बीजापुर जिले में नक्सलियों की खूनी सोच ने एक बार फिर एक मासूम जनजाति बालक को शिकार बना लिया। गुरुवार दोपहर गंगालूर थाना क्षेत्र के पिड़िया गांव के पास जंगल के रास्ते में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी की चपेट में आने से 15 वर्षीय राजू गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि राजू जंगल के पास खेल रहा था, तभी उसका पैर जमीन में छिपे आईईडी पर पड़ गया और जोरदार धमाका हुआ।
धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो देखा कि राजू खून से लथपथ जमीन पर पड़ा है। ग्रामीणों ने तुरंत सीआरपीएफ कैंप को सूचना दी। इसके बाद 199वीं और 85वीं बटालियन के जवान मौके पर पहुंचे और घायल बच्चे को कैंप लाकर प्राथमिक इलाज दिया। गंभीर हालत को देखते हुए जवानों ने रात में ही जोखिम उठाकर राजू को जिला अस्पताल बीजापुर पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका लंबे समय से नक्सल गतिविधियों से प्रभावित है। आए दिन नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी और बारूदी सुरंगें ग्रामीणों की जान के लिए खतरा बनी हुई हैं। कई निर्दोष लोग इन धमाकों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं।
जनजाति समुदाय में इस घटना के बाद आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जो माओवादी जल-जंगल-ज़मीन की रक्षा का दावा करते हैं, वही अब जनजातियों के जीवन के सबसे बड़े दुश्मन बन गए हैं। जनता की सुरक्षा के नाम पर नक्सली अब उनके बच्चों के खून से अपनी राजनीति सींच रहे हैं।
सुरक्षा बलों ने घटना के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। जवानों का कहना है कि निर्दोष ग्रामीणों पर हमला करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि माओवादी न तो जनहित चाहते हैं और न ही समाज की भलाई, उनका मकसद सिर्फ हिंसा और आतंक फैलाना है।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र