देश में मदरसों को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। मजहबी और वामपंथी समूह अक्सर मंदिरों और धार्मिक संस्थानों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग राज्यों से मदरसों से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कहीं सरकारी योजनाओं में करोड़ों का घोटाला पकड़ा गया, कहीं आतंकियों के मॉड्यूल चलाने के आरोप लगे, तो कहीं नकली नोट छापने और हथियार छिपाने जैसी घटनाएं सामने आईं। इन मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कुछ मदरसों की आड़ में किस तरह का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।
सबसे ताजा मामला
25 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आया। आर्थिक अपराध शाखा यानी (EOW) की जांच में खुलासा हुआ कि दो कमरों वाले एक मदरसे में 5,500 छात्रों का फर्जी दाखिला दिखाकर अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत करीब 4 करोड़ रुपये हड़प लिए गए।
जांच एजेंसियों ने बताया कि यह खेल 2010-11 से लेकर 2015-17 के बीच चला। मदरसा संचालकों ने स्कूल प्रबंधकों और कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को चूना लगाया। जांच में सामने आया कि जमीन पर छात्रों का कोई अस्तित्व नहीं था, लेकिन रिकॉर्ड में हजारों बच्चों के नाम दिखाकर छात्रवृत्ति की रकम निकाल ली गई।
इससे पहले
2 मई 2026 को बाराबंकी में मदरसा शिक्षकों की फर्जी बायोमेट्रिक हाजिरी का मामला सामने आया। जांच में पता चला कि मदरसा इस्लामिया स्कूल में कर्मचारी प्लास्टिक कार्ड और अंगूठे के निशान की मदद से अनुपस्थित शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करते थे। अधिकारियों ने पाया कि ऑनलाइन फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम न होने का फायदा उठाकर वर्षों तक वेतन और भत्ते निकाले गए।
एटीएस जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोग ब्रिटेन और दुबई में रहने के बावजूद सरकारी वेतन और पेंशन लेते रहे। जौनपुर के मदरसा अबरे रहमत से जुड़े प्रबंधक बाबर कुरैशी समेत कई लोगों पर जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू किया।
उत्तर प्रदेश के हरदोई में
2 मार्च 2025 को एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। पुलिस ने मदरसे से जुड़े दो नाबालिग लड़कों को गिरफ्तार किया।
दोनों ने रेलवे ट्रैक पर लोहे के बोल्ट रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की साजिश रची। पुलिस जांच में पता चला कि दोनों पहले रेलवे ट्रैक पर सेल्फी लेते दिखे और फिर ट्रैक से छेड़छाड़ की। समय रहते मामला पकड़ में आने से बड़ा हादसा टल गया।
इसी तरह
14 दिसंबर 2024 को झांसी और कानपुर में ट्रेन पलटाने की साजिश के पीछे भी मदरसा कनेक्शन सामने आया।
एनआईए और एटीएस की जांच में खुलासा हुआ कि कुछ लोग ऑनलाइन माध्यमों से युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहे थे और उन्हें ट्रेन पलटाने की ट्रेनिंग दे रहे थे। जांच एजेंसियों ने मदरसा शिक्षक मुफ्ती खालिद नदवी को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा था।
प्रयागराज में
28 अगस्त 2024 को पुलिस और पीडीए ने अवैध मदरसे पर बड़ी कार्रवाई की। अतरसुइया इलाके के जामिया हबीबिया मदरसे में नकली नोट छापने का धंधा चल रहा था।
डीसीपी सिटी की छापेमारी में तीन लोग मशीन के साथ पकड़े गए। पुलिस ने मौके से 1.30 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए। जांच में सामने आया कि मदरसा पंजीकृत भी नहीं था। 10 कमरों वाले इस भवन में करीब 70 बच्चे पढ़ते थे। इसके बाद प्रशासन ने पूरे भवन को सील कर दिया।
दिल्ली में
अक्टूबर 2023 में पकड़े गए इस्लामिक स्टेट मॉड्यूल के तार भी उत्तर प्रदेश के एक मदरसे से जुड़े मिले।
गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद रिजवान अशरफ ने आजमगढ़ के बिलरियागंज स्थित मदरसा फलहा में करीब आठ साल तक पढ़ाई की थी। जांच एजेंसियों ने बताया कि वह विदेश में बैठे हैंडलर शाहनवाज के संपर्क में था और दिल्ली में विस्फोट की साजिश रच रहा था। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर आईईडी बनाने के लिए सामग्री भी जुटाई।
असम में भी कई मदरसों पर गंभीर आरोप लगे।
जुलाई 2022 में मोरीगांव के एक मदरसे से जिहादी गतिविधियां चलाने का मामला सामने आया।
असम पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुफ्ती मुस्तफा नामक संदिग्ध को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों का दावा था कि यह मॉड्यूल राज्य में बड़े हमले की तैयारी कर रहा था।
इसके एक महीने बाद
अगस्त 2022 में बारपेटा के एक मदरसे से दो मौलानाओं को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के मुताबिक अकबर अली और अबुल कलाम आजाद नाम के दोनों आरोपी अलकायदा और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम जैसे आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों मदरसे से ही नेटवर्क चलाते थे।
बिहार के बांका जिले में
नवंबर 2021 में एक मदरसे से चार देसी कट्टे और आठ गोलियां बरामद हुईं।
करहरिया गांव स्थित जामिया अरबिया तालीमुल कुरान मदरसे में पुलिस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। यह मदरसा वर्ष 2003 से संचालित हो रहा था और यहां बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जाती थी।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में नवंबर 2020 में एनआईए ने दारुल हुदा इस्लामिया मदरसे के शिक्षक अब्दुल मोमिन मंडल को गिरफ्तार किया।
जांच एजेंसी के मुताबिक वह अलकायदा मॉड्यूल चलाता था और नए लोगों की भर्ती के साथ आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाता था। एनआईए ने दावा किया कि उसके संबंध पश्चिम बंगाल और केरल में सक्रिय नेटवर्क से जुड़े थे।
इन घटनाओं ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर सरकारें शिक्षा और छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ संस्थानों में भ्रष्टाचार, कट्टरपंथ और आपराधिक गतिविधियों के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
जांच एजेंसियां अब ऐसे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। साथ ही यह मांग भी तेज हो रही है कि मदरसों के वित्तीय लेनदेन, शिक्षण व्यवस्था और गतिविधियों की सख्ती से निगरानी की जाए, ताकि शिक्षा के नाम पर देशविरोधी और आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा न मिल सके।