मुलुगु जिले की तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर गुरुवार तड़के सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में
पांच माओवादियों को मार गिराया और केंद्र ने 9 फरवरी से नक्सल प्रभावित जिले घटाकर सात कर दिए।
गुरुवार सुबह खुफिया सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने कर्रेगुट्टा वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सर्च अभियान शुरू किया। सूचना मिली कि शीर्ष माओवादी नेता अपने दस्ते के साथ जंगल में छिपे हैं। मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से फायरिंग हुई और सुरक्षा बलों ने पांच माओवादियों को मार गिराया। अधिकारियों ने आशंका जताई कि मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है, हालांकि पहचान की प्रक्रिया जारी है।
इस अभियान में डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, कोबरा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और एसटीएफ के जवान शामिल रहे। जवानों ने जंगल और आसपास के जनजाति गांवों में गहन तलाशी ली। जैसे ही फायरिंग की खबर फैली, मुलुगु के एजेंसी इलाके के गांवों में दहशत फैल गई। लोग घरों में सिमट गए और आवाजाही थम गई।
इधर मुलुगु और जयशंकर भूपालपल्ली जिलों में पुलिस ने हाई अलर्ट जारी किया। एतुरुनगरम, मंगापेटा, वेंकटापुरम और वाजेडु थाना क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने सघन जांच शुरू की। पुलिस ने मुलुगु के साथ काताराम और महादेवपुर में भी वाहन जांच तेज कर दी। एतुरुनगरम के सहायक पुलिस अधीक्षक मनन भाट ने बताया कि मुठभेड़ छत्तीसगढ़ की सीमा में हुई, लेकिन दोनों राज्यों की पुलिस लगातार समन्वय बनाए रख रही है।
सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस इलाके में सक्रिय माओवादी नेटवर्क पर नजर रखे हुए थीं। खुफिया तंत्र ने हाल के दिनों में शीर्ष कमांडरों की गतिविधियों का इनपुट दिया था। इसी आधार पर बलों ने सटीक कार्रवाई की। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से माओवादियों को बड़ा झटका लगा है और सीमा क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर होगी।
उधर केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों की
ताजा समीक्षा में बड़ी सफलता दर्ज की। गृह मंत्रालय ने 9 फरवरी से नई श्रेणी लागू करते हुए नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या आठ से घटाकर सात कर दी। सरकार ने हाल में नौ राज्यों के 38 जिलों की विस्तृत समीक्षा की। इनमें झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल रहे।
नई सूची में छत्तीसगढ़ के बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर और दंतेवाड़ा, झारखंड का पश्चिम सिंहभूम और ओडिशा का कंधमाल शामिल हैं। इनमें बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा को सबसे अधिक प्रभावित जिले की श्रेणी में रखा गया है। कांकेर और पश्चिम सिंहभूम को चिंता वाले जिले माना गया है, जहां नक्सली असर घट रहा है, लेकिन सरकार संसाधनों की तैनाती जारी रखेगी। दंतेवाड़ा और कंधमाल को अन्य प्रभावित जिलों में रखा गया है।
गृह मंत्रालय ने 31 जिलों को लेगेसी और थ्रस्ट श्रेणी में रखा है। सरकार इन इलाकों में सुरक्षा के साथ विकास कार्यों को भी आगे बढ़ा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा है कि सरकार मार्च 2026 तक नक्सल समस्या को खत्म करेगी। उन्होंने नक्सली हिंसा को लोकतंत्र के लिए चुनौती बताया और कहा कि अब तक करीब 17 हजार नागरिक और जवान इस हिंसा में जान गंवा चुके हैं।
हाल की मुठभेड़ और घटते जिलों की संख्या सरकार की रणनीति को मजबूती देती है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से माओवादी नेटवर्क टूट रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति लौटाने की दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट
शोमेन चंद्र