चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की 105वीं वर्षगांठ के मौके पर 1 जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास के बाहर लोकतंत्र समर्थकों ने प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालकर पार्टी के अंत की मांग की और उसके शासन को दमनकारी बताया।
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में चीनी लोकतंत्र समर्थकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस अनोखे प्रदर्शन के जरिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों ने "END CCP" लिखी एक ताबूत को चीनी वाणिज्य दूतावास तक ले जाकर नारे लगाए। उन्होंने "कम्युनिस्ट पार्टी मुर्दाबाद" और "कम्युनिस्ट गिरोह मुर्दाबाद" जैसे नारे बुलंद किए। आयोजकों ने इस प्रदर्शन को CCP की "प्रतीकात्मक विदाई" बताया।
प्रदर्शन 1 जुलाई को हुआ, जब चीन में कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी स्थापना के 105 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। हालांकि लोकतंत्र समर्थकों ने इस दिन को उत्सव नहीं, बल्कि चीन में दशकों से चले आ रहे दमन, सेंसरशिप और राजनीतिक नियंत्रण की शुरुआत का प्रतीक बताया।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले लोकतंत्र समर्थक जी लीजियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रदर्शन से पहले लिखा कि एक अरब से अधिक चीनी नागरिक लंबे समय से कम्युनिस्ट शासन के अंत का इंतजार कर रहे हैं। उनके मुताबिक CCP के पतन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई चीन के लोगों के लिए खुशियों का नहीं, बल्कि पीड़ा और उत्पीड़न की शुरुआत का दिन बन गया। उनका मानना है कि जिस दिन CCP का शासन खत्म होगा, उसी दिन चीन के लोगों को दमन और भय से वास्तविक मुक्ति मिलेगी।
प्रदर्शन के दौरान जब शवयात्रा चीनी वाणिज्य दूतावास के मुख्य प्रवेश द्वार के पास पहुंची तो वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने इमारत का सुरक्षा गेट नीचे कर दिया। लोकतंत्र समर्थक यांग माओसेन ने इस घटना को प्रतीकात्मक बताते हुए कहा कि ऐसा लगा मानो CCP ने अपने ही राजनीतिक मकबरे का दरवाजा बंद कर लिया हो। उन्होंने दावा किया कि चीन की जनता लगातार राजनीतिक नियंत्रण, अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध और मानवाधिकार हनन का सामना कर रही है।
इस विरोध प्रदर्शन के एक अन्य आयोजक और चाइना डेमोक्रेसी पार्टी के सदस्य युआन झे ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अमेरिका में प्रदर्शन करना नहीं था। वे पूरी दुनिया का ध्यान उस व्यवस्था की ओर आकर्षित करना चाहते थे, जिसे प्रदर्शनकारी वैश्विक अस्थिरता और दमन का बड़ा कारण मानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां भी CCP अपना प्रभाव बढ़ाती है, वहां राजनीतिक दबाव, भय और अस्थिरता भी बढ़ती है।
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने चीन के नए एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस प्रमोशन लॉ का भी कड़ा विरोध किया। यह कानून 1 जुलाई से लागू हुआ। आलोचकों का आरोप है कि यह कानून अलग-अलग जातीय समुदायों को जबरन मुख्यधारा में मिलाने की नीति को और मजबूत करता है। साथ ही यह चीन के बाहर रहने वाले चीनी नागरिकों और असंतुष्टों पर भी राजनीतिक दबाव बढ़ाने का रास्ता खोलता है।
युआन झे ने कहा कि चीन के भीतर कम्युनिस्ट शासन के आलोचकों को लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। इतना ही नहीं, कई लोग देश छोड़ने के बाद भी कथित तौर पर CCP समर्थक नेटवर्क और एजेंसियों के दबाव का सामना करते हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक देशों से अपील की कि वे इस तरह के अंतरराष्ट्रीय दमन को गंभीरता से लें और सतर्क रहें।
यांग माओसेन ने भी इसी मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नया कानून केवल घरेलू प्रशासन तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक यह विदेशों में रहने वाले चीनी नागरिकों और असहमति रखने वालों पर निगरानी तथा दबाव को वैधता देने की कोशिश करता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस प्रकार के सीमा पार दमन का विरोध करने की अपील की।
उसी दिन न्यूयॉर्क में चीनी वाणिज्य दूतावास के सामने नदी किनारे तिब्बती संगठनों ने भी अलग प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति, सांस्कृतिक पहचान पर बढ़ते दबाव और नए एथनिक यूनिटी कानून का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजिंग की नीतियां स्थानीय संस्कृतियों और धार्मिक पहचान को खत्म करने का प्रयास करती हैं।
लोकतंत्र समर्थकों का कहना है कि चीन में एकदलीय व्यवस्था ने दशकों से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, स्वतंत्र न्याय व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित रखा है। उनका दावा है कि आम नागरिकों को सरकार की आलोचना करने की खुली आजादी नहीं मिलती और असहमति जताने वालों को अक्सर कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। इसी कारण विदेशों में रहने वाले अनेक चीनी नागरिक और निर्वासित कार्यकर्ता लगातार लोकतांत्रिक बदलाव की मांग उठाते रहे हैं।
देखा जाए तो यह प्रदर्शन लंबे समय से चल रहे विरोध अभियान की एक और कड़ी माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे चीन में लोकतांत्रिक व्यवस्था, नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की बहाली की मांग जारी रखेंगे। उनका कहना है कि केवल सत्ता परिवर्तन ही चीन के लोगों को राजनीतिक दमन और भय के माहौल से बाहर निकाल सकता है।