TMC के गुंडाराज में चुनाव तार-तार, BJP उम्मीदवारों पर हमला और वोटरों में डर

बूथों पर हमले और धमकियों के बीच TMC पर चुनाव प्रभावित करने का आरोप, विपक्षी उम्मीदवारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल।

The Narrative World    29-Apr-2026
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पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की 142 सीटों पर मतदान के दौरान एक बार फिर हिंसा, धमकी और अराजकता ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। सुबह 9 बजे तक 18.39% मतदान दर्ज हुआ, लेकिन कई जिलों से आई घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) निष्पक्ष चुनाव के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनने देना चाहती।
 
 
साउथ 24 परगना जिले के बसंती क्षेत्र में बूथ नंबर 76 पर BJP उम्मीदवार विकास सरदार ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि TMC के गुंडों ने उनकी कार के शीशे तोड़ दिए और उनके सुरक्षाकर्मी की बंदूक छीनने की कोशिश की। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ा और मतदाताओं में भय का माहौल बन गया। यह घटना बताती है कि विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से हटाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
 
 
इसी क्रम में पानीहाटी से BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने भी चौंकाने वाला आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि जब वह मतदान केंद्र के अंदर थीं, तब सब सामान्य था। लेकिन बाहर निकलते ही स्थिति बदल गई। उन्होंने एक बुजुर्ग महिला की मदद करने के लिए कहा, जो खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। तभी करीब 10 मीटर के भीतर TMC के गुंडों ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें बाहर जाने से रोकने की कोशिश की। यह घटना न केवल राजनीतिक हिंसा को उजागर करती है बल्कि मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ भी खड़ी नजर आती है।
 
नादिया जिले के छपरा में भी भाजपा एजेंट ने TMC कार्यकर्ताओं पर लाठी और रॉड से हमला करने का आरोप लगाया। इससे साफ संकेत मिलता है कि हिंसा कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि एक संगठित रणनीति के तहत हो रही है।
 
 
नॉर्थ 24 परगना जिले में कई मतदाताओं ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी और उनके समर्थकों पर धमकाने का आरोप लगाया। मतदाताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान डर का माहौल बनाया जा रहा है। एक व्यक्ति ने कहा कि मुख्यमंत्री को हार का अंदेशा है, इसलिए उनके समर्थक जनता को डराने में लगे हैं। आरोप यह भी सामने आया कि उनके काफिले से उतरे एक व्यक्ति ने लोगों को खुलेआम धमकी दी।
 
हुगली जिले के खानकुल में राजहाटी-1 पंचायत के रामचंद्रपुर स्थित बूथ नंबर 147 पर नकली पोलिंग एजेंट को लेकर विवाद हुआ। इस विवाद ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया और TMC तथा ISF कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट शुरू हो गई। यह घटना चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।
 
 
मानिकतला में भी TMC ने नियमों की अनदेखी की। यहां एक पोलिंग बूथ के पास उम्मीदवार श्रेया पांडे का प्रचार बैनर लगाया गया। चुनाव आयोग स्पष्ट रूप से कहता है कि मतदान केंद्र के 100 मीटर के भीतर प्रचार सामग्री नहीं लगाई जा सकती। इसके बावजूद TMC ने नियमों की परवाह नहीं की और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की।
 
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इन सभी घटनाओं को एक साथ देखें तो एक स्पष्ट पैटर्न सामने आता है। TMC कार्यकर्ता लगातार हिंसा, धमकी और नियमों के उल्लंघन के जरिए चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर होती है और मतदाताओं का भरोसा टूटता है।
 
 
दूसरी ओर, आम जनता ने सुबह से ही मतदान के प्रति उत्साह दिखाया। बड़ी संख्या में महिलाएं बूथों पर पहुंचीं और लंबी कतारों में खड़ी रहीं। जनता ने अपने अधिकार का प्रयोग करने की इच्छा दिखाई, लेकिन TMC की गतिविधियों ने इस प्रक्रिया को बाधित किया।
 
अब यह जरूरी हो गया है कि चुनाव आयोग और प्रशासन सख्त कदम उठाएं। यदि ऐसी घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया, तो चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब हर मतदाता बिना डर और दबाव के अपना वोट डाल सके।
 
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र