छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई, विकास कार्यों और पुनर्वास नीति के असर से माओवाद को करारा झटका लगा है।
शनिवार को बस्तर संभाग में 51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि ओडिशा में शुक्रवार को एक इनामी माओवादी दंपती समेत 19 उग्रवादियों ने हथियार डाल दिए।
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण करने वाले 51 नक्सलियों पर कुल 1.61 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इन नक्सलियों में 34 महिलाएं शामिल रहीं। यह घटनाक्रम जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 महोत्सव के उद्घाटन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान सामने आया, जिससे माओवाद विरोधी अभियान को नई मजबूती मिली।
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि बीजापुर जिले में 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 20 महिलाएं रहीं। वहीं सुकमा जिले में 21 नक्सली मुख्यधारा में लौटे, जिनमें 14 महिलाएं शामिल रहीं। सभी नक्सलियों ने बस्तर पुलिस की 'पूना मार्गेम' पुनर्वास योजना के तहत आत्मसमर्पण किया।
आईजी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाकर नक्सलियों पर दबाव बनाया। साथ ही सड़क, संचार और प्रशासनिक पहुंच बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में सरकार का भरोसा मजबूत हुआ। नक्सलियों ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि संगठन के भीतर शोषण, हिंसा और भय का माहौल बना रहता है, जबकि सरकार की नीति उन्हें सम्मानजनक जीवन का अवसर देती है।
इससे पहले
30 जनवरी को सुकमा जिले में चार नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इन पर कुल आठ लाख रुपये का इनाम था। ये सभी दक्षिण बस्तर डिवीजन की किस्ताराम एरिया कमेटी से जुड़े रहे। आत्मसमर्पण करने वालों में एरिया कमेटी सदस्य सोढ़ी जोगा शामिल रहा, जिस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। अन्य नक्सलियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम रहा। उन्होंने इंसास राइफल, एसएलआर, .303 और .315 बोर की राइफलें पुलिस को सौंपीं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किस्ताराम और गोलापल्ली क्षेत्रों में स्थापित नए सुरक्षा कैंपों ने नक्सलियों की आवाजाही सीमित कर दी। बेहतर सड़क संपर्क और लगातार तलाशी अभियानों से माओवादी नेटवर्क कमजोर पड़ा। इन कदमों से ग्रामीणों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा और नक्सलियों का जनाधार घटा।
दूसरी ओर ओडिशा में भी माओवाद को
बड़ा झटका लगा। भुवनेश्वर में 1.10 करोड़ रुपये के इनामी माओवादी दंपती समेत 19 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले दंपती सीपीआई माओवादी की राज्य समिति के सदस्य रहे। इनमें निरंजन राउत उर्फ निखिल और उनकी पत्नी रश्मिरा लेंका उर्फ इंदु शामिल हैं। दोनों संगठन की दूसरी सबसे ऊंची इकाई में सक्रिय रहे।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दावा किया कि राज्य सरकार की सख्त नीति और विकास कार्यों से ओडिशा 31 मार्च तक नक्सल मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़ने वालों को सरकार सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन देगी।
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने शेष नक्सलियों से हिंसा छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार विकास और शांति के रास्ते पर आगे बढ़ रही है और माओवाद के लिए अब इस क्षेत्र में कोई जगह नहीं बची है।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र