बंदूकों के साये से बाहर निकला बस्तर, अब विकास बनेगा नई पहचान

कभी बंदूक और बारूद से पहचाना जाने वाला बस्तर, अब विकास और बदलाव की नई कहानी लिखने की तैयारी में है।

The Narrative World    19-May-2026   
Total Views |
Representative Image
 
जगदलपुर में मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले बस्तर से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य हासिल कर लिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और विष्णुदेव साय सरकार की रणनीति से बस्तर अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है। शाह ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर नक्सल उन्मूलन में सहयोग नहीं करने का आरोप भी लगाया।
 
बस्तर में पहली बार आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने कहा कि लंबे समय तक बस्तर के लोग बंदूकों के साये में जीवन जीते रहे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों ने कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाकर नक्सल नेटवर्क को कमजोर किया और सरकार ने विकास योजनाओं को गांवों तक पहुंचाया।
 
 
शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद नक्सल विरोधी अभियान को नई गति मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में केंद्र को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिससे कार्रवाई की रफ्तार प्रभावित हुई। शाह के मुताबिक अब सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर तेजी से काम चल रहा है।
 
उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर में बनाए गए 70 सुरक्षा कैंपों में से करीब एक-तिहाई कैंपों को "वीर शहीद गुंडाधर सेवा डेरा" के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार इन केंद्रों के जरिए स्थानीय लोगों को सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध कराएगी। शाह ने कहा कि सरकार बस्तर को हिंसा से बाहर निकालकर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के रास्ते पर आगे बढ़ाना चाहती है।
 
Representative Image
 
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए। परिषद में कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित इलाकों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया।
 
बैठक में महिलाओं के खिलाफ अपराध और उत्पीड़न के मामलों में तेजी से कार्रवाई करने पर भी चर्चा हुई। राज्यों ने अपराध नियंत्रण को मजबूत करने और आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।
 
इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बैठक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। दीपक बैज की अगुआई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अमित शाह से बस्तर के मुद्दों पर चर्चा करने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद बैज ने कहा कि परिषद की बैठक केवल खानापूर्ति बनकर रह गई।
 
Representative Image
 
बैज ने आरोप लगाया कि सरकार बस्तर के जल, जंगल और जमीन को उद्योगपतियों के हवाले करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें बस्तर के विकास के नाम पर खनिज संसाधनों को बेचने की योजना बना रही हैं। बैज ने दावा किया कि सरकार ने स्थानीय लोगों की आवाज सुनने से बचने के लिए कांग्रेस नेताओं से दूरी बनाई।
 
हालांकि भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें बस्तर में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर काम कर रही हैं। उनका कहना है कि नक्सलवाद खत्म होने से अब क्षेत्र में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
 
 
दीपक बैज ने बैठक के आयोजन के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार पेट्रोल-डीजल बचाने और वर्क फ्रॉम होम की बात करते हैं, लेकिन गृह मंत्रालय और राज्यों के पास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं होने के बावजूद बैठक को वर्चुअल नहीं किया गया। बैज ने इसे सरकारी संसाधनों की अनदेखी बताया।
 
 
दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने साफ किया कि बस्तर में शांति और विकास को स्थायी बनाने के लिए राज्यों के बीच सीधा संवाद जरूरी था। सरकार का मानना है कि नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद अब प्रशासन गांवों तक तेजी से पहुंचेगा और लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान और मजबूत होगा।