ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की काली सच्चाई

ब्रिटेन में पाकिस्तानी गैंग्स का घिनौना खेल, मासूम बच्चियों को फंसाकर किया यौन शोषण, रिपोर्ट में हुआ खुलासा।

The Narrative World    26-Aug-2025
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ब्रिटेन के विभिन्न शहरों में फैले पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम गिरोहों द्वारा हजारों नाबालिग लड़कियों का संगठित यौन शोषण एक ऐसा घिनौना अपराध है, जो न केवल मानवता को कलंकित करता है, बल्कि ब्रिटिश समाज की नींव को हिला रहा है। यह कांड, जो दशकों से चल रहा है, अब 2025 में जारी एक रिपोर्ट के माध्यम से फिर से सुर्खियों में है, जहाँ संस्थागत पूर्वाग्रह और राजनीतिक कायरता ने इन अपराधियों को खुली छूट दी है।
 
रोथरहम, रोचडेल और टेलफोर्ड जैसे शहरों में मुख्य रूप से ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाकर, इन गिरोहों ने ड्रग्स, शराब और झूठे वादों के जाल में फंसाकर उन्हें सेक्स गुलाम बना दिया। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस, सामाजिक सेवाएं और राजनीतिक नेता इन अपराधों को जानते हुए भी चुप हैं। यह न केवल एक अपराध है, बल्कि एक सुनियोजित 'एजेंडा' की तरह लगता है, जहां निर्दोष बच्चियों का जीवन बर्बाद किया गया।
 
इस घिनौने कांड की जड़ें 1990 के दशक तक जाती हैं, जब पाकिस्तानी मूल के पुरुषों के गिरोहों ने ब्रिटेन के उत्तरी शहरों में अपना जाल बिछाना शुरू किया। रोथरहम में अकेले 1997 से 2013 तक करीब 1,400 बच्चियों का शोषण हुआ, जहां अपराधी उन्हें टैक्सी स्टैंडों, बाजारों और स्कूलों के बाहर फंसाते थे।
 
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ये गिरोह, ज्यादातर पाकिस्तानी मुस्लिम पुरुषों से बने, लड़कियों को पहले दोस्ती का झांसा देते, फिर नशे की लत लगाते और फिर सामूहिक बलात्कार के लिए मजबूर करते। एक पीड़िता ने बताया कि उसे 12 साल की उम्र से ही एक पुलिस अधिकारी द्वारा बलात्कार किया गया, और वह भी पुलिस की गाड़ी में। यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश थी, जहां अपराधी पैसे कमाने के लिए बच्चियों को अन्य पुरुषों के पास भेजते थे।
 
केसी रिपोर्ट, जो बैरनस लुईस केसी द्वारा 2025 में जारी की गई, इस कांड की असली तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन में 'अंधापन, अज्ञानता और पूर्वाग्रह' की वजह ने इन गिरोहों को पनपने दिया। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रेटर मैनचेस्टर, साउथ यॉर्कशायर और वेस्ट यॉर्कशायर जैसे क्षेत्रों में संदिग्धों में पाकिस्तानी मूल के लोगों की संख्या असमानुपातिक रूप से ज्यादा है, जैसे रोथरहम के ऑपरेशन स्टोववुड में 80 प्रतिशत अपराधी पाकिस्तानी थे। लेकिन रिपोर्ट ने इस बात पर चुप्पी साध ली कि इन अपराधों में इस्लामी जिहाद की भावना ने क्या भूमिका निभाई।
 
मिडल ईस्ट फोरम की एक रिपोर्ट में इसे स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पाकिस्तानी ग्रामीण इलाकों से आए पुरुषों ने गैर-मुस्लिम लड़कियों को 'आसान शिकार' माना, क्योंकि उनकी पृष्ठभूमि में महिलाओं को दबाने की प्रवृत्ति है। यह 'एजेंडा' पाकिस्तान के जिहाद की भावना से जुड़ा लगता है, जहां गैर-मुस्लिम महिलाओं को कमतर समझा जाता है।
 
