हेले लेंग : भारत विरोध का नया चेहरा, पुरानी टूलकिट

नॉर्वे दौरे के दौरान एक पत्रकार के सवाल से शुरू हुआ विवाद कैसे भारत की वैश्विक छवि, पश्चिमी मीडिया के नैरेटिव और घरेलू राजनीति की बहस में बदल गया?

The Narrative World    29-May-2026   
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नॉर्वे के ओस्लो में ग्लोबल टूलकिट के प्रोपेगैंडा वाली बात कोई नहीं है। पत्रकार के भेष में हेले लेंग ने अपने ही देश नॉर्वे के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। जब भारत और नॉर्वे अपने महत्वपूर्ण फैसलों को विश्व के समक्ष रख रहे हों, जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है, प्रेस ब्रीफिंग हो। जहां दोनों देशों के प्रमुख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री जोनास, द्विपक्षीय संबंधों एवं फैसलों को प्रेस को ब्रीफ करने के बाद वहां से अपने दूसरे कार्यक्रमों के लिए जा रहे हों। उसी वक्त अचानक वहाँ जानबूझकर योजनाबद्ध तौर पर अपना प्रोपेगैंडा चलाना। हेले लेंग का ये पूछना किप्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों को क्यों नहीं लेते?”


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फिर 2024 के बाद अचानक 2026 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक्टिव होना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ उस वीडियो को मोहतरमा हेले लेंग द्वारा X पर पोस्ट करना। भारत विरोध में विष वमन करना। तत्पश्चात भारत में बैठे भारत विरोधियों का उस पर लहालोट होना। उस वीडियो के सहारे कांग्रेस के राहुल एंड कंपनी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आक्षेप लगाना। राहुल गांधी का सबसे पहले उस वीडियो को रिट्वीट करना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बहाने भारत को अपमानित करना।


ये सब कुंठित और पराजित भारत विरोधी राजनीति के अतिरिक्त कुछ नहीं है। वैश्विक स्तर पर भारत को पत्रकारिता, मानवधिकार आदि पर ज्ञान देना। ये सब पुरानी टैक्टिक्स, टूलकिट के नए प्रयोग हैं। फ़र्क इतना है कि भारत विरोधी कंटेंट वही है, बस पैकेजिंग चेंज है। ये कोई संयोग नहीं है बल्कि भारत की साख को कमतर सिद्ध करने के टूलकिटिए प्रयोग हैं।


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अब आते हैं कहानी पर.. हेले लेंग के X Post के बाद जब भारत के विदेश मंत्रालय (पश्चिमी) के सचिव सिबी जार्ज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्हें बुलाया। वहां हेले लेंग NGOs पैटर्न वाली टूलकिट के क्वेश्चन लेकर आईं। वहां सिबी जार्ज ने उनका अच्छी तरह से ज्ञानवर्धन किया। तथ्य के आधार पर उन्हें समझाया। लेकिन हेले लेंग अपने प्रोपेगैंडा से बाज नहीं आईं। हेले लेंग का एक सवाल उनके प्रोपेगैंडा को आईने की तरह साफ़ कर देता है। हेले पूछती हैं कि 'दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करें?'


उनके इसी सवाल में उनकी और उन्हें प्लांट करने वाले उनके आकाओं की भूमिका स्पष्ट दिखाई देती है। ये सारी योजनाएं भारत की बढ़ती साख, विश्व समुदाय के बीच भारत की स्वीकार्यता के विरुद्ध नैरेटिव चलाने का अहम हिस्सा है। हेले लेंग वही तथाकथित पत्रकार हैं जो चीन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कसीदे पढ़ती रही हैं। उनकी प्रशंसा में आर्टिकल लिखती रही हैं।


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हेले लेंग का एजेंडा एकदम साफ़ था। हालांकि ये सब नई बात नहीं है, भारत के ख़िलाफ़ ये सब वर्षों से जारी है। भारत इन सबसे ऊपर उठकर नए दौर में है। जहां ऐसे सस्ते तरीक़े, पब्लिसिटी स्टंट भारत की साख पर बट्टा नहीं लगा सकते। हां केवल इतना है कि मीडिया की सनसनी ज़रूर बन सकते हैं।

मोदी विरोधियों, भारत विरोधियों के लिए मिर्च मसाला ज़रूर बन सकते हैं। जो लोग ख़ुश हैं कि अहा! हेले लेंग ने तो मोदी की बेइज्जती कर दी। उनकी सोच पर तरस आती है। ये कैसे लोग हैं जिन्हें 'मोदी विरोध और भारत विरोध' में फ़र्क नहीं पता? हेले लेंग स्पष्ट तौर पर भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगल रही हैं। क्या ये भारत में बैठे इन दुर्बुद्धियों को समझ नहीं आता है?


