टॉप नक्सली हिडमा ढेर, सुकमा में जवानों ने मोर्चा संभाला

माड़ेडुमिली जंगल में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में हिडमा समेत 6 नक्सली मारे गए और सुकमा में दूसरा बड़ा ऑपरेशन जारी है।

The Narrative World    18-Nov-2025
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सुरक्षाबलों ने आंध्र प्रदेश के माड़ेडुमिली जंगल में मंगलवार सुबह टॉप नक्सली माडवी हिडमा समेत छह नक्सलियों को मार गिराया, जबकि सुकमा में दूसरी बड़ी मुठभेड़ जारी है।
 
देश के सबसे खूंखार नक्सली कमांडरों में शामिल माडवी हिडमा मंगलवार को सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई में ढेर हो गया। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के माड़ेडुमिली जंगल में तड़के शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने छह नक्सलियों को खत्म किया। इस कार्रवाई में हिडमा और उसकी पत्नी राजक्का की मौत की पुष्टि सूत्रों ने की। घटनास्थल से हथियार और नक्सली सामग्री बरामद हुई है।
 
सुरक्षाबलों ने सुबह छह से सात बजे के बीच माओवादियों के छिपे होने की सूचना पर ऑपरेशन शुरू किया। जवान इलाके में पहुंचे तो नक्सलियों ने फायरिंग कर दी। जवानों ने जवाबी फायर किया और मिनटों में हिडमा का गिरोह टूट गया। हिडमा लंबे समय से तीन राज्यों की सीमा पर बने माओवादी ठिकानों का प्रमुख चेहरा बना हुआ था और सरकार ने उस पर पचास लाख का इनाम घोषित किया था।
 
चार नक्सलियों की पहचान हुई
 
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1. माडवी हिडमा, केंद्रीय समिति सदस्य
 
2. राजे, डिविजनल कमेटी सदस्य, हिडमा की पत्नी
 
3. चेल्लुरी नरायण उर्फ सुरेश, दक्षिण जोन कमेटी सदस्य
 
4. टेक शंकर
 
 
हिडमा ने वर्षों तक खूनी खेल चलाकर सुरक्षा बलों और नागरिकों पर बड़े हमले करवाए। 2010 में दंतेवाड़ा में 76 जवानों की हत्या, 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं पर घात, और 2021 के सुकमा बीजापुर हमले में 22 जवानों की शहादत जैसे कांड उसी की अगुवाई में हुए। वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी की एक बटालियन का प्रमुख था और माओवादी केंद्रीय समिति का सबसे युवा सदस्य बना। वह बस्तर से केंद्रीय समिति में शामिल होने वाला इकलौता जनजातीय सदस्य था, जिसने अपनी हिंसा से इलाके में आतंक फैला रखा था।
 
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उधर छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एर्राबोर थाना क्षेत्र में दूसरी बड़ी मुठभेड़ मंगलवार सुबह शुरू हुई। पुलिस को रात में सूचना मिली कि इलाके के जंगलों में भारी संख्या में नक्सली छिपे हैं। डीआरजी की टीम ने रात में ही अभियान शुरू किया और सुबह जंगल पहुंचते ही नक्सलियों ने गोलियां चला दीं। जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। कई नक्सलियों के घायल होने की खबर है और सुरक्षाबल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं।
 
सुकमा में यह कार्रवाई पिछले दिनों हुई लगातार सफलताओं का हिस्सा है। 16 नवंबर को डीआरजी ने तुमालपाड़ के जंगलों में तीन नक्सलियों को खत्म किया था। 11 नवंबर को बीजापुर में छह नक्सली मारे गए थे जिन पर सत्ताईस लाख का इनाम था।
 
 
इधर पूरे माओवादी संगठन में भारी संकट गहरा गया है। मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति जैसे शीर्ष नेता संगठन की हिंसक लाइन छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुके हैं और अपने साथियों से हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने की अपील कर रहे हैं। कई कमेटियां टूट चुकी हैं और माओवादी कैडर भारी मतभेदों में बंट गया है।
 
हिडमा की मौत ने माओवादी नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। सुरक्षा बल अब जंगलों में और गहराई तक दबाव बढ़ा रहे हैं और सरकार विकास कार्यों को तेज कर रही है। दशकों से माओवादी हिंसा से दबे आदिवासी इलाकों में यह कार्रवाई एक निर्णायक मोड़ साबित हो रही है।
 
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र