लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में धर्मांतरण के दबाव और महिला कर्मचारियों के शारीरिक तथा मानसिक शोषण के आरोपों की जाँच के बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने गृह विभाग को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कई विभागों में हिन्दू महिलाओं को निशाना बनाने, आरोपितों को संरक्षण देने और शिकायतें दबाने के आरोपों का उल्लेख है। गृह विभाग ने रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
एसटीएफ की जाँच में पैथोलॉजी विभाग विशेष रूप से चर्चा में आया। रिपोर्ट के अनुसार, विभागीय फैकल्टी द्वारा मुस्लिम रेजीडेंट डॉक्टर, स्टूडेंट, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को अनुचित संरक्षण दिया जाता रहा है। इसका परिणाम यह हुआ कि हिन्दू महिला रेजीडेंट डॉक्टर, स्टूडेंट, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मियों के साथ शारीरिक तथा मानसिक शोषण की घटनाएँ होती रहीं। जब कोई पीड़िता आवाज उठाती तो उसके करियर को बर्बाद करने, मानसिक रूप से अस्थिर घोषित करने या नौकरी से निकालने की धमकियाँ देकर मामला दबाने की कोशिश की जाती थी।
रिपोर्ट में कई ठोस उदाहरण दिए गए हैं। नर्सिंग स्टाफ नफीस ने एक सहकर्मी नर्सिंग कर्मचारी को प्रेम के जाल में फँसाकर शारीरिक-मानसिक शोषण किया और कन्वर्जन करवा कर निकाह कर लिया। इसी तरह फुरकान नामक नर्सिंग स्टाफ ने एक अन्य नर्सिंग कर्मचारी को फँसाया और कन्वर्जन के बाद निकाह के लिए दबाव बनाया। रेजीडेंट डॉक्टर आदिल पर दो नर्सिंग स्टाफ के साथ शादी का झाँसा देकर शारीरिक शोषण का आरोप लगा, जिसकी शिकायत थाना कैसरबाग में दर्ज हुई।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कार्यरत शफात अली खान (50 वर्ष) पर संविदा पर काम करने वाली 25 वर्षीय हिन्दू कंप्यूटर ऑपरेटर से छेड़छाड़, पीछा करने और धर्म परिवर्तन तथा निकाह के लिए प्रेरित करने का आरोप है। पीड़िता ने एचओडी से शिकायत की, समिति बनी, लेकिन कार्रवाई के बजाय उसकी संविदा समाप्त कर दी गई। वह अवसाद में चली गई।
पैथोलॉजी विभाग के रेजीडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक पर अपनी जूनियर रेजीडेंट को लंबे समय से प्रेम-जाल में फँसाकर शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न और कन्वर्जन का दबाव बनाने का आरोप है। इनकार करने पर मारपीट की घटनाएँ भी बताई गईं। एक अन्य महिला डॉक्टर (एसएनएमसी आगरा की बैचमेट) ने फोन पर बताया कि रमीज ने उसे भी फँसाकर फरवरी 2025 में कन्वर्जन करवा कर निकाह कर लिया था और कई अन्य हिन्दू लड़कियों के साथ भी ऐसे संबंधों का दावा करता था।
सच जानने के बाद पीड़िता ने 17 दिसंबर 2025 को अधिक मात्रा में डिप्रेशन की दवा खाने के बाद बेहोश हो गई। स्वस्थ होने के बाद 23 दिसंबर 2025 को थाना चौक में अभियोग दर्ज कराया गया। जाँच में यह भी सामने आया कि रमीज केजीएमयू (KGMU) की दो अन्य महिला रेजीडेंट डॉक्टरों को भी कन्वर्जन के लिए उकसा रहा था।
रेडियोलॉजी विभाग में रेजीडेंट डॉक्टर रिजवान पर भी दो महिला रेजीडेंट डॉक्टरों को प्रेम-जाल में फँसाकर कन्वर्जन के लिए उकसाने का आरोप है। पीड़िताओं द्वारा मौखिक शिकायत करने पर फैकल्टी और विभागाध्यक्ष द्वारा मामला दबाने तथा करियर खराब करने या परीक्षा में फेल करने की धमकियाँ दी जाती रहीं।
उत्तर प्रदेश एसटीएफ रिपोर्ट के मुताबिक, मूल रूप से कश्मीर की डॉ. सुमायरा कयूम पैथोलॉजी विभाग में एडिशनल प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पति खलीकुर्रहमान एसजीपीजीआई में प्रोफेसर हैं। दोनों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पासआउट बताए गए हैं। एचओडी सुरेश बाबू ने उन्हें रेजीडेंट डॉक्टरों की छुट्टी स्वीकृत करने का अतिरिक्त दायित्व सौंपा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, वे मुस्लिम रेजीडेंटों के प्रति अत्यधिक उदार और हिन्दू रेजीडेंटों के प्रति कठोर रवैया अपनाती थीं।
2023 बैच की रेजीडेंट डॉ. सबीना को नियमों के विरुद्ध ट्रामा लैब में तैनाती के बावजूद उनके स्थान पर किसी अन्य चिकित्सक की व्यवस्था किए बिना अवकाश दे दिया गया। जबकि उनकी जगह पर आए डॉ. हर्षित जैन को परेशान किया गया। छठ पूजा या दादा-दादी के अंतिम संस्कार जैसे अवसरों पर अवकाश माँगने पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं, जबकि नमाज, विवाह या व्यक्तिगत कार्यों के लिए मुस्लिम रेजीडेंटों को आसानी से अनुमति मिल जाती थी।
एसटीएफ रिपोर्ट के अनुसार, केजीएमयू के विभिन्न विभागों में हिन्दू महिलाओं के शारीरिक-मानसिक शोषण और धर्मांतरण के प्रयासों के कई मामले सामने आए हैं। गृह विभाग ने अब इन आरोपों पर विधिक कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं।
लेख
केवली कबीर जैन
पत्रकारिता छात्र, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय