दुष्कर्म को 'पुण्य' से जोड़ने का दुस्साहस: कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया की ज़ुबान से छलकी घिनौनी मानसिकता

18 Jan 2026 13:08:39
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खूबसूरत लड़की से भटक जाता है आदमी जैसे आपत्तिजनक बयान देकर मध्य प्रदेश की राजनीति को झकझोरने वाले कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
 
मध्य प्रदेश के भिंड जिले की भांडेर विधानसभा से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के बलात्कार, महिलाओं की सुंदरता, जाति और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े बयान ने शुक्रवार को राज्य की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया।
 
बरैया ने सार्वजनिक मंच से यह दावा किया कि भारत में ज्यादातर दुष्कर्म के मामले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के साथ होते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने दुष्कर्म को पुरुष के "ध्यान भटकने" से जोड़ते हुए इसे एक तरह का तथाकथित सिद्धांत करार दिया।

 
कांग्रेस विधायक ने कहा कि कोई भी पुरुष, चाहे उसकी मानसिक स्थिति कैसी भी हो, अगर रास्ते में किसी बेहद खूबसूरत लड़की को देख ले तो उसका दिमाग बिगड़ सकता है और वह दुष्कर्म जैसा अपराध कर सकता है। यह बयान न केवल अपराध को हल्का बताने की कोशिश करता है बल्कि पीड़िता को दोषी ठहराने वाली घातक सोच को भी बढ़ावा देता है।
 
बरैया यहीं नहीं रुके। उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को लेकर और भी शर्मनाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इन वर्गों की महिलाएं "सुंदर भी नहीं होतीं", फिर भी उनके साथ दुष्कर्म होता है। इस कथन ने न सिर्फ महिलाओं का अपमान किया बल्कि अनुसूचित जाति और जनजाति समाज को भी नीचा दिखाने की कोशिश की।
 
कांग्रेस विधायक ने आगे यह दावा किया कि इन समुदायों से जुड़े कुछ धार्मिक या प्राचीन ग्रंथों में ऐसी विकृत मान्यताएं लिखी हैं, जिनके कारण अपराधी दुष्कर्म को पुण्य कर्म समझते हैं। उन्होंने यह तक कह दिया कि कुछ लोग इसे तीर्थ यात्रा जैसा मानते हैं। इस बयान ने सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला किया।
 
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बरैया ने सामूहिक दुष्कर्म और यहां तक कि मासूम बच्चियों के साथ होने वाले जघन्य अपराधों को भी इसी सोच से जोड़ दिया। उन्होंने अनुसूचित जाति समाज की धार्मिक मान्यताओं को निशाना बनाकर अपराध की जिम्मेदारी समाज पर डालने की कोशिश की। यह बयान न केवल असंवेदनशील है बल्कि अपराधियों को बचाने वाली मानसिकता को भी उजागर करता है।
 
इन बयानों के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई। महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने इसे महिला विरोधी, जाति विरोधी और अपराध को सही ठहराने वाला बयान बताया। सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस और बरैया दोनों को जमकर घेरा गया।
 
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मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने तुरंत दूरी बनाने की कोशिश की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बरैया के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दुष्कर्म को किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि दुष्कर्म करने वाला अपराधी है और इस अपराध को न जाति से जोड़ा जा सकता है, न धर्म से।
हालांकि, कांग्रेस की यह सफाई लोगों को खोखली लगी। सवाल उठे कि क्या पार्टी ऐसे नेताओं पर कार्रवाई करेगी या फिर केवल बयान देकर जिम्मेदारी से बच जाएगी। विपक्षी दल भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को आक्रामक रूप से घेरा।
 
भाजपा नेताओं ने बरैया के बयान को शर्मनाक और अमानवीय बताया। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को सुंदरता के पैमाने पर तौलना और महिलाओं के साथ अपराध को धार्मिक सोच से जोड़ना कांग्रेस की असली मानसिकता को उजागर करता है।
 
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इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध पर इस तरह की बयानबाजी न केवल पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कती है बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है। कांग्रेस विधायक का बयान राजनीतिक भूल नहीं बल्कि सोच का आईना है, जो पार्टी की कथनी और करनी के अंतर को प्रदर्शित करता है।
 
लेख
शोमेन चंद्र
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