भारत ने अपनी वायु शक्ति को नई ऊंचाई देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 114 अत्याधुनिक डसॉल्ट राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को
हरी झंडी मिली। करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये का यह सौदा भारत के रक्षा इतिहास के सबसे बड़े समझौतों में शामिल होने जा रहा है। अब सरकार इस समझौते को अंतिम स्वीकृति के लिए मंत्रिमंडलीय सुरक्षा समिति के सामने रखेगी।
सरकार ने इस निर्णय के जरिए साफ संदेश दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने स्क्वाड्रन की कमी को लेकर चिंता जताती रही है। फिलहाल वायुसेना के पास 28 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। हर स्क्वाड्रन में लगभग 18 विमान शामिल होते हैं। इस लिहाज से वायुसेना को 756 लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है। 114 नए राफेल विमानों की खरीद इस कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
सरकार ने इस सौदे में आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी केंद्र में रखा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 18 राफेल विमान पूरी तरह तैयार अवस्था में भारत आएंगे। ये विमान उन्नत स्कैल्प क्रूज मिसाइलों से लैस रहेंगे, जिससे दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी से सटीक प्रहार संभव होगा। वहीं शेष 90 विमानों का निर्माण भारत में ही होगा। इस प्रक्रिया में देश की निजी क्षेत्र की कंपनियां भी भाग लेंगी। इससे रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलेगी और हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सूत्रों के अनुसार भारत में बनने वाले विमानों में लगभग 50 प्रतिशत पुर्जे स्वदेशी होंगे। पहले यह लक्ष्य 30 प्रतिशत तय हुआ था, लेकिन सरकार ने घरेलू क्षमता को बढ़ाने के लिए इसे बढ़ाया। इतना ही नहीं, भारत को राफेल प्लेटफॉर्म पर अपने स्वदेशी हथियार और अन्य प्रणालियां जोड़ने का पूरा अधिकार मिलेगा। इससे देश की तकनीकी क्षमता और मजबूत होगी।
गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना पहले से 36 राफेल विमानों का संचालन करती है। इन विमानों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में अपनी क्षमता साबित की है। राफेल के अलावा वायुसेना के पास सुखोई एसयू-30 एमकेआई, एचएएल तेजस, सेपेकैट जैगुआर और डसॉल्ट मिराज 2000 जैसे प्रमुख लड़ाकू विमान भी मौजूद हैं। अब 114 अतिरिक्त राफेल जुड़ने से वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ेगी।
दूसरी ओर भारतीय नौसेना को भी बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। सरकार ने अमेरिका से छह अतिरिक्त बोइंग पी-8आई नेप्च्यून समुद्री निगरानी विमान खरीदने का फैसला किया है। ये विमान लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियान में अहम भूमिका निभाते हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्रांस के साथ यह समझौता ऐसे समय पर आगे बढ़ा है जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन भारत दौरे पर आने वाले हैं। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। भारत और फ्रांस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते रहे हैं और यह सौदा उसी विश्वास का विस्तार है।
स्पष्ट है कि भारत ने एक साथ वायु और समुद्री शक्ति को सशक्त करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है। मजबूत वायुसेना और सक्षम नौसेना किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा की रीढ़ होती हैं। राफेल और पी 8आई जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म भारत को न केवल सामरिक बढ़त देंगे, बल्कि आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में भी नई ऊर्जा भरेंगे। आने वाले वर्षों में यह निर्णय भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
लेख
शोमेन चंद्र