चीन के चमकते शहरों, कारखानों और विशाल निर्माण परियोजनाओं के पीछे ग्रामीण प्रवासी श्रमिकों की मेहनत है। फिर भी उनमें से अनेक लोग जिस शहर में काम करते हैं, वहाँ के स्थानीय निवासी के समान सरकारी सुविधाएँ नहीं पा सकते। इसकी एक बड़ी वजह चीन की हूकोउ व्यवस्था है।
हूकोउ क्या है और इसका असर किस पर पड़ता है?
हूकोउ चीन की घरेलू पंजीकरण व्यवस्था है। कोई ग्रामीण निवासी रोज़गार के लिए शहर जा सकता है, लेकिन वहाँ काम करना और उस शहर का स्थानीय हूकोउ मिलना अलग बातें हैं। स्थानीय पंजीकरण के बिना शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास और सामाजिक सुरक्षा तक पहुँच में बाधाएँ आ सकती हैं। नियम शहर और सेवा के अनुसार बदलते हैं। इसका असर श्रमिकों के बच्चों पर भी पड़ता है।
विश्व बैंक के एक विश्लेषण के अनुसार, शहर में बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी बाधाओं के कारण कई माता-पिता उन्हें गाँव में छोड़कर काम करने जाते हैं। परिवार आर्थिक रूप से शहर पर निर्भर होता है, लेकिन साथ रहने का अवसर खो देता है।
इलाज में भी पंजीकरण का फर्क महसूस होता है। चीन की सरकारी वेबसाइट पर प्रकाशित एक विवरण ने स्वीकार किया कि स्थानीय हूकोउ के बिना कुछ प्रवासी श्रमिकों को शहर के पंजीकृत निवासियों के मुकाबले चिकित्सा खर्च की कम प्रतिपूर्ति मिलती है। यानी एक ही शहर में रहने वाले दो परिवारों के लिए इलाज का आर्थिक बोझ अलग हो सकता है।
चीन के सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2025 में चीन में 30.11 करोड़ ग्रामीण प्रवासी श्रमिक थे।
सुधार के वादे, बराबरी का अधूरा सवाल
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार इस समस्या से अनजान नहीं है। उसने 2024 में शहरों में हूकोउ प्राप्त करना आसान बनाने की योजना घोषित की। मई 2026 में सरकार ने स्थानीय हूकोउ के बिना रहने वालों के लिए बुनियादी सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने के दिशा-निर्देश भी जारी किए। सरकारी जानकारी के अनुसार, 25 करोड़ लोग शहरों में स्थानीय हूकोउ के बिना रह रहे थे।
चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी ने छोटे और मध्यम शहरों में पंजीकरण की शर्तें ढीली करने की भी बात कही है। लेकिन हूकोउ मिलने के नियम, स्कूलों में प्रवेश और सेवाओं की उपलब्धता हर जगह एक जैसी नहीं हैं।
किसी नीति की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि उसने कितने लोगों को आवेदन करने दिया। यह भी देखना होगा कि प्रवासी परिवार जिस शहर में रहते हैं, वहाँ उन्हें व्यवहार में कितनी सुविधाएँ मिलती हैं।
यहीं चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से कठिन सवाल पूछा जाना चाहिए - जब चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी दशकों से इस असमानता को जानती है, तो बराबरी को अब भी चरणबद्ध घोषणाओं पर क्यों छोड़ा गया है?
विश्व बैंक के विश्लेषण ने पहले के सुधारों के बावजूद शहरी सुविधाओं की खाई बने रहने की ओर ध्यान दिलाया था। नए दिशा-निर्देश उस खाई को कम कर सकते हैं, लेकिन उनका असर स्थानीय स्तर पर लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
विकास की तस्वीर में श्रमिक कहाँ हैं?
चीन की एकदलीय सत्ता अपने विकास मॉडल की उपलब्धियाँ दुनिया के सामने रखती है। उसी मॉडल को चलाने वाले श्रमिकों के परिवारों की स्थिति भी उसकी जवाबदेही का हिस्सा होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति वर्षों तक शहर के निर्माण, कारखाने या सेवा क्षेत्र में काम करता है, तो उसके बच्चे की पढ़ाई और परिवार का इलाज स्थानीय पंजीकरण के कारण कठिन नहीं होना चाहिए।
हूकोउ पर सुधार की घोषणा करना पहला कदम है। असली परीक्षा यह है कि बिना स्थानीय हूकोउ वाला बच्चा पास के स्कूल में पढ़ सके, उसके माता-पिता इलाज का खर्च उठा सकें और परिवार साथ रह सके।
भला शहर बनाने वालों को उसी शहर में बराबरी के लिए इंतज़ार क्यों करना पड़े?
लेख
मोक्षी जैन
उपसंपादक