मुंबई में 17 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 20 से अधिक समझौतों की घोषणा कर भारत फ्रांस संबंधों को स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचाया।
राष्ट्रपति मैक्रों तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे। दोनों नेताओं ने व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की और रक्षा, कौशल विकास, तकनीक, व्यापार, स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में नए समझौते किए। दोनों देशों ने इस साझेदारी को वैश्विक स्थिरता के लिए अहम कदम बताया।
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस का संबंध वैश्विक स्थिरता की ताकत बनता है। उन्होंने फ्रांस को भारत का सबसे पुराना रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने और राष्ट्रपति मैक्रों ने इस रिश्ते में नई ऊर्जा और गहराई जोड़ी है। इसी भरोसे और साझा दृष्टि के आधार पर दोनों देशों ने रिश्तों को स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया।
इस दौरे का एक बड़ा आकर्षण भारत फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन की शुरुआत रही। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नवाचार सहयोग से आगे बढ़ता है, अलगाव से नहीं। इस पहल के जरिए दोनों देश उद्योगों, स्टार्टअप, एमएसएमई, छात्रों और शोधकर्ताओं को आपस में जोड़ेंगे। रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष और उभरती तकनीकों में साझा काम को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कई नए संस्थानों की घोषणा भी की। दोनों देश इंडो फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ, इंडो फ्रेंच सेंटर फॉर डिजिटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी और एयरोनॉटिक्स में स्किलिंग के लिए नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये संस्थान केवल भवन नहीं होंगे, बल्कि भविष्य निर्माण के मंच बनेंगे। ये मंच युवाओं को अवसर देंगे और संयुक्त तकनीकी प्रगति को गति देंगे।
राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने चौथे आधिकारिक दौरे पर मिले स्वागत के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने भारत फ्रांस संबंधों को भरोसे और महत्वाकांक्षा पर आधारित अद्वितीय साझेदारी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इस रिश्ते पर पूर्ण विश्वास जताते हुए इसे नए स्तर पर पहुंचाया है। उन्होंने भारत को फ्रांस का सबसे विश्वसनीय वैश्विक साझेदारों में से एक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक सहयोग को भी नई दिशा दी। उन्होंने घोषणा की कि भारत जल्द ही फ्रांस में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र खोलेगा। दोनों देश लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर जैसे परियोजनाओं पर भी साथ काम करेंगे। इस पहल से संबंध केवल रक्षा और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संस्कृति और विरासत तक भी फैलेंगे।
रक्षा क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति हुई। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने कर्नाटक के वेमगल में H125 हेलीकॉप्टर फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया। एयरबस और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने इस संयुक्त परियोजना को आगे बढ़ाया। यह संयंत्र भारत में H125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर का निर्माण करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसा हेलीकॉप्टर बनाएंगे जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। दोनों देश इस हेलीकॉप्टर का निर्यात भी करेंगे। उन्होंने इस परियोजना को भारत की निर्माण क्षमता में बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताया।
रक्षा सहयोग को और मजबूती तब मिली जब भारत ने सरकार से सरकार के ढांचे में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सैन्य खरीद में से एक है। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि दोनों देश लड़ाकू विमानों से लेकर पनडुब्बियों तक सहयोग बढ़ा रहे हैं।
भूराजनीतिक सहयोग पर भी दोनों नेताओं ने जोर दिया। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस हिंद प्रशांत क्षेत्र में करीबी समन्वय रखते हैं। दोनों देश कानून के शासन और वैश्विक वर्चस्व के विरोध जैसे साझा मूल्यों को मानते हैं। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर एलायंस जैसी पहलों का उल्लेख किया, जिन्हें दोनों देशों ने मिलकर आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस की मित्रता की कोई सीमा नहीं है। यह साझेदारी गहरे समुद्र से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक फैल सकती है।
राष्ट्रपति मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों के साथ मुंबई पहुंचे। महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका स्वागत किया। मैक्रों एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भी भाग लेंगे और भारतीय नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे।
दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि भारत फ्रांस की बहुध्रुवीय और संतुलित विश्व व्यवस्था की सोच में केंद्रीय भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि यह साझेदारी रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सभी आयामों को समेटती है।
मुंबई शिखर वार्ता ने साफ संकेत दिया कि भारत और फ्रांस आने वाले वर्षों में और गहरा सहयोग करेंगे। 20 से अधिक समझौतों और नई संस्थागत पहलों के साथ दोनों देशों ने न केवल अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूत किया, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि में योगदान देने का भी संकल्प लिया।
लेख
शोमेन चंद्र