वर्ष 2025 भारत के पर्यटन इतिहास में स्वर्णिम अध्याय बनकर उभरा। देश के कोने कोने में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और बेहतर बुनियादी ढांचे ने मिलकर ऐसा वातावरण बनाया कि घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या ने नए कीर्तिमान स्थापित किए। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, 10 राज्यों ने अपने यहां अब तक की सर्वाधिक पर्यटक आमद दर्ज की। यह उछाल न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत देता है, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान को भी नई ऊंचाई देता है।
सबसे पहले
उत्तर प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व नेतृत्व किया। वर्ष 2025 में राज्य ने 137 करोड़ से अधिक घरेलू और 3.66 लाख विदेशी पर्यटकों का स्वागत किया। प्रयागराज में महाकुंभ 2025 ने 66 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। साथ ही अयोध्या, वाराणसी, मथुरा वृंदावन और श्रावस्ती ने आस्था और संस्कृति के केंद्र के रूप में नई पहचान बनाई। राज्य सरकार ने 1,283 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के जरिए घाटों, सर्किट और संपर्क मार्गों को सशक्त किया। दीपोत्सव, रंगोत्सव और देव दीपावली जैसे आयोजनों ने रोजगार और राजस्व दोनों को गति दी।
इसी क्रम में
हिमालयी राज्य सिक्किम ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। वर्ष 2025 में यहां 17 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। घरेलू पर्यटकों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी दिखी। सड़क मरम्मत और राष्ट्रीय राजमार्ग 10 के सुधार कार्यों ने राज्य को फिर से सुलभ बनाया। स्थिर परिस्थितियों में अधिकारियों ने 20 लाख पर्यटकों का लक्ष्य तय किया।
राजस्थान ने अपनी विरासत और विविध पर्यटन स्थलों के दम पर मजबूत स्थिति बनाई। 2025 के
पहले नौ महीनों में ही 17.34 करोड़ घरेलू पर्यटक राज्य पहुंचे। जयपुर और उदयपुर के साथ पुष्कर, कुंभलगढ़ और रणथंभौर जैसे स्थलों ने भी भरपूर लाभ उठाया। नए होटलों, डेस्टिनेशन वेडिंग और घरेलू यात्रा की बढ़ती प्रवृत्ति ने राजस्थान को पर्यटन का मजबूत स्तंभ बनाए रखा।
गोवा ने यह साबित किया कि पर्यटन केवल समुद्र तट तक सीमित नहीं रहता। 2025 में घरेलू पर्यटक
5.4 प्रतिशत बढ़े और विदेशी पर्यटक 29 प्रतिशत से अधिक बढ़े। रूस और मध्य एशिया से नई चार्टर उड़ानों ने गोवा को नए बाजारों से जोड़ा। पर्यटन ने राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार में अहम योगदान दिया।
दक्षिण भारत में तमिलनाडु ने भी शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2025 के
पहले आठ महीनों में ही 24.21 करोड़ पर्यटक राज्य पहुंचे। सरकार ने 700 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाया। सतत पर्यटन और निजी निवेश पर जोर देकर तमिलनाडु ने विकास और पर्यावरण संतुलन का संदेश दिया।
केरल ने 2025 में पर्यटन के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। नौ महीनों में
1.85 करोड़ पर्यटक पहुंचे। बेहतर हवाई संपर्क, सुरक्षा मानक और विविध पर्यटन उत्पादों ने राज्य को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया। बैकवाटर, समुद्र तट, आयुर्वेद और जिम्मेदार पर्यटन ने केरल को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।
जम्मू कश्मीर ने चुनौतियों के बावजूद पर्यटन में मजबूती दिखाई।
वर्ष 2025 में 1.58 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे। वैष्णो देवी यात्रा ने जम्मू क्षेत्र को नई ऊर्जा दी। कश्मीर घाटी में अस्थायी व्यवधान के बाद पर्यटन गतिविधियों ने फिर से रफ्तार पकड़ी।
पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल ने विदेशी पर्यटकों के मामले में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की। 2025 के
पहले छह महीनों में ही 27.11 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। बेहतर कानून व्यवस्था, ईको टूरिज्म और प्रशिक्षित गाइडों ने राज्य की छवि को मजबूत किया।
असम ने वन्यजीव पर्यटन में नया इतिहास रचा। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में विदेशी पर्यटकों की संख्या
127% बढ़ी। संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल ने असम को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दी।
मेघालय ने भी 2025 में लगभग
15 लाख पर्यटकों का स्वागत किया। चेरी ब्लॉसम महोत्सव जैसे आयोजनों ने पर्यटन को बढ़ावा दिया। कुछ क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के बावजूद राज्य ने अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को आकर्षित किया।
कुल मिलाकर, वर्ष 2025 ने यह स्पष्ट किया कि भारत एक समग्र पर्यटन शक्ति के रूप में उभर रहा है। विविधता, आस्था, प्रकृति और विकास के संतुलन ने देश को वैश्विक पर्यटकों की पसंदीदा भूमि बनाया। यह पर्यटन उछाल आत्मनिर्भर भारत और मजबूत राष्ट्र की दिशा में एक सशक्त कदम बनकर सामने आया।
लेख
शोमेन चंद्र