भगवान श्रीराम को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेताओं के विवादित बयान और राजनीतिक यू-टर्न

कैसे भगवान श्रीराम और राम मंदिर को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेताओं के पुराने बयान आज उनके राजनीतिक रुख पर सवाल खड़े करते हैं?

The Narrative World    09-Jul-2026   
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राम मंदिर निर्माण का दशकों तक विरोध करने वाला विपक्ष आज उसी राम मंदिर को राजनीतिक हथियार बनाने में जुटा हुआ है। जब मंदिर बना नहीं था, तब आज का विपक्ष राम मंदिर के निर्माण के विरोध में खड़ा था। स्थिति यहां तक रही कि कांग्रेस की सरकारों ने मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के बीच मंदिर निर्माण के लिए कभी कोई सार्थक कदम नहीं उठाया। वहीं, समाजवादी पार्टी की सरकार ने असंख्य रामभक्तों पर गोली चलवाई और उनकी बेरहमी से हत्या करवाई। अब जब राम मंदिर अपने भव्य स्वरूप में तैयार है, तो वही राजनीतिक दल राम मंदिर के नाम पर नया नैरेटिव गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, सोशल मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार फैलाकर हिंदू समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा करने की कोशिशें भी कर रहे हैं। इसी क्रम में शिवसेना (यूबीटी) ने राम मंदिर के चढ़ावे के कथित दुरुपयोग के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना शुरू कर दिया।
 
चिंता की बात यह है कि यह सब तब हो रहा है, जब उत्तर प्रदेश सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में विपक्ष का यह रवैया आस्था से अधिक अवसरवाद की राजनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
 
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 3 जुलाई 2026 को अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग के मुद्दे को लेकर भाजपा पर हमला बोलते हुए इसे "देशद्रोह" करार दिया और हिंदुओं से "राम रक्षा आंदोलन" में शामिल होने की अपील की। ठाकरे ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और उसके साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।
 
हालांकि, ठाकरे की भगवान श्रीराम में कितनी आस्था है, इसका अंदाजा पिछले कुछ वर्षों में उनके और उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा भगवान राम, हिंदुत्व, हिंदू धार्मिक प्रतीकों और मंदिरों को लेकर दिए गए बयानों और की गई टिप्पणियों से लगाया जा सकता है।
 
नीचे उद्धव ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के ऐसे ही कुछ बयान और घटनाएं प्रस्तुत हैं।
 
1. "महाराष्ट्र में जय श्रीराम नहीं, जय महाराष्ट्र चलेगा" : संजय राउत
 
 
बीएमसी चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि मुंबई में "जय श्रीराम" का नहीं, बल्कि "जय महाराष्ट्र" का नारा चलेगा।
 
2. हिंदू प्रतीकों पर व्यंग्य और प्रधानमंत्री पर कटाक्ष
 
उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंग्य करते हुए कहा कि "उन्होंने कैलाश पर्वत बनाया, गंगा धरती पर लाई और समुद्र मंथन भी किया।" राजनीतिक कटाक्ष के दौरान हिंदू धार्मिक प्रतीकों और पौराणिक संदर्भों का इस प्रकार प्रयोग अनावश्यक है और सनातन का मजाक बनाने के प्रयास को झलकाता है।
 
3. भगवान मुरुगन मंदिर मामले में न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग अभियान

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मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने कार्तिकई दीपम परंपरा के पक्ष में निर्णय दिया था, जिसके बाद उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। बता दें कि इस प्रस्ताव पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने भी हस्ताक्षर किए।
 
4. "हिंदू हृदय सम्राट" विवाद
 
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे अब बालासाहब ठाकरे को "हिंदू हृदय सम्राट" कहने से बचते हैं।
 
 
सोशल मीडिया पर वायरल एक इंटरव्यू में भी उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के संदर्भ में इस विषय पर प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद यह मुद्दा व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
 
5. केदारनाथ मंदिर से सोना चोरी का दावा
 
उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि केदारनाथ मंदिर से 200 किलो से अधिक सोना चोरी हो गया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इस दावे को निराधार बताया। बाद में उत्तराखंड सरकार की जांच रिपोर्ट में भी किसी प्रकार की चोरी या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद विपक्ष ने ठाकरे पर बिना प्रमाण हिंदू मंदिरों की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया।
 
6. राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन अयोध्या न जाने का निर्णय
 
रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर उद्धव ठाकरे ने अयोध्या जाने के बजाय नासिक के कालाराम मंदिर में पूजा करने की घोषणा की। उनका यह निर्णय राम मंदिर के ऐतिहासिक अवसर से दूरी बनाने को दर्शाता है।
 
7. हिंदू स्वस्तिक और नाजी प्रतीक की तुलना
 
शिवसेना स्थापना दिवस कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि "हिटलर का प्रतीक भी स्वस्तिक था।"
 
इस बयान के बाद इतिहासकारों ने कहा कि हिंदू स्वस्तिक और नाजी हेकेनक्रूज़ दोनों अलग-अलग प्रतीक हैं। दोनों की तुलना करना तथ्यात्मक रूप से गलत और धार्मिक दृष्टि से भी अनुचित है।
 
8. "गौमूत्रधारी हिंदुत्व" टिप्पणी
 
एमवीए की रैली में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और आरएसएस के हिंदुत्व को "गौमूत्रधारी हिंदुत्व" कहा।
 
 
इससे पहले भी वे गौमूत्र और गोबर को लेकर कई विवादित टिप्पणियां कर चुके थे।
 
9. हिंदुत्व और ब्राह्मण पर टिप्पणी को लेकर विवाद
 
महाराष्ट्र विधानसभा में उद्धव ठाकरे ने विपक्ष पर टिप्पणी करते हुए कहा कि "जो लोग पहले राशिफल पढ़ते थे, अब किताबें और रिपोर्ट पढ़ रहे हैं।" राजनीतिज्ञों ने इसे ब्राह्मण समाज और पारंपरिक मान्यताओं पर कटाक्ष बताया।
 
 
लेख

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केवली कबीर जैन
पत्रकारिता छात्र, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय