4 मई 2026 को असम सहित चार राज्यों के नतीजों में हिमंत बिस्वा सरमा ने सत्ता बरकरार रखी और NDA ने 102 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
असम विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति की दिशा साफ कर दी। मतगणना शुरू होते ही BJP के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन तेजी से बहुमत के आंकड़े 64 सीटों को पार करता गया और कुछ ही घंटों में 102 सीटों तक पहुंच गया। 126 सदस्यीय विधानसभा में यह जीत बेहद निर्णायक रही।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार BJP ने 82 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने 10-10 सीटें हासिल कीं। इस तरह NDA ने कुल 102 सीटों पर कब्जा जमाया। दूसरी ओर कांग्रेस 19 सीटों पर सिमट गई और AIUDF को सिर्फ 2 सीटें मिलीं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस जीत के सबसे बड़े चेहरा बनकर सामने आए। उन्होंने जलुकबाड़ी सीट से 89,434 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम ने उनकी लोकप्रियता को मजबूत किया और यह भी दिखाया कि BJP ने शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में अपनी पकड़ बनाए रखी।
वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगियों को करारी हार मिली। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, जिन्हें पार्टी ने मुख्यमंत्री चेहरा बनाया था, जोरहाट सीट से BJP के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से हार गए। उनके साथ ही अखिल गोगोई और लुरिंज्योति गोगोई भी चुनाव नहीं जीत सके। 'तीन गोगोई' गठबंधन का दावा पूरी तरह कमजोर साबित हुआ।
इस चुनाव में 85.9% से अधिक मतदान दर्ज हुआ, जो 1951 के बाद सबसे ज्यादा है। विपक्ष ने 'साइलेंट वेव' का दावा किया था, लेकिन नतीजों ने इस दावे को खारिज कर दिया।
अब सवाल उठता है कि BJP को इतनी बड़ी जीत कैसे मिली। गुवाहाटी के वरिष्ठ पत्रकार दीक्षित शर्मा के अनुसार इस जीत के पीछे कई अहम कारण रहे।
पहला कारण गौरव गोगोई से जुड़ा विवाद रहा। उनकी पत्नी से जुड़ा मुद्दा चुनाव के दौरान चर्चा में आया, जिससे उनकी छवि पर असर पड़ा और मतदाताओं के बीच संदेह पैदा हुआ।
दूसरा कारण हिमंत बिस्वा सरमा की आक्रामक चुनावी रणनीति रही। उन्होंने पूरे राज्य में लगातार रैलियां कीं और सीधे मुद्दों पर जनता से संवाद किया, जिससे उनका संदेश तेजी से लोगों तक पहुंचा।
तीसरा बड़ा फैक्टर BJP की कल्याणकारी योजनाएं रहीं। सरकार की योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा, जिससे मतदाताओं में सकारात्मक माहौल बना और लोगों ने सरकार पर भरोसा जताया।
चौथा मुद्दा 'मिया मुस्लिम' और अवैध घुसपैठ का रहा। बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर BJP ने लगातार अभियान चलाया और इस विषय को चुनाव में प्रमुखता दी। यह मुद्दा खासतौर पर असम के स्थानीय समुदायों के बीच प्रभावी साबित हुआ।
BJP ने अपने अभियान में अतिक्रमण हटाने, अवैध घुसपैठ पर कार्रवाई और स्थानीय समुदायों के विकास जैसे मुद्दों को लगातार उठाया। इन मुद्दों ने मतदाताओं के बीच गहरी पकड़ बनाई और पार्टी को फायदा मिला।
दिलचस्प बात यह रही कि चार राज्यों में हुए चुनावों में कोई भी अन्य मुख्यमंत्री अपनी सत्ता नहीं बचा सका। पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन देखने को मिला, जबकि असम में जनता ने मौजूदा सरकार को फिर मौका दिया।
पुडुचेरी में NDA सरकार ने अपनी स्थिति बरकरार रखी, लेकिन राज्यों में केवल असम ही ऐसा रहा जहां मुख्यमंत्री दोबारा सत्ता में लौटे। इस तरह हिमंत बिस्वा सरमा की जीत ने न केवल असम में BJP की स्थिति मजबूत की, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक स्पष्ट संदेश दिया।