं ? यह सभी प्रश्न किसी भी सामान्य व्यक्ति के मन में आ सकते हैं, जो कांग्रेस नेताओं की इन गतिविधियों को देख रहा है।


“एक 25 लाख रुपये का इनामी माओवादी आतंकी, जिसे अपनी जान पर खेलकर सुरक्षाकर्मियों ने ढेर किया, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा था, जिसने हमारे जवानों की हत्या करने की योजना बनाई और जो लंबे समय से देश के एक हिस्से में आतंक का पर्याय बना हुआ था, आखिर कैसे कांग्रेस की कोई मंत्री उसके घर जाकर उसे श्रद्धांजलि दे सकती है ? यह केवल और केवल तभी संभव है जब कांग्रेस पार्टी और इन माओवादी आतंकियों के बीच कोई ऐसा संबंध हो, जिसे आज तक छिपाया गया है।”


जिस महिला मंत्री ने माओवादी के घर जाकर उसे श्रद्धांजलि दी है, वह खुद एक माओवादी आतंकी रह चुकी है। अपने सोशल मीडिया के बायो में वह गर्व से लिखती हैं कि वो 'पूर्व नक्सली' है।


पूर्व नक्सली होना या नक्सलवाद को छोड़कर मुख्यधारा में लौटना कहीं से बुरा नहीं है, ना ही इसमें कोई गलत है, लेकिन मुख्यधारा में लौटने के बाद भी यदि कोई माओवादी आतंकवादियों के लिए सहानुभूति रखता है, तो यह निश्चित है कि वो अभी भी अपने उस विचार से नहीं निकल पाया है।


जिस समर्पण भाव से सीताक्का ने माओवादी आतंकी को श्रद्धांजलि दी है, उससे यह भी आशंका होती है कि कहीं माओवादियों द्वारा सीताक्का को कांग्रेस पार्टी में भेजा तो नहीं गया, ताकि वो कांग्रेस पार्टी और माओवादियों के बीच सेतु का कार्य कर सके ?


हालांकि यह केवल एक आशंका है, जो किसी भी सामान्य व्यक्ति के भीतर सीताक्का की श्रद्धांजलि देते हुए वीडियो को देखकर आ सकती है, लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस नेताओं को इस कृत्य के बाद स्पष्टीकरण देना चाहिए कि उनके और माओवादियों के बीच क्या संबंध हैं ?

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