“लेकिन दूसरी ओर चिन्ता की बात ये भी है कि भारत के ख़िलाफ़ जब भी कोई वैश्विक प्रोपेगैंडा चलाया जाता है। ठीक वैसे ही कांग्रेस और राहुल गांधी पूरी ऊर्जा के साथ एक्टिव हो जाते हैं। उन्हें अपनी राजनीति के लिए खाद-पानी भारत विरोधी प्रोपेगैंडा से मिलता है।”


चाहे पूर्व का हिंडनबर्ग रिपोर्ट वाला प्रोपेगैंडा हो, याकि 2021 में किसान आंदोलन के समय ग्रेटा थनबर्ग के ट्वीट वाली टूलकिट या राहुल गांधी का विभिन्न विदेशी यूनिवर्सिटी में पूर्व प्रायोजित कार्यक्रमों में जाकर भारत के लोकतंत्र पर हमला बोलना हो, दूसरे देशों को भारत के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप का आमंत्रण देना हो या दुनिया का ऐसा कोई नेता हो जो भारत के ख़िलाफ़ बोलता है। राहुल एंड कंपनी उस पर प्रो एक्टिव रहती है।


राहुल गांधी इन सबको तोते की तरह रट लेते हैं। फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बहाने अपने ही देश के अपमान में जुट जाते हैं। ठीक ऐसा ही कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी अब हेले लेंग के बहाने कर रहे हैं। शायद अब राहुल गांधी को देश की जनता पर नहीं बल्कि विदेशी टूलकिट पर ज्यादा भरोसा हो गया है?


जबकि आप देखिए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नॉर्वे दौरे से भारत के लिए कितने सुखद संदेश आए। जहां नॉर्वे के राष्ट्र प्रमुख, भारत के साथ आत्मीयता और कृतज्ञता के बोध के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर से लेकर वहां के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे अपने सर्वोच्च सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' से सम्मानित कर रहा है। नॉर्वे समेत विश्व के लगभग 32 से अधिक देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित कर चुके हैं। ये क्या भारत की वैश्विक साख को नहीं बता रहे हैं?


तथाकथित पत्रकार हेले लेंग के कंधे पर बंदूक रखकर भारत विरोध में जो प्रोपेगैंडा चलाया गया, उसे नॉर्वे ख़ुद ध्वस्त कर चुका है। नार्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं। नार्वे के विदेश मंत्री ने जो कहा वो हेले लेंग और राहुल गांधी जैसों के मुंह पर करारा तमाचा है।


विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे ने कहा किप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत के लोकप्रिय और प्रभावशाली राजनेता हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।


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इतना ही नहीं विदेश मंत्री आईडे कह रहे हैं किभारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और बहुत तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। आने वाले समय में यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। भारत एक बहुत महत्वपूर्ण और नवाचार से भरपूर साझेदार है।


क्या नॉर्वे के विदेश मंत्री का ये कहना हेले लेंग और उनके समर्थकों के लिए पर्याप्त नहीं है? ऐसे में हेले लेंगे जैसे टूलकिट वाले एजेंडाबजों की क्रेडिबिलिटी क्या रह जाती है? ये कौन होते हैं जो भारत को ज्ञान देंगे? स्पष्ट है कि भारत विरोध अस्वीकार्य है।


वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। भारत तथा नॉर्वे और दोनों देशों की 50 से अधिक कंपनियों के बीच कई व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। आर्थिक साझेदारी समझौते-टीईपीए TEPA जैसे महत्वपूर्ण निर्णय नई कहानी बयां कर रहे हैं।


