चीन का सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट शासन दशकों तक रेडियो और टेलीविजन (TV) के जरिए जनता की सोच को प्रभावित करता रहा। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने इन माध्यमों का उपयोग केवल समाचार प्रसारण के लिए नहीं किया, बल्कि राजनीतिक संदेशों को घर-घर पहुंचाने और जनमत को नियंत्रित करने के लिए भी किया। लेकिन अब वही प्रचार तंत्र आर्थिक दबाव और घटती दर्शक संख्या के कारण लड़खड़ाता नजर आ रहा है। इसका ताजा उदाहरण मध्य चीन के हुबेई प्रांत में सामने आया है, जहां कई सरकारी TV और रेडियो चैनल इस महीने के अंत तक बंद हो जाएंगे।
10 जून को हुबेई TV ने घोषणा की कि वह अपने दो टेलीविजन चैनलों और तीन रेडियो फ्रीक्वेंसी का संचालन बंद कर देगा। चीन के राष्ट्रीय रेडियो एवं TV प्रशासन ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है और यह 30 जून से प्रभावी होगा। आधिकारिक बयान में संस्थान ने इस कदम को रेडियो और TV उद्योग की विकास आवश्यकताओं से जोड़ा, लेकिन अंदरूनी जानकार इस दावे से सहमत नहीं हैं।
हुबेई TV की एक पूर्व पत्रकार ने बताया कि स्थानीय प्रसारण संस्थानों ने लंबे समय तक मीडिया संगठन का रूप धारण किया, जबकि वास्तव में उन्होंने CCP के प्रचार तंत्र के रूप में काम किया। उनके अनुसार, वर्षों तक सरकार ने इन चैनलों के माध्यम से अपनी नीतियों और विचारों को जनता तक पहुंचाया, लेकिन अब लोग इन माध्यमों से दूर होते जा रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या दर्शकों और विज्ञापनदाताओं के पलायन की है। पहले स्थानीय TV चैनलों को बड़ी संख्या में विज्ञापन मिलते थे, जिससे उनका खर्च निकल जाता था। अब कंपनियां अपने विज्ञापन बजट को शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म, लाइवस्ट्रीमिंग सेवाओं और ई-कॉमर्स मंचों पर खर्च कर रही हैं। युवा पीढ़ी भी पारंपरिक TV देखने के बजाय मोबाइल आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक समय बिताती है। ऐसे में सरकारी चैनलों की आय लगातार घटती चली गई।
पूर्व पत्रकार के अनुसार, हुबेई TV के पास बड़ी संख्या में चैनल, कर्मचारियों का विशाल ढांचा और महंगे उपकरण थे। प्रबंधन ने पिछले कुछ वर्षों में कर्मचारियों की संख्या कम की, लेकिन खर्च में अपेक्षित कमी नहीं आई। आखिरकार संस्थान ने चैनल बंद करने का रास्ता चुना।
चैनलों के बंद होने की घोषणा के साथ हुबेई TV ने "मुख्यधारा मीडिया के व्यवस्थित सुधार" की बात भी कही। हालांकि चीन में इस तरह की सरकारी भाषा अक्सर वास्तविक स्थिति को छिपाने का माध्यम बनती है। व्यवहारिक स्तर पर "व्यवस्थित सुधार" का अर्थ विभागों का विलय, कर्मचारियों की छंटनी और कम दर्शक वाले चैनलों को बंद करना होता है।
वित्तीय आंकड़े भी संकट की पुष्टि करते हैं। हुबेई प्रसारण प्रणाली से जुड़ी सूचीबद्ध कंपनी ने 2025 में लगभग 1.52 अरब युआन का राजस्व दर्ज किया, लेकिन इसके बावजूद उसे करीब 1.1 अरब युआन का शुद्ध घाटा हुआ। 2026 की पहली तिमाही में भी कंपनी ने नुकसान दर्ज किया। इसके अलावा, बकाया भुगतान की राशि उसकी वार्षिक आय के लगभग 79 प्रतिशत तक पहुंच गई। ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या केवल दर्शकों की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कारोबारी मॉडल पर सवाल खड़े हो चुके हैं।
हुबेई का मामला कोई अपवाद नहीं है। चीनी मीडिया पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरे देश में चल रही एक व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। स्थानीय TV स्टेशनों में छंटनी बढ़ रही है और कई संस्थान कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं दे पा रहे हैं। उत्तर-पूर्वी चीन के कई क्षेत्रों में दर्जनों काउंटी स्तर के TV स्टेशन पिछले कुछ वर्षों में बंद हो चुके हैं।
उद्योग से जुड़े आंकड़े इस प्रवृत्ति को और स्पष्ट करते हैं। चीन ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क की जनवरी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, केवल 2025 में देशभर में कम से कम 75 TV चैनल बंद हुए। इनमें प्रांतीय और नगर स्तरीय प्रसारण संस्थानों के चैनल भी शामिल थे। इससे एक वर्ष पहले 2024 में 51 चैनलों ने प्रसारण बंद किया था। यह लगातार बढ़ती संख्या बताती है कि संकट गहराता जा रहा है।
दशकों तक चीन के रेडियो और TV नेटवर्क शहरों से लेकर गांवों तक फैले रहे। उन्होंने केवल सूचना नहीं दी, बल्कि CCP के राजनीतिक संदेशों को भी लोगों तक पहुंचाया। पार्टी ने इन माध्यमों को सामाजिक नियंत्रण के महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया। लेकिन डिजिटल युग ने इस मॉडल को चुनौती दे दी। सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो और ऑनलाइन लाइवस्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने दर्शकों और विज्ञापन बाजार दोनों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
यही कारण है कि 2023 में चीनी नियामकों ने पूरे देश में रेडियो और TV संसाधनों के एकीकरण का अभियान शुरू किया। प्रशासन ने प्रसारकों को कम दर्शक संख्या, कमजोर प्रभाव और सीमित विकास क्षमता वाले चैनल बंद करने के निर्देश दिए। सरकार इस प्रक्रिया को "संसाधन एकीकरण" कहती है, लेकिन यह केवल और केवल CCP के पारंपरिक प्रचार मॉडल की कमजोर होती पकड़ को छिपाने का प्रयास है।
हुबेई में चैनलों का बंद होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि उस बदलाव का संकेत है जिसमें आर्थिक वास्तविकताएं और डिजिटल प्रतिस्पर्धा चीन के लंबे समय से स्थापित प्रचार तंत्र को चुनौती दे रही हैं। जिस व्यवस्था ने वर्षों तक जनमत को नियंत्रित करने की कोशिश की, वही अब दर्शकों का विश्वास और ध्यान बनाए रखने के लिए संघर्ष करती दिख रही है।