पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने 2019 पुलवामा आतंकी हमले के साजिशकर्ता हमजा बुरहान को मार गिराया। बुरहान अल-बद्र आतंकी संगठन के लिए भर्ती, कट्टरपंथ और दुष्प्रचार चलाता था।
पुलवामा हमले में 40 से ज्यादा CRPF जवानों की मौत के बाद भारत ने आतंक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ी थी। अब उसी हमले से जुड़ा एक बड़ा चेहरा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौत का शिकार बना। सुरक्षा एजेंसियां इसे आतंक के नेटवर्क पर बड़ा झटका मान रही हैं। आतंक फैलाने वालों के लिए यह घटना साफ संदेश देती है कि जैसी करनी, वैसी भरनी।
सूत्रों के मुताबिक, हमजा बुरहान पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन अल-बद्र से जुड़ा था। वह लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलने का काम कर रहा था। जांच एजेंसियों ने उसे पुलवामा हमले के दौरान ओवर ग्राउंड वर्कर यानी OGW की भूमिका निभाने वाला प्रमुख व्यक्ति बताया था।
अधिकारियों के अनुसार, बुरहान ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके आतंकवाद का प्रचार किया। उसने पोस्टर, वीडियो और भड़काऊ सामग्री तैयार कर कश्मीर में भारत विरोधी माहौल बनाने की कोशिश की। अल-बद्र ने उसकी मदद से युवाओं को गुमराह किया और आतंकियों को "हीरो" दिखाने का अभियान चलाया।
सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि बुरहान सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं रहा। उसने दक्षिण कश्मीर में युवाओं की भर्ती भी कराई। वह लड़कों को हथियार उठाने के लिए उकसाता था और उन्हें नशे से जुड़े अवैध नेटवर्क में भी धकेलता था। एजेंसियों ने बाद में कई ऐसे युवाओं पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून यानी UAPA के तहत कार्रवाई की।
हमजा बुरहान पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके के खरबतपोरा गांव का रहने वाला था। वर्ष 2017 में वह पढ़ाई के बहाने पाकिस्तान गया। वहां पहुंचने के बाद उसने अल-बद्र आतंकी संगठन जॉइन कर लिया और धीरे-धीरे संगठन का कमांडर बन गया। बाद में वह कश्मीर लौटा और पुलवामा से लेकर शोपियां तक अपना नेटवर्क फैलाने लगा।
स्थानीय सूत्रों ने बताया कि बुरहान के संपर्क में आने के बाद कई युवक आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए। उसने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के दिमाग में जहर भरने का काम किया। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थीं।
14 फरवरी 2019 को पुलवामा के लेथपोरा में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी CRPF काफिले से टकरा दी थी। इस आत्मघाती हमले में 40 जवानों की मौत हुई थी। पूरे देश में उस समय गुस्सा फूट पड़ा था। भारत ने इसके जवाब में बालाकोट एयरस्ट्राइक की और पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।
जांच में सामने आया था कि पुलवामा हमले के पीछे सिर्फ हथियारबंद आतंकी ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर मदद करने वाला एक पूरा नेटवर्क भी सक्रिय था। हमजा बुरहान इसी नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जाता था। वह आतंकियों को स्थानीय सहयोग, प्रचार और युवाओं तक पहुंच दिलाने का काम करता था।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान वर्षों से आतंकवाद को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करता आया है। PoK में आतंकी संगठनों को पनाह, ट्रेनिंग और संसाधन मिलते रहे हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में आतंक के कई चेहरे रहस्यमयी हमलों में मारे गए हैं। इससे आतंकी संगठनों में डर और अविश्वास बढ़ा है।
यह बात पूरी तरह साफ है कि आतंक की राह आखिरकार विनाश तक ही पहुंचाती है। जो लोग युवाओं के हाथों में किताब की जगह बंदूक थमाते हैं, वे अंत में उसी हिंसा का शिकार बनते हैं। हमजा बुरहान की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आतंक का अंजाम हमेशा बर्बादी ही होता है।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र