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इसके साथ ही विज्ञान, नवाचार, ग्रीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा), (ग्रीन हाइड्रोजन, पवन ऊर्जा), समुद्री अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) और अंतरिक्ष सहयोग की दृष्टि से ऐतिहासिक 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' तथा त्रिकोणीय विकास सहयोग समझौते भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक मजबूती को दर्शा रहे हैं। इतना ही नहीं अंतरिक्ष, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्थिरता, टनलिंग प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हुए समझौते दोनों देशों के संबंधों को गति देने वाले होंगे।


लेकिन रुकिए.. कहानी कुछ और भी है। भारत को लेकर पश्चिमी मीडिया कैसे प्रोपेगैंडा चलाता है। वो भारत के ख़िलाफ़ कैसे Micro Level प्लानिंग के साथ Global Propaganda चलाता है।राष्ट्रनिष्ठ व्यक्ति के लिए उसे समझना इतना भी मुश्किल नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार रहे स्व. उमेश उपाध्याय ने वर्षों के शोध के बाद प्रामाणिक पुस्तक लिखी थी।


'Western Media Narratives on India Gandhi to Modi', इसे मंगाकर पढ़िए। इसके पन्ने पलटिए। आपको पश्चिमी मीडिया से लेकर भारत को लेकर पश्चिम की हीनग्रंथि का सहज ही अनुमान हो जाएगा। ये दुनिया कभी भी भारत की प्रगति बर्दाश्त नहीं कर सकती है। भारत को लेकर दुराग्रह पालने वाला पश्चिमी मीडिया एक ख़ास एजेंडे पर काम करता है। फिर पत्रकारिता पर भारत को ज्ञान बघारता है। स्व. उमेश उपाध्याय ने अपनी पुस्तक में तथ्यात्मक रूप से सारे संदर्भ उकेरे हैं।


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क्योंकि बाजारवादी आसुरी शक्तियां भारत की एकता, शक्ति और सम्प्रभु नीति से भयभीत हैं। उन्हें भारत की स्थिरता रास नहीं आ रही है। ऐसे में वैश्विक शक्तियां भारत के ख़िलाफ़ अनेकानेक प्रोपेगैंडा चलाएंगी। विभाजनकारी, विप्लवकारी टूलकिट चलाएंगी। नाम, चेहरे और स्थान बदले रहेंगे लेकिन उनका काम एक रहेगा। वो है भारत विरोध।भारत को अस्थिर करना। जैसा उन्होंने हमारे पड़ोस नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि में किया। लेकिन भारत के मामले में डीप स्टेट, ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज, भारत विरोधी शक्तियों को मुंह की खानी पड़ी।


किन्तु उनका प्रोपेगैंडा बदस्तूर जारी हैं। ऐसे में कांग्रेस और राहुल गांधी का इनके साथ कदमताल करना। भारत विरोधी हर चीज़ को मुद्दा बनाकर पेश करना। इनसे अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन तलाशना भी कोई नई बात नहीं है। जब भी दुनिया के किसी हिस्से से भारत विरोधी टूलकिट एक्टिवेट होगी। कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी उसके सबसे बड़े प्रचारक के तौर पर आएंगे। क्योंकि भारत की जनता ने उन्हें इतनी बार ख़ारिज कर दिया है कि ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज के अलावा उनके पास अब कोई और सहारा नहीं बचा है।


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बाक़ी भारत के अंदर और बाहर 'सोरोस के जितने पपेट' हैं वो एक स्वर में जोरों-शोरों से ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज की टूलकिट पर काम कर रहे हैं। इन्हें आप अर्बन नक्सलियों के तौर पर भी जानते हैं। जो हर मुद्दे पर, हर प्रोपेगैंडा पर, हर स्थान पर अलग-अलग रूप धरकर आते हैं। लेकिन इन्हें और इनके आकाओं को नहीं पता कि भारत माता की संतानें हर विभाजनकारी मंसूबे को ध्वस्त कर देती हैं। ये नया भारत है जो सर्जन की सामूहिक चेतना के साथ आगे बढ़ चला है। भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। हमारी आपकी सतर्कता और राष्ट्रनिष्ठा भारत विरोधियों की नींद उड़ाने के लिए पर्याप्त है।


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कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल
साहित्यकार, स्तंभकार एवं पत्रकार