बस्तर में
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक बढ़त दर्ज करते हुए कुख्यात नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने साथियों के साथ बीजापुर के कुटरू थाने में AK-47 सहित हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने की तय समयसीमा से करीब एक सप्ताह पहले यह बड़ी सफलता सामने आई। पुलिस ने सभी नक्सलियों को जगदलपुर ले जाकर आगे की प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस के
अनुसार, सुकमा निवासी 56 वर्षीय पापाराव उर्फ मंगू नक्सली संगठन के दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य रहा और पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रभारी भी रहा। वह दक्षिण सब जोनल ब्यूरो से भी जुड़ा था। पापाराव लंबे समय से AK-47 लेकर सक्रिय रहा और बस्तर के जल, जंगल और जमीन की गहरी जानकारी के कारण कई बार सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बच निकलता था।
करीब दो दशक तक इंद्रावती और अबूझमाड़ के घने जंगलों में सक्रिय रहते हुए पापाराव ने नक्सली हिंसा को बढ़ावा दिया और कई हमलों की साजिश रची। वर्ष 2010 के ताड़मेटला हमले में 76 जवानों के बलिदान जैसी घटनाओं में उसकी भूमिका सामने आई। सुरक्षा एजेंसियों ने उसे लंबे समय से बड़े खतरे के रूप में चिन्हित किया था।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कवर्धा में बताया कि कुल 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 10 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने इनके पास से 8 AK-47, एक SLR और एक INSAS राइफल सहित अन्य हथियार बरामद किए। उन्होंने कहा कि सरकार की सख्त नीति और पुनर्वास योजना के चलते नक्सली अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि पापाराव के आत्मसमर्पण से पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी लगभग खत्म हो गई है। देवा के पहले ही हथियार डालने के बाद पापाराव ही एकमात्र सक्रिय लड़ाकू कमांडर बचा था। अब बाकी बचे शीर्ष नक्सली उम्रदराज हो चुके हैं और संगठन की पकड़ कमजोर पड़ गई है।
पिछले एक साल में सुरक्षा बलों ने नक्सल संगठन की कमर तोड़ दी।
माड़वी हिड़मा, बसवराजू, गणेश उइके समेत 17 बड़े नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। वहीं भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे कई बड़े नक्सलियों ने सैकड़ों साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। बस्तर में बटालियन नंबर 1 के कमांडर देवा ने भी हिंसा छोड़ दी थी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद से देशभर में 10 हजार से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। केवल 2025 में 2300 और 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 630 से ज्यादा नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार की सख्त कार्रवाई, विकास कार्य और पुनर्वास नीति ने माओवादी विचारधारा की जड़ें कमजोर कर दी हैं।
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि पापाराव और उसके साथियों का आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी कामयाबी है। उन्होंने दोहराया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में लौटना ही सही दिशा है। बस्तर में अब नक्सलवाद का अंत तय माना जा रहा है, क्योंकि लोग खुद इस विचारधारा से दूरी बना रहे हैं और शांति की राह चुन रहे हैं।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र