केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया, जिसमें सरकार ने आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विस्तार और जनकल्याण को केंद्र में रखा।
वित्त मंत्री ने बजट के जरिए स्पष्ट किया कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए दीर्घकालिक विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहती है। बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद के
4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य तय किया गया। साथ ही सरकार ने 2030 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को 50 प्लस माइनस 1 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप रखा।
राजकोषीय स्थिति की बात करें तो सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 35.3 लाख करोड़ रुपये के राजस्व प्राप्तियों और 18.1 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत प्राप्तियों का अनुमान पेश किया। व्यय पक्ष पर सरकार ने 17.1 लाख करोड़ रुपये का प्रभावी पूंजीगत व्यय और 41.3 लाख करोड़ रुपये का राजस्व व्यय तय किया। बीते एक दशक में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2015 में यह आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर
12.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इसके साथ ही सरकार ने 16वें वित्त आयोग की उस सिफारिश को स्वीकार किया, जिसमें राज्यों को करों में 41 प्रतिशत ऊर्ध्वाधर हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही गई थी। इसके तहत राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये के अनुदान मिलेंगे, जिनमें ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों तथा आपदा प्रबंधन के लिए राशि शामिल है। कुल मिलाकर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 26.2 लाख करोड़ रुपये के हस्तांतरण का प्रावधान किया गया।
उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए बजट में कई अहम योजनाओं की घोषणा हुई। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए घरेलू चिप निर्माण क्षमता को मजबूत करने का प्रयास जारी रहेगा। इसके अलावा बायोफार्मा शक्ति, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, वस्त्रों के लिए एकीकृत कार्यक्रम और कंटेनर निर्माण योजना शुरू की जाएगी। सरकार तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करेगी और दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट के लिए अनुसंधान से लेकर विनिर्माण तक की पूरी श्रृंखला को कवर करने वाली योजना लागू करेगी।
सरकार ने उच्च मूल्य निर्माण और अवसंरचना उपकरणों के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा देने का फैसला किया। इन पहलों को समर्थन देने के लिए कर सुधार किए गए हैं। बॉन्डेड जोन में टोल निर्माण के लिए पूंजीगत वस्तुएं उपलब्ध कराने वाले गैर-निवासियों को पांच साल की आयकर छूट मिलेगी। कंपोनेंट वेयरहाउसिंग के लिए सेफ हार्बर प्रावधान लागू होंगे और विश्वसनीय निर्माताओं को शुल्क भुगतान में राहत दी जाएगी। विमान पुर्जों, माइक्रोवेव ओवन के घटकों और महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण के लिए पूंजीगत वस्तुओं पर मूल सीमा शुल्क छूट बढ़ाई गई है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए बजट में तीन स्तरीय रणनीति अपनाई गई है। सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड घोषित किया और आत्मनिर्भर भारत फंड में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ी। तरलता बढ़ाने के लिए सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की एमएसएमई से खरीद के भुगतान को टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म से जोड़ना अनिवार्य किया गया। टीआरईडीएस पर चालान डिस्काउंटिंग के लिए क्रेडिट गारंटी योजना लाई जाएगी और जीईएम को टीआरईडीएस से जोड़ा जाएगा। कूरियर निर्यात पर 10 लाख रुपये प्रति खेप की सीमा हटाकर निर्यात को आसान बनाया गया।
सेवा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए शिक्षा से रोजगार और उद्यम पर केंद्रित उच्चस्तरीय स्थायी समिति गठित होगी। चिकित्सा मूल्य पर्यटन के लिए पांच हब स्थापित किए जाएंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र में दस विषयों में एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल संस्थानों को उन्नत किया जाएगा और 1.5 लाख बहु-कुशल केयरगिवर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थान खुलेंगे और डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का उन्नयन होगा। रचनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएंगी।
अवसंरचना क्षेत्र में पूर्व से पश्चिम तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग और सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की
घोषणा हुई। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड के जरिए ऋणदाताओं को आंशिक क्रेडिट गारंटी मिलेगी और राज्यों को एसएएससीआई योजना के तहत 2 लाख करोड़ रुपये का समर्थन दिया जाएगा।
कृषि और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी बजट ने कई कदम उठाए हैं। 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास होगा। कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन और स्टोरेज के लिए 20,000 करोड़ रुपये की योजना लाई गई है। कर सरलीकरण के तहत विदेश यात्रा पैकेज और शिक्षा-चिकित्सा रेमिटेंस पर टीसीएस घटाया गया और रिटर्न संशोधन की समयसीमा बढ़ाई गई।
कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026-27 ने विकास, सुधार और स्थिरता के संतुलन के साथ सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा है।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र