ब्रिटिश सरकार की विफलता इस कांड को और भी भयावह बनाती है। होम ऑफिस की 2020 की रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रुप-बेस्ड चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉइटेशन में ज्यादातर अपराधी सफेद पुरुष हैं, लेकिन उच्च-प्रोफाइल मामलों में पाकिस्तानी मुस्लिमों की अधिकता को नकारा नहीं जा सकता। क्विलियम फाउंडेशन की 2017 की स्टडी में 84 प्रतिशत ग्रूमिंग गैंग अपराधी पाकिस्तान-बांग्लादेशी-अफ़ग़ानी मूल के थे। फिर भी, राजनीतिक दबाव के कारण जांच रुकी रही।
 
2025 में लेबर सरकार ने अंततः एक राष्ट्रीय जांच की घोषणा की, लेकिन यह उलटफेर एलन मस्क जैसे लोगों के दबाव के बाद हुआ, जिन्होंने इसे 'रसिस्ट डॉग व्हिसल' कहा। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, फार-राइट समूहों ने इस मुद्दे को भुनाया, लेकिन सच्चाई यह है कि पीड़िताएं ज्यादातर वाइट ब्रिटिश लड़कियां हैं, जो वर्षों से न्याय की गुहार लगा रही हैं।
 
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पाकिस्तानी मुस्लिम, जो ब्रिटेन में 7 प्रतिशत से कम आबादी हैं, अपराध के इन मामलों में 40-80 प्रतिशत तक प्रतिनिधित्व करते हैं। इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट में मोहम्मद जाहिद का उदाहरण दिया गया, जो रोचडेल में बाजार चलाते हुए ग्रूमिंग गैंग संचालित करता था। वह नाबालिग लड़कियों को शराब और ड्रग्स देकर अपने गिरोह के हवाले करता था। ऐसी घटनाएं ब्रिटेन के 70 से ज्यादा स्थानों पर हुईं, जहां अपराधी सांस्कृतिक मतभेदों का फायदा उठाते थे। लेकिन सबसे शर्मनाक है पुलिस की भूमिका, जे रिपोर्ट (2014) में कहा गया कि अपराधियों की नस्ल पर चर्चा से बचने के कारण जांच रुकी। 2025 में हंसर्ड की संसदीय बहस में इसे 'चाइल्ड रेप गैंग्स' कहा गया, और बैरनस केसी ने राष्ट्रीय ऑडिट की मांग की।
 
पीड़िताओं की कहानियां दिल दहला देने वाली हैं। एक लड़की, जो 13 साल की थी, को मुहम्मद इमरान नामक पाकिस्तानी ने अपहरण कर ड्रग्स देकर 100 से ज्यादा पुरुषों के हवाले किया। तीन साल बाद भागने पर उसे न्याय मिला, और इमरान को 23 साल की सजा हुई। लेकिन ऐसी हजारों कहानियां हैं, जहां पीड़िताओं को 'क्रिमिनल' कहा गया, जबकि अपराधी खुलेआम घूमते रहे। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर हालिया पोस्ट्स में लुबना जायद नामक मुस्लिम महिला ने बताया कि पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स की आलोचना करने पर उन्हें मौत की धमकियां मिलीं, और घर छोड़ना पड़ा।
यह दिखाता है कि आलोचना करने वालों को भी दबाया जाता है।
 
ब्रिटेन की लेबर सरकार अब राष्ट्रीय जांच का वादा कर रही है, लेकिन क्या यह पर्याप्त है? प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 2025 में इसे 'ग्रूमिंग गैंग्स' जांच की घोषणा की, लेकिन पहले वे खुद इसे रोकते रहे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तानी उप-प्रधानमंत्री से मिलकर संबंध मजबूत करने की बात हो रही है, जबकि हजारों बच्चियां न्याय इंतजार कर रही हैं। यह दोहरा चरित्र है, एक तरफ बाढ़ प्रभावितों के लिए संवेदना, दूसरी तरफ अपराधियों की संस्कृति को नजरअंदाज।