केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एक बार फिर बस्तर दौरे पर पहुंच रहे हैं। 18 और 19 मई को होने वाला यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है। अमित शाह अपने कार्यकाल में दसवीं बार बस्तर आ रहे हैं। इससे पहले वे नौ बार बस्तर संभाग का दौरा कर चुके हैं। केंद्र सरकार लगातार बस्तर में नक्सल उन्मूलन, सुरक्षा व्यवस्था और विकास योजनाओं पर फोकस बढ़ा रही है। ऐसे में शाह का यह दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अहम माना जा रहा है।
गृह मंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रायपुर से लेकर जगदलपुर और नेतानार तक सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर काम कर रही हैं। प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया। वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा भी की।
अमित शाह 18 मई को बस्तर पहुंचेंगे। वे आसना स्थित बादल एकेडमी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद नेतानार में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यहां सरकार सुरक्षा केंद्र को जनसुविधा केंद्र के रूप में जनता को समर्पित करेगी। सरकार सुरक्षा कैंपों को केवल सुरक्षा गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहती। प्रशासन इन केंद्रों को स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य, संचार और प्रशासनिक सुविधाओं से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच भरोसा मजबूत होगा। साथ ही नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास गतिविधियों को भी गति मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में सड़क, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर तेजी से काम हुआ है। केंद्र सरकार अब इन योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक समन्वय बढ़ा रही है।
दौरे के दौरान गृह मंत्री सुरक्षा हालात की समीक्षा भी करेंगे। अधिकारी उन्हें नक्सल विरोधी अभियानों, विकास कार्यों और मौजूदा सुरक्षा स्थिति की जानकारी देंगे। समीक्षा बैठक में हाल के महीनों में चलाए गए ऑपरेशनों, नक्सली गतिविधियों और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। केंद्र सरकार लगातार यह संदेश देती रही है कि नक्सलवाद के खिलाफ केवल सुरक्षा अभियान ही नहीं, बल्कि विकास आधारित रणनीति भी जरूरी है।
अमित शाह का बस्तर दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने पहले ही यह घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म कर दिया जाएगा। इसके बाद बस्तर में सुरक्षा बलों ने विशेष अभियान चलाए। सरकार अब दावा कर रही है कि बस्तर क्षेत्र तेजी से नक्सल मुक्त वातावरण की ओर बढ़ रहा है। शाह अपने दौरे में इसी अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
गृह मंत्री नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले जवानों के परिजनों से भी मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा वे प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनेंगे। सूत्रों के मुताबिक सरकार सामाजिक संगठनों और जनजाति क्षेत्रों में काम कर रहे कार्यकर्ताओं से भी संवाद की तैयारी कर रही है। सरकार इस पहल के जरिए बस्तर में शांति और विकास का माहौल मजबूत करना चाहती है।
अमित शाह का बस्तर से जुड़ाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वर्ष 2021 में बीजापुर-सुकमा बॉर्डर पर हुए बड़े नक्सली हमले के बाद वे हालात का जायजा लेने पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी बस्तर का दौरा किया। मार्च 2023 में वे करनपुर कैंप में आयोजित सीआरपीएफ स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए थे। वर्ष 2024 में उन्होंने चुनावी सभाओं को संबोधित किया। अक्टूबर 2025 में वे विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार कार्यक्रम में शामिल होने वाले पहले केंद्रीय गृहमंत्री बने। दिसंबर 2025 में उन्होंने बस्तर ओलंपिक के समापन समारोह में हिस्सा लिया, जबकि फरवरी 2026 में बस्तर पंडुम महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे।
गृह मंत्री का यह दौरा केवल सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकार इसे केंद्र सरकार के उस बड़े संदेश के रूप में देख रहे हैं, जिसमें बस्तर को सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। लगातार बढ़ते दौरों से यह भी साफ हो रहा है कि केंद्र सरकार आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र को विकास और स्थिरता के मॉडल के रूप में स्थापित करना चाहती है।